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ऐसे करें मध्यप्रदेश राज्य सेवा मुख्य परीक्षा की तैयारी
Publish Date: 6/17/2010


जिन विद्यार्थियों ने 9 मई, 2010 को मध्यप्रदेश राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2010 दी है और जिनका प्रस्तुतीकरण उपयुक्त रहा है, उन्हें मध्यप्रदेश राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2010 की तैयारी शुरू करनी चाहिए। मध्यप्रदेश राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में सफलता के लिए मध्यप्रदेश राज्य सेवा मुख्य परीक्षा की प्रकृति को समझना एवं प्रश्नपत्रों के बारे में सुनियोजित तैयारी बेहद जरूरी है। गौरतलब है कि राज्य सेवा मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक शैली में होती है। मध्यप्रदेश राज्य सेवा मुख्य परीक्षा के सभी प्रश्नपत्रों की अवधि 3 घंटे होती है। निर्धारित अवधि में अभ्यर्थी को प्रश्नपत्रों के उत्तर देना होते हैं। सामान्य अध्ययन के तीनों (हिन्दी सहित) प्रश्नपत्र सभी के लिए अनिवार्य होते हैं। वैकल्पिक विषय का प्रश्नपत्र अभ्यर्थी द्वारा चुना जाता है। प्रश्नपत्रों की भाषा वह चुनें जिसमें आप सहजता से लिख सकते हों, समझ सकते हों, दूसरों को समझा सकते हों और वही आदर्श भाषा माध्यम है। उसी भाषा माध्यम में आप बेहतर अभिव्यक्ति कर सकते हैं और बेहतर अभिव्यक्ति ही आपको सफलता दिलाने में सक्षम होती है। मुख्य परीक्षा में सही भाषा माध्यम का चयन अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। अत: ध्यान रखें भाषा माध्यम का चयन किसी के कहने पर, किसी के सुझाव पर नहीं करके स्वेच्छा से गहन चिंतन के बाद करना चाहिए। इस भ्रांति से हमेशा दूर रहना चाहिए कि अंग्रेजी भाषा माध्यम अधिक अंक दायिनी है या अंग्रेजी भाषा माध्यम टॉपर्स की भाषा होती है। यह निराधार है। अंक सिर्फ आपके उत्तरों के प्रस्तुतिकरण पर निर्भर करते हैं। मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए अधिक समय की माँग रहती है, यदि आप देरी से अपनी तैयारी प्रारंभ करेंगे, तो ठीक तरह से तैयारी करना मुमकिन नहीं हो पाएगा।

समय प्रबंधन- मध्यप्रदेश राज्यसेवा मुख्य परीक्षा में सफलता प्राप्त करने की रणनीति का सबसे अहम विषय समय का प्रबंधन करना है। तैयारी प्रारंभ करने से पूर्व आप अपने समय का प्रबंधन करें, ताकि नियत समय पर सभी प्रश्नपत्रों की तैयारी की जा सके। समय के प्रबंधन के बिना सफला प्राप्त करना बहुत ही कठिन है । समय के प्रबंधन के लिए सबसे पहले आप तैयारी प्रारंभ करने के दिन से लेकर मुख्य परीक्षा तक के कुल दिनों को परीक्षा के सात प्रश्नपत्रों में विभाजित कर प्रत्येक प्रश्नपत्र के लिए प़ढ़ाई के दिन तय करें। सभी प्रश्नपत्रों की तैयारी के लिए समय का उचित प्रबंधन अवश्य करें। लेखन एवं शब्द सीमा का अभ्यास- मध्यप्रदेश राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में आपके लेखन की बहुत बड़ी भूमिका होती है। लेखन में सुंदर हस्तलेखन, सटीक तार्किक अभिव्यक्ति एवं शब्द सीमा का ख्याल रखा जाना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। आपने कितनी भी अच्छी तरह से परीक्षा की तैयारी की हो, यदि आप बेहतर ढ़ंग से अभिव्यक्ति नहीं कर सकते, तो सच मानिए आपकी विफलता इसी में निहित है। अत: राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में प्रविष्ट होने वाले अभ्यर्थी अपनी तैयारी प्रारंभ करने के दौरान नियमित लेखन का अभ्यास अवश्य करें। जो सोचते हैं कि पहले प़ढ़ लेते हैं अंतिम एक-दो दिन लेखन का अभ्यास करने के लिए रख लेंगे, तो वे सर्वथा भूल करते हैं, क्योंकि लेखन के अभ्यास के बिना पूरी तैयारी व्यर्थ हो जाएगी।

अब समझ लीजिए यदि आपको एकदम सही, सटीक उत्तर देना है, तो लेखन का अभ्यास करना होगा। यदि हम राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में सफलता की दृष्टि से भी बात करें, तो 50 प्रतिशत भूमिका अच्छे अंक दिलाने में सिर्फ लेखन की होती है। इसके साथ ही शब्द सीमा में उत्तर लिखने का प्रयास करें। यदि शब्द सीमा का ध्यान न रखा जाए तो आप कितना ही अच्छा लिखें, आप सफलता नहीं प्राप्त कर सकते हैं। नियमितता से अधिक अच्छा सफलता का सहज उपाय नहीं हो सकता। नियमित तैयारी में स्वाध्याय, नोट्स बनाना, लेखन का व्यवस्थित तरीके से अभ्यास करना, पूर्व वर्षों के प्रश्नपत्रों से गहनता से रूबरू होना इत्यादि गतिविधियों को जारी रखें। जिस तरह नियमितता आवश्यक है, ठीक उसी तरह प़ी गई पाठ्यवस्तु का दोहराना अत्यावश्यक होता है अन्यथा कई बार ऐसा होता है कि आप आगे तैयारी करते चलते हैं और पीछे भूलते जाते हैं, अंतत: परिणाम नगण्य होता है। अत:आप किसी भी तरह न्यूनतम अवधि में दोहराने के कार्यक्रम को अवश्य व्यवस्थित करें। अंत में सफलता के लिए जो सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, वह है परीक्षा के कुछ दिन पूर्व अपना स्वयं का आकलन करें, इससे आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी । आकलन के लिए राज्य सेवा मुख्य परीक्षा के पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को आधार मानकर मॉडल पेपर तैयार करें और उसको निर्धारित अवधि में हल करें। अंत में निष्कर्ष निकालें कि आपकी स्थिति क्या है? जो खामियाँ रह गई हैं उन पर ध्यान केंद्रित कर उन्हें दूर करने का प्रयास करें। जो खामियाँ रह जाती हैं उन्हें छिपाने के बजाय महसूस करते हुए उन पर विशेष ध्यान दें। फिर देखिए आपको मनचाही सफलता प्राप्त करने से कौन रोक सकता है ?

प्रामाणिक पाठ्य सामग्री- मुख्य परीक्षा की तैयारी में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप प्रामाणिक पाठ्य-सामग्री का अध्ययन करें । मुख्य परीक्षा में प्रविष्ट होने वाले अभ्यर्थी विशेषकर अपने वैकल्पिक विषयों की पाठ्य सामग्री के चयन में सर्वथा सावधानी बरतें । इस घोर प्रतिस्पर्धा और विज्ञापन वाले युग में आपके लिए सबसे जटिल समस्या प्रामाणिक पाठ्य सामग्री के चयन की है। प्रतियोगी परीक्षाओं की मध्यप्रदेश सामान्य ज्ञान पर केंद्रित प्रतियोगिता निर्देशिका का नियमित अध्ययन आवश्यक है। प्रतिदिन दो प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्रों (विशेष रूप से संपादकीय पृष्ठ )का अवलोकन करें।

सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्रों के तहत जो भी प्रश्न पूछे जाते हैं, वे कुछ हद तक तथ्यात्मक तो होते ही हैं, साथ ही वे काफी हद तक परिकल्पनात्मक एवं विचारात्मक भी होते हैं। यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि इस खंड के कई प्रश्न वर्तमान संदर्भ में ही पूछे जाते हैं। अत: अभ्यर्थियों को यह चाहिए कि वे जिस किसी भी प्रश्न का उत्तर लिख रहे हों, उस प्रश्न को वे वर्तमान परिप्रेक्ष्य में ही लिखने का प्रयास करें तथा अपने उत्तर को पूरी सामयिकता प्रदान करें। आपको सदैव व्यावहारिक एवं समसामयिक संदर्भ में ही अपना उत्तर लिखने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि आपके उत्तर प्रासंगिकता एवं नवीनता प्राप्त कर सकें। स्पष्ट है कि आपसे जो भी प्रश्न पूछे जाएँगे, वे तथ्यात्मक होने के साथ-साथ विचारात्मक भी होंगे। अत: ऐसे प्रश्नों का उत्तर लिखते समय आपको पूर्णत: व्यावहारिक एवं प्रासंगिक दृष्टि कोण अपनाना होगा, ताकि आप अच्छे अंक प्राप्त् कर सकें। साथ ही, आपको चाहिए कि आप अपने उत्तर में नवीनतम जानकारियाँ एवं आँकड़े भी जरूर डालें (आँकड़े मानक होने चाहिए), जो कि आपके उत्तर को और भी अधिक प्रामाणिकता एवं प्रासंगिकता प्रदान करने वाले होते हैं।

यह सच है कि सामान्य अध्ययन का पाठ्यक्रम काफी व्यापक है और इसके संपूर्ण अध्ययन के लिए अभ्यर्थियों को सदैव जागरूक एवं सचेष्ट रहने की जरूरत है। सामान्य अध्ययन एक निरंतर प्रक्रिया है, जिस पर अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए आपको सतत रूप से इससे संपर्क साधना होगा । यदि आप अपने अंदर कुछ जिज्ञासा बनाए रखते हैं तथा सदैव कुछ नए की तलाश में रहते हैं, तो आप चाहे- अनचाहे ही सामान्य अध्ययन की तैयारी करते रहते हैं। जिन अभ्यर्थियों में ऐसी जिज्ञासा अथवा कौतूहल होती है, वे सामान्य अध्ययन के प्रति काफी सहजता महसूस करते हैं। ऐसी स्थिति में, वे अन्य अभ्यर्थियों से कहीं अधिक लाभ की स्थिति में होते हैं। आपको यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र में अभ्यर्थियों के बीच अंकों का अंतर काफी अधिक देखा गया है और यदि आप इसकी तैयारी के प्रति संतुलित एवं व्यावहारिक रुख अपनाते हैं तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है।