सदियों से जारी चोरी, हत्या, डकैती, अपहरण और लूटपाट जैसे अपराधों की दुनिया में साइबर क्राइम ने एक नए अवतार के रूप में प्रवेश किया और देखते ही देखते इंटरनेट साइट की हैकिंग, क्रेडिट कार्डों से लेनदेन में हेराफेरी, साइबर वायरस से सिस्टम में छेड़छाड़ के प्रकरणों की बा़ढ़-सी आ गई। कुछ समय पहले तक कानून के प्रावधानों में ऐसे अपराधों का न तो कहीं वर्णन था और न ही इससे निपटने के तरीके कहीं खोजे मिलते थे। परंतु जब सूचना प्रौद्योगिकी संसार और साइबर जगत में अपराधों के प्रकरण ब़ढ़ने लगे तो अंतरराष्ट्रीय सहयोग से साइबर लॉ बनाए गए। जब साइबर लॉ बन गए तो इन्हें जानने वालों तथा इनका उपयोग कर साइबर क्राइम पर अंकुश लगाने वाले कानूनविदों की जरूरत महसूस की जाने लगी। साइबर अपराध के अवतरण के साथ ही साइबर लॉयर (वकील) ने भी कानूनी जगत में अवतार लिया और साइबर अपराध और साइबर लॉयर के टकराव ने करियर निर्माण के एक अनूठे और संभावनाओं से भरपूर अवसर को पैदा किया।
गौरतलब है कि भारत एशिया का दूसरा और दुनिया का १२वाँ ऐसा देश है जिसका अपना अलग इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम २००० के अंतर्