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बायोइन्फरमेटिक्स के क्षेत्र में रोजगार के अवसर

जीव विज्ञान के क्षेत्र में निरंतर बढ़ रहे अनुसंधान एवं अन्य तकनीको के प्रयोग ने अब इसे संख्यात्मक विज्ञान में परिवर्तित कर दिया है। आँकड़ों को सहेजने के लिए अब जीव विज्ञान क्षेत्र में भी कम्प्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग बहुत बढ़ गया है। इसी कारण से बायोइन्फरमेटिक्स (जैव सूचना प्रौद्योगिकी) का उदय हुआ। बायोइन्फरमेटिक्स जीव विज्ञान से संबंधित जानकारी व आँकड़ों को व्यवस्थित करने वाली सूचना तकनीक है। बायोइन्फरमेटिक्स का सीधा-साधा अर्थ है- अनुसंधान, विकास एवं गणनात्मक साधनों का अनुप्रयोग।

बायोइन्फरमेटिक्स एक ऐसा क्षेत्र है, जिसके माध्यम से भंडारित, संग्रहित, अभिलेखित एवं विश्लेषणात्मक आँकड़ों को किसी को उप्लब्ध् कराया जाता है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि बायोइन्फरमेटिक्स में बुनियादी अथवा मूल जीवशास्त्र के गणित, सांख्यिकी और गणनात्मक विज्ञान के समागम से बड़ी संख्या में उत्पन्न नए आँकड़ों का विश्लेषण किया जाता है। इसका उपयोग मानवीय बीमारियों के साथ-साथ जीन आधारित दवाइयों की खोज और विकास को समझने के लिए भी किया जाता है। दवा, बायोटेक, कृषि व खाद्य जैसे क्षेत्रों में बायोइन्फरमेटिक्स का उपयोग हाल के वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ा है तथा यह क्षेत्र प्रमुख करियर विकल्प के तौर पर उभरा है।

गौरतलब है कि विज्ञान और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन डिपार्टमेंट ऑफ बॉयोटेक्नोलॉजी ने बायोइन्फरमेटिक्स के माध्यम से बॉयोटेक्नोलॉजी के लिए अधोसंरचना निर्मित करने के उद्देश्य से १९८७ में बॉयोटेक्नोलॉजी इन्फरमेशन सिस्टम की स्थापना की। इस समय संपूर्ण विश्व में बीटीआईएस को बायोइन्फरमेटिक्स के क्षेत्र में अति आधुनिक अधोसंरचना, शिक्षा, मानव शक्ति तथा साधन प्रदान करने वाला प्रमुख वैज्ञानिक नेटवर्क माना जाता है। भारत दुनिया का पहला देश है, जहाँ देशभर में बायोइन्फरमेटिक्स नेटवर्क स्थापित किया गया है। डिपार्टमेंट ऑफ बॉयोटेक्नोलॉजी ने ५७ प्रमुख अनुसंधान केंद्रों को जोड़कर पूरे देश में इसके लिए एक संजाल खड़ा कर रखा है। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि भारत अपनी जैव विविधता व मानव संसाधन के कारण इस क्षेत्र में बहुत प्रगति कर रहा है।

उल्लेखनीय है कि बायोइन्फरमेटिक्स ऑपरेशंस के लिए संगठित डाटाबेस की आवश्यकता होती है। इसके लिए उच्च स्तरीय हार्डवेयर एवं सॉऍटवेयर की जरूरत होती है। इसलिए इस क्षेत्र में औद्योगिक व शैक्षणिक दोनों ही क्षेत्र के विशेषज्ञों की भारी माँग है। वर्तमान में स्थिति यह है कि कंपनियों को इस क्षेत्र में कुशल पेशेवर नहीं मिल पा रहे हैं। बायोइन्फरमेटिक्स के क्षेत्र में बढ़ते अवसरों की संभावनाओं को देखते हुए पूरे देश में बायोइन्फरमेटिक्स के कोर्सों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। वर्तमान में ज्यादा से ज्यादा विश्वविद्यालय अपने पाठ्यक्रमों में बायोइन्फरमेटिक्स को सम्मिलित करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

जब बायोइन्फरमेटिक्स में कॅरियर बनाने की बात आती है तो इस क्षेत्र में प्रवेश पाने वालों को जीव विज्ञान का बुनियादी ज्ञान होने के साथ ही साथ कम्प्यूटर प्रणालियों तथा अवधारणाओं से पूर्णत: अवगत होना आवश्यक है। यह एक मल्टीडिसिप्लिनरी क्षेत्र है इसलिए इस क्षेत्र में सफल होने के लिए छात्र की अभिरुचियाँ बहुविषयक होनी नितांत आवश्यक है। बायोइन्फरमेटिक्स के कुछ क्षेत्रों में जीव विज्ञान के ज्ञान के बजाय न्यूमेरिकल, एल्गोरिदम तथा डाटा माइनिंग विकसित करने तथा लागू करने, कम्प्यूटर प्रोग्राम, रसायन शास्त्र तथा भौतिक शास्त्र का ज्ञान ज्यादा उपयोगी होता है। जीव विज्ञान रुचि रखने वाले सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र के युवाओं के लिए भी इस क्षेत्र में करियर की अनंत संभावनाएँ हैं।

विभिन्न संस्थानों में बायोइनफरमेटिँस के अध्ययन के लिए ग्रेजुएशन से लेकर पीएचडी तक के कोर्स उप्लब्ध् हैं। बायोइन्फरमेटिक्स के क्षेत्र में विभिन्न स्तरों पर बी.टेक, एम.टेक, मास्टर डिग्री तथा एडवांस डिप्लोमा कार्यक्रम उप्लब्ध् हैं। बायोइन्फरमेटिक्स में प्रवेश के लिए विज्ञान विषयों सहित १२वीं उत्तीर्ण होना आवश्यक है। मॉलिँयूलर बायोलॉजी, जेनेटिक्स , फार्मेसी, केमेस्ट्री, माइक्रो बायोलॉजी, फिसिक्स, मैथ्स के साथ-साथ इंजीनियरिंग,आईटी प्रोफेशनल्स भी बायोइन्फरमेटिक्स का एडवांस कोर्स कर सकते हैं।

एक नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार बायोइन्फरमेशन का वैश्विक टर्नओवर वर्ष २०१० तक बढ़कर १५० बिलियन डॉलर हो जाएगा। इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि इस क्षेत्र में रोजगार के कितने अवसर हैं। बायोइन्फरमेटिक्स के क्षेत्र में कोर्स करने वाले उम्मीदवारों को इस समय बायोइन्फरमेटिक्स सॉऍटवेयर तथा सॉल्युशन आधारित कंपनियों तथा ड्रग डिजाइनिंग इंडस्ट्री में रोजगार के बेहतर अवसर उप्लब्ध् हैं। अन्य नियोक्तओं में बायोटेक्नोलॉजी कंपनियाँ खासकर जो पर्सनल केयर उत्पाद से जुडी हैं, उनके अलावा इंडस्ट्रीयल ऑर्गेनिज्म एवं एग्रीकल्चर क्षेत्र की कढंंपनियाँ भी शामिल हैं। बॉयोटेक्नोलॉजी से जुडे विशेष क्षेत्रों जैसे फार्मेकोजिनामिँक्स, प्रोटियोमिँक्स, फंक्शननल जिनोमिँक्स, सिँवेंस, थेपिंग एंड एनालिसिस डाटा माइनिंग एंड मैनेजमेंट में रोजगार की अपार संभावनाएँ हैं। इसके साथ ही बायोटेक्नोलॉजी, बायोमेडिकल साइंसेज, अनुसंधान आदि में भी अच्छा करियर बनाया जा सकता है। थ्रीडी स्ट्रँचर माडलिंग, कम्प्यूटेशनल केमेस्ट्री, जिनोमिँक्स आदि नए उभरते क्षेत्रों में भी चुनौतिपूर्ण रोजगार के अवसर उप्लब्ध् हैं। कई शिक्षण संस्थानों व रिसर्च कंपनियों में शिक्षक व शोध प्रशिक्षक के तौर पर भी बायोइन्फरमेटिक्स के विशेषज्ञों की भारी माँग है। विज्ञान समूह वाले छात्रों हेतु बायोइन्फरमेटिशियन, जिनेटिसिस्ट, कम्प्यूटेशनल बायोलॉजिस्ट, बायोस्टेशियन के रूप में रोजगार के चमकीले अवसर हैं जबकि कम्प्यूटर साइंस एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विशिष्ट ता हासिल करने वाले छात्रों हेतु एप्लिकेशंस प्रोग्रामर, प्रोग्रामर एनालिस्ट, बायोइन्फरमेटिक्स प्रोग्रामर, ऑऒजेँट मॉड्यूलर, क्वालिटी एश्योरेस इंजीनियर, सॉऍटवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर, एनालिस्ट, डेवलपर आदि के रूप में उजले अवसर उप्लब्ध् हैं।

मदुरई कामराज विश्वविद्यालय, मदुरई देश का पहला विश्वविद्यालय है, जिसने पहली बार अपने स्कूल ऑफ बॉयोटेक्नोलॉजी में बायोइन्फरमेटिक्स में एडवांस डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारंभ किया। वर्तमान में पुणे विश्वविद्यालय, पुणे में बायोइन्फरमेटिक्स सेंटर पर बायोइन्फरमेटिक्स में एडवांस डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचलित किया जा रहा है। बायोइन्फरमेटिक्स इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा बायोइन्फरमेटिक्स, बायोमेडिकल इन्फरमेटिँस, क्लिनिकल ट्रायल एंड क्लिनिक रिसर्च, फार्मा रेगुलेटरी अफेयर्स, बायोटेक्नोलॉजी में इंडस्ट्रीयल प्रोग्राम आदि के एक वर्षीय पत्राचार पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। बीआईटी विभिन्न ऑनलाइन पाठ्यक्रम भी संचालित करता है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली के बायोइन्फरमेटिक्स सेंटर पर बायोइन्फरमेटिक्स में एडवांस ग्रेजुएट डिप्लोमा पाठ्यक्रम चलाया जा रहा है। बायोइन्फरमेटिक्स के क्षेत्र में कोर्स कराने वाले कुछ अन्य प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं-

  • आईआईटी, दिल्ली/खडग़पुर।
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजयूनोलॉजी, नई दिल्ली।
  • सेंटर ऑफ सेल्यूलर एंड मॉलिँयूलर बॉयोलॉजी, हैदराबाद।
  • गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, कश्मीरी गेट, दिल्ली।
  • इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडीज इन एजुकेशन यूनिवर्सिटी, राजस्थान।

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