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डेयरी टेक्नोलॉजी में कॅरियर के अवसर

भारत की कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था में डेयरी उद्योग गतिशील भूमिका निभाने वाले प्रमुख उद्योगों में से एक माना जाता है। मध्यप्रदेश जैसे कृषि प्रदेश में भी डेयरी उद्योग का विशेष महत्व है। डेयरी टेक्नोलॉजी के अंतर्गत दुग्ध उत्पादन, पशुओं की देखभाल, दुग्ध प्राप्ति और दुग्ध के विभिन्न डेयरी उत्पादों के रूप में परिवर्तन की प्रक्रिया शामिल है। उल्लेखनीय है कि करीब ५-६ सालों से दुग्ध उत्पादन में भारत का विश्व में पहला स्थान रहा है। २००८-०९ के आँकड़ों के अनुसार दूध उत्पादन का स्तर १०० मिलियन टन को पार कर गया है तथा दूध की प्रतिव्यक्ति दैनिक उप्लब्ध्ता २४५ ग्राम हो गई है। भारत वर्तमान में ७० लाख डॉलर मूल्य के दूध के बने पदार्थों का निर्यात कर रहा है। दूध की पौष्टिकता को ध्यान में रखकर इसके उत्पादन की गति को तेज करने, आधुनिक एवं परिमार्जित स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से भारत में श्वेत क्रांति एवं ऑपरेशन ऍलड कार्यक्रम चलाया गया। इससे न सिर्फ देश में दूध उत्पादन बढ़ा बल्कि किसानों को भी बहुत लाभ हुआ।

इतनी सारी उपलब्धियों के बावजूद डेयरी उद्योग के समक्ष कुछ चुनौतियाँ भी हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के उद्देश्यों से पारंपारिपक तरीको के स्थान पर अत्याधुनिक उपकरण एवं तकनीक अपनाई जा रही है ताकि दूध की उत्पादकता एवं गुणवत्ता में वृद्धि हो सके। इतना ही नहीं दूध की खरीद, उत्पादन, रख-रखाव, गुणवत्तानियंत्रण, शीतल भंडारण, पैकेजिंग, प्रसंस्करण, मार्केटिंग एवं प्रबंधन हेतु डेयरी टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञों की सेवाएँ ली जा रही है, जिसकी वजह से डेयरी टेक्नोलॉजी के डिग्रीधारको की माँग काफढी बढ़ गई है। डेयरी उद्योग जिसे वर्तमान समय मे भारत का स्पेशलाइज्ड क्षेत्र माना जाता है, के अंतर्गत डेयरी प्रोडँट, इनकी प्राप्ति, संचय, प्रसंस्करण और वितरण शामिल है। इसमें मुंय रोजगार उत्पादन और प्रसंस्करण के क्षेत्र में है । उत्पादन प्रक्रिया के अंतर्गत दुग्ध का संग्रह, दुग्ध उत्पादक पशुओं की देखरेख आदि माने जाते हैं। उत्पादन प्रक्रिया के सुचारू प्रबंधन के लिए डेयरी वैज्ञानिक को की सेवाएँ ली जाती हैं। ये वैज्ञानिक दुग्ध उत्पादन की मात्रा, गुणवत्ताएवं पोषक तत्वों का मूल्यांकन एवं विभिन्न प्रकार के चारे और पर्यावरण परिस्थितियों के इस पर पड़ने वाले प्रभाव का निर्धारण करते हैं। ये डेयरी उत्पादक पशुओं के प्रबंधन, प्रजनन आदि पर शोध करते हैं। प्रसंस्करण का क्षेत्र वितरण या डेयरी उत्पादों के रूपांतरण से जुडा है। दुग्ध के प्लांट तक पहुँचने के बाद प्रसंस्करण का कार्य प्रारंभ होता है। डेयरी तकनीक मुंयत: प्रसंस्करण के तकनीकी और क्वालिटी कंट्रोल पक्ष से संबंधित तकनीक उत्पाद संरक्षण तथा दुग्ध के उपयोग को विकसित करने की तकनीक से भी संबंधित मानी जाती है।

पारंपरिक तौर पर डेयरी टेक्नोलॉजी पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन के पाठ्यक्रम का हिस्सा था, लेकिन अब इसमें विविधता आ चुकी है और ऐसे कई संस्थान स्थापित हो चुके हैं जो डेयरी टेक्नोलॉजी के अंतर्गत डिप्लोमा, स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रम संचालित कर रहे हैं। कई कृषि विश्वविद्यालय बी.एससी. के स्तर पर डेयरी साइंस को एक वोकेशनल विषय के रूप में पढ़ाते हैं। डेयरी से संबंधित पाठ्यक्रमों के अंतर्गत डेयरी टेक्नोलॉजी, डेयरी इंजीनियरिंग, डेयरी केमेस्ट्री, डेयरी माइक्रोबायोलॉजी, डेयरी इकोनोमिक्स, स्टैटिस्टिक एंड मैनेजमेंट, डेयरी कैटल ब्रीडिंग एंड प्रोडँशन, डेयरी कैटल फिजियोलॉजी, डेयरी एँसटेंशन, डेयरी केटल न्यूटिशन आदि विषयों में शिक्षा एवं प्रशिक्षण दिया जाता है।

डेयरी टेक्नोलॉजी में मुंय रूप से बी.टेक., बी.एससी., एम.टेक., एम.एस.सी. स्तर के पाठ्यक्रम उप्लब्ध् हैं। जबकि कुछ संस्थानों में डिप्लोमा पाठ्यक्रम एवं पीएच.डी. करने की भी सुविधा उप्लब्ध् है। बी.टेक. (डेयरी टेक्नोलॉजी) पाठ्यक्रम की अवधि चार वर्ष निर्धारित है। एम.टेक., एम.एससी. एवं डिप्लोमा इन डेयरी इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम की अवधि दो निर्धारित वर्ष है ।

डिप्लोमा इन डेयरी इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु मैट्रिक परीक्षा गणित एवं विज्ञान विषयों सहित उत्तीर्ण होना आवश्यक है। बी.टेक. पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु १० + २ अथवा इंटरमीडिएट परीक्षा फिसिक्स, केमेस्ट्री तथा मैथ्स विषयों सहित उत्तीर्ण होना आवश्यक है, जबकि बी.एससी. हेतु १० + २ अथवा इंटरमीडिएट परीक्षा फिसिक्स, केमेस्ट्री तथा बायोलॉजी या एग्रीकल्चर समूह से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। एम.टेक. पाठ्यक्रम में बी.टेक. उत्तीर्ण छात्र प्रवेश ले सकते हैं। एम.एससी. पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु बी.एससी. (डेयरी टेक्नोलॉजी/ फूड़ टेक्नोलॉजी/ बायोटेक्नोलॉजी) उत्तीर्ण अभ्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। पीएचडी करने हेतु डेयरी टेक्नोलॉजी से संबंधित स्नातकोत्तर स्तर की डिग्री होना आवश्यक है।

इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु विभिन्न संस्थान एवं विश्वविद्यालय नियमानुसार प्रवेश परीक्षा आयोजित करते हैं, जबकि नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट की सभी सीटें एवं विभिन्न राज्यों के डेयरी टेक्नोलॉजी से संबंधित संस्थान में स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में १५ प्रतिशत सीटें और स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रमों में २५ प्रतिशत सीटें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित अखिल भारतीय संयुक्त प्रवेश परीक्षा के माध्यम से भरी जाती हैं। डेयरी टेक्नोलॉजी में कॅरियर बनाने के इच्छुक उम्मीदवारों के पास वैज्ञानिक मनोवृत्ति, कठिन परिश्रम, प्रतिबद्धता की प्रवृत्ति का होना आवश्यक है। पर्याप्त् सुविधाओं से दूर क्षेत्रों में भी रहने की उनकी मानसिकता होनी चाहिए। डेयरी टेक्नोलॉजी एक चुनौतीपूर्ण कॅरियर प्रदान करता है जो प्रशिक्षित प्रोफेशनल को भरपूर संभावनाएँ प्रदान करता है। वर्तमान में भारत में करीब ४०० से अधिक डेयरी प्लांट हैं और कई डेयरी उपकरण निर्माता कंपनियाँ हैं। डेयरी टेक्नोलॉजिस्ट के लिए निजी और सार्वजनिक दोनों ही क्षेत्रों में नौकरी के उजले अवसर विद्यमान हैं। डेयरी टेक्नोलॉजी का पाठ्यक्रम करने वालों को डेयरी फर्म, डेयरी को-ऑपरेटिव, दुग्ध उत्पादन प्रक्रिया आदि में रोजगार मिल जाता है। क्वालिटी कंट्रोल विभाग भी डेयरी टेँनोलॉजिस्ट की भर्ती करते हैं। कई डेयरी टेक्नोलॉजिस्ट अपने स्वतंत्र व्यवसाय जैसे लघु स्तरीय मिल्क प्लांट, क्रीम-आइसक्रीम प्लांट आदि को स्थापित कर सकते हैं और कई कंसल्टेंट के रूप में भी कार्य कर सकते हैं। इस क्षेत्र में शिक्षण, शोध और विकास की भी व्यापक संभावनाएँ हैं। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड, विभिन्न राज्यों के डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड, कृषि विश्वविद्यालयों के शिक्षण एवं अनुसंधान संगठन, फूड एवं कन्फेढँशनरी इंडस्ट्री, बैंक एवं बीमा कंपनियों, नाबार्ड के अलावा राज्यों के डेयरी सहकारी परिसंघों में नियोजित हुआ जा सकता है। चॉकलेट, आइसक्रीम आदि बनाने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ डेयरी टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञों को उच्च वेतनमान पर नियुक्ति करती हैं।

डेयरी टेक्नोलॉजी का पाठ्यक्रम संचालित करने वाले प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं-

  • मध्यप्रदेश के विभिन्न कृषि महाविद्यालयों में बी.एससी. पाठ्यक्रम के अंतर्गत एक विषय के रूप में डेयरी टेक्नोलॉजी के अध्ययन की सुविधा उप्लब्ध् है।
  • वेटेनरी कालेज, बेंगलूर, कर्नाटक।
  • गुजरात एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, बांसकाठा।
  • सेठ एमसी कालेज ऑफ डेयरी साइंस , आणंद, गुजरात-३८८११०१।
  • संजय गाँधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी, जगदेव पथ, बेली रोड, पटना, बिहार-८०००१४।
  • कालेज ऑफ फूड एंड डेयरी टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट, इलाहाबाद-२११००७१। ।
  • महाराणा प्रताप यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, उदयपुर, राजस्थान-३१३००१।
  • कालेज ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी, इंदिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय, कृषक नगर, रायपुर-४९२०१२।
  • नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट, करनाल, हरियाणा, १३२००१।

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