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डाइटीशियन के रूप में करियर के उजले अवसर

संतुलिन और उचित आहार हमारे शरीर के भीतर ऊर्जा का संचार करता है। हमें अपने शरीर के अनुपात के अनुसार कितने पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है और कौनसे खाद्य पदार्थ सेहत को नुकसान पहुँचा सकते हैं, अगर आपकी रुचि इन प्रश्नों का उत्तर जानने में है तो डायटीशियन के पेशे को अपनाकर आप अपना ही नहीं, दूसरों की सेहत का भी खयाल रख सकते हैं। हालांकि हमारे देश में अभी भी इस जरूरत के प्रति आम लोगों में बहुत ज्यादा जागरूकता नहीं है, फिर भी सेलेब्रिटी व युवा वर्ग का फी सचेत होता जा रहा है। वह डाइटीशियन के अनुसार बनाए गए डाइट प्लान के हिसाब से खाने-पीने में रुचि दिखा रहा है। यही का रण है कि आज इसे करियर के रूप में अपनाने के प्रति लोगों की रुचि जाग्रत हुई है।

गौरतलब है कि एक डाइटीशियन को संबंधित व्यक्ति की जीवन शैली, खाने की आदतों, सामाजिक स्तर, आयु और पाचन तंत्र की कार्यक्षमता के आधार पर आहार की सूची बनानी पड़ती है। एक डाइटीशियन के रूप में आप नवजात शिशु से लेकर वृद्ध, बीमार और खिलाडियों तक की डाइट का चार्ट बना सकते हैं। डाइटीशियन लोगों को सलाह देता है कि स्वस्थ रहने के लिए उसे किस तरह का भोजन करना चाहिए। डायटीशियन का का र्य जितना आसान दिखाई देता है वास्तव में वह उतना आसान नहीं है, क्योंकि रोगियों के लिए व्यक्तिगत आहार योजना बनाते हुए विभिन्न क्लिनिकल घटको को ध्यान में रखना होता है, साथ ही रोगियों की जीवनशैली, खान-पान की आदतों, सामाजिक संगठन, चयापचय आदि पर भी विचार करना होता है। डाइटीशियन का तीन वर्षीय एप्लाइड डिग्री पाठ्यक्रम करने हेतु जीव विज्ञान/गृह विज्ञान विषयों के साथ बारहवीं कक्षा उतीर्र्ण होना आवश्यक है। जबकि स्नानतको द्वारा पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए गृह विज्ञान, सूक्ष्म जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, डाइटेटिँस या औषधि विज्ञान में स्नातक होना आवश्यक है। गृह विज्ञान में बीए व सूक्ष्म जैविकी में बीएससी के पाठ्यक्रम में डाइटेटिँस को एक विषय के रूप में पढ़ाया जाता है, जबकि एमएससी में इसे विशेषज्ञता के रूप में पढ़ाया जाता है। कुछ संस्थानों में डाइटीशियन के डिप्लोमा एवं प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम भी उपलब्ध हैं ।

डाइटीशियन के स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रमों में भोजन, विज्ञान, जैव रसायन, शरीर विज्ञान, जैव सांंयिकी , शोध पद्धति और सूक्ष्म भोजन जैविकी आदि विषय शामिल होते हैं। पाठ्यक्रम पूरा होने के बाद अनुभव प्राप्त् करने के लिए आप किसी अस्पताल में इंटर्नशिप कर सकते हैं या किसी डाइटीशियन के अधीन भी काम कर सकते हैं। अगर आप स्वतंत्र रूप से प्रैँटिस करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको रजिस्टर्ड डाइटीशियन की परीक्षा उतीर्र्ण करनी होती है। शैक्षिक योग्यता के साथ-साथ इस पेशे में एक वैज्ञानिक नजरिए की भी बड़ी जरूरत होती है। स्वास्थ्य व पोषण संबंधी विषयों की जानकारी होने के साथ व्यवहार कुशलता भी अनिवार्य है।

वर्तमान में डाइटीशियन के पेशे में अपार संभावनाएँ हैं, क्योंकि लोग अपनी सेहत को लेकर बहुत सजग हो रहे हैं। युवतियों के लिए यह एक बेहतरीन करियर विकल्प है क्योंकि आय के साथ-साथ उन्हे अपने परिवार के साथ भी समय बिताने का मौका मिल जाता है। किसी समय में यह महिलाओं एवं युवतियों का ही कार्यक्षेत्र माना जाता था लेकिन अब पुरुष भी इस करियर में बहुत दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इस का म को लेकर संतुष्टि का स्तर भी काफी बढ़ गया है। इन दिनों फिटनेस सेंटर, हेल्थ क्लबों और स्पा के प्रति सभी वर्गों का रुझान बढ़ा है। इन सेंटरों पर डाइटीशियन व्यक्तिगत स्वास्थ्य का तथा फिटनेस स्तर को बनाए रखने के लिए डाइट अर्थात आहार संबंधी परामर्श देने के लिए नियुक्त किए जाते हैं। सितारा होटलों में भी डायटीशियनों की सेवाएँ ली जाती हैं। यहाँ ये शेफ की मदद से ग्राहको के लिए संतुलित आहार चार्ट तैयार करते हैं। वे यह सुनिश्चित करने में भी मदद करते हैं कि ग्राहको को परोसा जा रहा भोजन न केवल खाने लायक हो बल्कि पौष्टिक भी हो। वर्तमान समय में डिब्बाबंद और रेडी टू इट खाद्य पदार्थों का भी भारी चलन है। पिज्जा हट और जंक फूड के पार्लर सारे देश में छाए हुए हैं। यहाँ दाम की प्रतिस्पर्धा के साथ ही ग्राहको को अच्छी गुणवत्ता और उचित कैलोरी आहार देने के दावे किए जाते हैं। इन सभी क्षेत्रों में डाइटीशियनों के लिए बहुत अच्छी संभावनाएँ हैं। इसके अलावा सामान्य जन को संतुलित आहार लेने और कुपोषण से बचने की सलाह देने वाली सरकारी और गैर सरकारी एजेंसियों के दरवाजे भी डाइटीशियनों के लिए खुले हैं।

अस्पतालों और क्लिनिको के अलावा डाइटीशियन रक्षा प्रतिष्ठानों, शिक्षण संस्थानों, होस्टल और कंपनियों या फैक्टरीयों में चलने वाली बड़ी-बड़ी कैंटीनों में काम कर सकते हैं। वहाँ उन्हें दिए गए एक निश्चित बजट के भीतर स्वादिष्ट, पौष्टिक व संतुलित भोजन कैसे बन सकता है, इसकी जानकारी प्रदान करनी होती है। फिटनेस सेंटर जहाँ खिलाड़ी, मॉडल या फिट रहने के इच्छुक लोग जाते हैं, वहाँ भी डायटीशियनों की बहुत जरूरत होती है। इस पेशे से जु़डा एक अन्य विकल्प शोध करना भी है। संयुँत राष्ट्र, यूनिसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अलावा मानव संसाधन विका स मंत्रालय के अधीन आने वाले संगठन तथा राष्ट्रीय पोषण विज्ञान संस्थान भी इनकी सेवाएँ लेते हैं। बतौर शिक्षक भी कार्य किया जा सकता है। बड़े पैमाने पर डिब्बाबंद भोज्य पदार्थों का उत्पादन और प्रोसेसिंग करने वाले उद्योगों में भी डायटीशियन को रखा जाता है। एक फ्रीलांसर या लेखक के तौर पर भी रोजगार अर्जित किया जा सकता है। अगर आप में लिखने की प्रतिभा है तो आप इस विषय पर पुस्तकें लिख सकते हैं, किसी अखबार में कालम लिख सकते हैं या पौष्टिकता से भरपूर पकवानों के बारे में इलेँट्रॉनिक मीडिया पर जानका री दे सकते हैं।

वर्तमान समय में डाइटीशियनों को बहुत अच्छा वेतन मिल रहा है। किसी हैल्थँक्लब या स्पा सेंटर पर पार्ट टाइम काम कर प्रतिमाह १० से २५ हजार रुपए तक अर्जित किए जा सकते हैं। बड़े अस्पतालों तथा नर्सिंग होम में भी २५ हजार रुपए मासिक से शुरुआत होती है। यदि आप अपना स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ करते हैं तो मनचाहा पारिश्रमिक प्राप्त् किया जा सकता है। डाइटीशियन का कोर्स कराने वाले प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं-

  • इंस्टिट्यूट ऑफ केटरिंग टेक्नोलॉजी एंड एप्लाइड न्यूट्रीशियनिस्ट, शिवाजी पार्क दादर, मुंबई/नई दिल्ली/चेन्नई/कोलकाता।
  • भोज मुक्त विश्वविद्यालय, भोपाल (सर्टिफिकेट कोर्स)।
  • इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय, नई दिल्ली।
  • महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, अजमेर।
  • डॉ. बी. आर. अऔबेडकर, विश्वविद्यालय, आगरा।

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