समुद्र के सीने को चीरकर आगे बढ़ने वाले जहाजों ने हमेशा से ही हमारे मन में कौतूहल पैदा किया है। प्रारंभ में जहाँ समुद्री आवागमन एवं व्यापार छोटी नावों तक सीमित था, वही आज विशालकाय पोत में तबदील हो चुका है। समय के साथ बढ़ते नावों के आकार की तरह इन जहाजों में रोजगार के अवसर भी काफी बढ़े हैं। मर्चेंट नेवी एक ऐसा ही क्षेत्र है, जिसमें आप सुनहरे भविष्य की ओर मजबूती से कदम बढ़ा सकते हैं। मर्चेंट नेवी (व्यापारिक जहाजरानी) व्यापारिक जहाजों के जरिए सामान लाने-ले जाने वाली सेवा है। कभी-कभी इसके जरिए यात्रियों को भी लाया-ले जाया जाता है।
वर्तमान में मैरीन इंजीनियरिंग में बूम की स्थिति है। भारत के अलावा नार्वे, जापान, ग्रीस, फ्रांस, ब्रिटेन और सिंगापुर की बड़ी शिपिंग कंपनियों में हमेशा ही मैरीन इंजीनियरों की भारी माँग बनी रहती है और भारत से होने वाले व्यापार विनिमय में भारी उछाल को देखते हुए आगे भी यही स्थिति बनी रहेगी। इसे देखते हुए कोई भी व्यक्ति जो मर्चेंट नेवी से संबंधित को र्स कर चुका है, खाली नहीं बैठ सकता।
यदि आप स्वयं को आत्मविश्वास से पूर्ण, अपने दायित्वों के प्रति जागरूक तथा चुनौतियों का सामना करने में सजग व सशक्त पाते हैं तो मर्चेंट नेवी अर्थात व्यापारिक समुद्रिक विज्ञान के क्षेत्र में आपके लिए सुनहरे अवसरों की को ई कमी नहीं है क्योंकि यह एक ऐसा क्षेत्र है जो रोमांच और उत्तेजनाओं से भरा है। सचमुच मर्चेंट नेवी साहसी युवको के लिए पद, प्रतिष्ठा पैसे और उत्साह से भरपूर जीवन पाने के अवसर उप्लब्ध् कराती है। जहाज में आमतौर पर तीन मुख्य विभाग होते हैं- डेक विभाग, इंजन विभाग और सर्विस विभाग। डेक विभाग- इसमें मुख्य रूप से जहाज के कप्तान, उपकप्तान, सहायक कप्तान, चालक, पान मास्टर आदि आते हैं। जहाँ के मुखिया कप्तान का मुख्य दायित्व जहाज तथा उसके सभी कर्मचारियों व माल आदि का सुरक्षित परिवहन है। जहाज के कर्मचारियों और चालक दल पर इसका पूर्ण नियंत्रण होता है।
उपकप्तान-कप्तान के बाद जहाज का दूसरा मुख्य अधिकारी होता है। कप्तान की सहायता करने के साथ-साथ इसका मुख्य कार्य डेक कर्मचारियों, माल लादना, भंडारण आदि की गतिविधियों पर नजर रखना होता है। यह प्रशिक्षुओं व कर्मियों पर अनुशासन रखता है तथा उन्हें कार्य आवंटित करता है। सहायक कप्तान- इसका मुख्य काम फर्स्ट मेट और कप्तान को जहाज के कामकाज और नौवहन के उचित संचालन में सहयोग करना है। माल लादने और उतारने के समय मुख्य रूप से इसे रात्रि पाली की देखरेख करनी होती है। क्रढोनोमीटर, गाइरोकपास आदि जैसे मुख्य नौवहन उपकरणों की देखभाल और कर्मचारियों की शिऍट ड्यूटी का संचालन भी इसी के जिऔमे होता है।
द थर्ड मेट- इसका मुख्य कार्य सिग्नल उपकरणों, सुरक्षा और लाइफ बोट्स आदि की देखभाल करना होता है। यह इंजन तक कप्तान के आदेश भी पहुँचाता है और उन आदेशों का पालन भी करवाता है।
पायलट ऑफ शिप- इसकी मुख्य जिम्मेदारी आने-जाने के लिए नहर अथवा बंदरगाह आदि में पानी के अन्य जहाजों के अनुरूप स्वयं के जहाज की गति एवं दिशा तय करने जैसे कार्य करने की होती है।
सेरंग- यह डेक कर्मचारियों पर नियंत्रण रखता है तथा सुपरवाइजरी का कार्य करता है।
इंजन विभाग- इस विभाग का मुख्य उत्तरदायित्व जहाज के इंजन तथा उस पर नियंत्रण रखने वाले उपकरणों का रखरखाव करना तथा उनकी मरम्मत आदि करना होता है। इसमें मुख्य रूप से निमन् अधिकारी होते हैं-
शिप इंजीनियर- मुख्य अधिकारी होने के नाते इसे सभी इंजनों, बायलरों, इलेक्ट्रिक प्रशीतन, सेनेटरी उपकरणों, डेक मशीनरी व स्टीम कनेँशनों के सही व सहज संचालन की जिम्मेदारी निभानी होती है। यह इंजन रूम का प्रभारी होता है।
इलेक्ट्रिकल ऑफिसर- इंजन रूम के सभी इलेक्ट्रिकल उपकरणों को संभालने का मुख्य दायित्व इलैँट्रिकल ऑफिर का ही होता है।
रेडियो ऑफिसर-मैरीन रेडियों ऑफिसर के नाम से प्रसिद्ध इस पद को पाने के लिए युवा वर्ग बहुत लालायित रहता है। यह मुख्य रूप से डेक पर काम करने वालों पर नियंत्रण रखता है। इस पद के लिए वायरलेस, कम्प्यूटर तथा संदेश संप्रेषण के अन्य अत्याधुनिकतम उपकरणों, उनके संचालन, संदेश संप्रेषण आदि की जानकारी का होना भी जरूरी है।
नॉटिकल सर्वेयर- इसका मुख्य कार्य सागर के क्षेत्र विशेष के नँशे, चार्ट आदि तैयार करना होता है ताकि बीच समुद्र में जहाज कहीं भटक न जाए या किसी समुद्री पर्वत, टापू या चट्टान से टकरा न जाए।
सेवा विभाग- जहाज की मरऔमत करने से लेकर उस पर काम करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के रहने, भोजन, वस्त्र आदि की व्यवस्था का काम सेवा विभाग करता है। इसमें मुख्य स्टीवर्ड पूरे कामकाज की देखभाल करता है।
यदि आप मर्चेंट नेवी के क्षेत्र में कॅरियर बनाना चाहते हैं तो इसके दो रास्ते हैं- समुद्री इंजीनियरी में बी.एससी. की डिग्री हासिल कर या अभियांत्रिक अथवा समुद्री इंजीनियरी शाखाओं में डिग्री के उपरांत आप मर्चेंट नेवी में जा सकते हैं। भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान और गणित विषयों के साथ १२वीं परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद आप किसी जहाज में डेक कैडेट के रूप में प्रवेश ले सकते हैं। यहाँ आप तीन साल तक काम करते हुए प्रशिक्षण प्राप्त् करते हैं। नेविगेटिंग ऑफिसर या नौ संचालन अधिकारी के रूप में नियुक्ति के लिए प्रशिक्षण के बाद भूतल परिवहन मंत्रालय द्वारा ली जाने वाली दक्षता परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक होता है। इसके अलावा डिग्री पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए उम्मीदवारों को शारीरिक और मानसिक रूप से भी फिट होना चाहिए। नेविगेशन का प्रशिक्षण प्राप्त् करने के बाद इनकी नियुक्ति कैप्टन श्रेणी के अधिकारी के रूप में होती है। इस क्षेत्र में करियर बनाने की इच्छा रखने वालों की दृष्टि पूरी तरह सही होनी चाहिए जबकि समुद्री इंजीनियरों को प्लस-माइसन २.५ अंक तक के दृष्टि दोष को ठीक करने के लिए चश्मा पहनने की छूट है। वर्णांधता (कलर ब्लाइंडेनेस) इस व्यवसाय में अयोग्यता मानी जाती है।
मर्चेंट नेवी का प्रशिक्षण देने वाली दो अग्रणी संस्थाएँ हैं- ट्रेनिंगशिप चाणँय, मुंबई जिसमें समुद्री विज्ञान (नॉटिकल साइंसेज) में ३ वर्ष का डिग्री पाठ्यक्रम उप्लब्ध् है और समुद्री इंजीनियरी अनुसंधान संस्थान, कोलकाता जहाँ समुद्री इंजीनियरी (मेरीन इंजीनियरी) में ४ साल का प्रशिक्षण दिया जाता है। इन दोनों संस्थानों के लिए उम्मीदवारों का चयन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) की संयुक्त प्रवेश परीक्षा के आधार पर होता है। यदि आप किसी प्रायवेट संस्थान से मैरीन इंजीनियरिंग का कोर्स करना चाहते हैं तो उसे सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त् होना चाहिए। अन्यथा आपकी ३-४ वर्षों की मेहनत एवं डिग्री प्राप्त् हेतु खर्च किया गया धन व्यर्थ चला जाएगा। मर्चेंट नेवी में वेतन व अन्य भी काफी आकर्षक हैं। समुद्री अधिकारियों के लिए शिपिंग कंपनियों में प्रतिमाह ३० से ४० हजार रुपए मिलते हैं। अनुभव के आधार पर इनका वेतनमान १ लाख रुपए तक पहुँच जाता है। इस क्षेत्र के प्रशिक्षितों के लिए विदेशी जहाजरानी कंपनियों में भी रोजगार के अच्छे अवसर उप्लब्ध् हैं। कई बहुराष्ट्रीय जहाजरानी कंपनियाँ डॉलर के रूप में वेतन देती हैं जिसकी राशि काफी अधिक होता है।
भारत सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त् कुछ प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं-
- एँवाटेक इंस्टीट्यूट ऑफ मेरीटाइम स्टडीज, नई दिल्ली
- हिन्दुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापट्ट नम
- को चीन पोर्ट ट्रस्ट, कोच्ची
- इंस्टीट्यूट ऑफ मेरीटाइम स्टडी, गोआ
- ओसेनिक मैरीन एकेडमी, देहरादून
- चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट, चेन्नई।
- सीवी रमन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, भुवनेश्वर
मर्चेंट नेवी में प्रवेश से संबंधित विस्तृत जानकारी हेतु आप जहाजरानी महानिदेशालय, जहाज भवन, बालचंद-हीराचंद मार्ग, बलार्ड एस्टेट, मुम्बई - ३३ तथा मैरीन इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट पी- १९, ताराटोला रोड, को लकाता-३८ से भी संपर्क कर सकते हैं।