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आर्किटेक्चर के क्षेत्र में करियर के उजले अवसर

ऊँची-ऊँची गगनचुंबी इमारतों, कलात्मक एवं भव्य मंदिरों, मल्टीप्लेक्सो, मालों आदि को देखकर सचमुच आश्चर्य होता है कि आखिर इस निर्माण कार्य को किस तरह से अंजाम दिया गया होगा। दरअसल यह कमाल है एक आर्किटेक्ट का , जिसकी योजनाओं और रणनीति पर अमल कर इस तरह के निर्माण का र्य संपन्न होते हैं। इस हुनर को आर्किटेक्टर के नाम से जाना जाता है या यूँ कहें कि आर्किटेक्टर रचनात्मक कौशल का प्रयोग कर डिजाइनिंग तथा भवन निर्माण की कला का नाम है। सामाजिक, तकनीकी और पर्यावरणीय स्थितियों को ध्यान में रखते हुए इमारतों के निर्माण तथा कला एवं विज्ञान का मिला-जुला रूप ही आर्किटेक्टर कहलाता है।

गौरतलब है कि भवन निर्माण के संबंध में लोगों की व्यावहारिक तथा अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आर्किटेक्ट की सेवाएँ लेने का चलन आज का नहीं अपितु सदियों पुराना है। एक आर्किटेक्टर केवल भवनों का खाका ही तैयार नहीं करता है, बल्कि कीमत का निर्धारण कर भवन निर्माण में अपने उम्दा कौशल का प्रदर्शन भी करता है। यह वास्तु व शिल्प का मिला-जुला रूप होता है। मूल अर्थों में आर्किटेक्ट का काम किसी आइडिया को मूर्त रूप देना और कंक्रट के रूप में जमीन पर उतारना है।

किसी आर्किटेक्ट की काबिलियत इस बात पर निर्भर करती है कि वह जगह और साधनों के बेहतर इस्तेमाल में कितना कुशल है। अगर आप किसी संरचना में स्तंभों को पूर्णता प्रदान कर सकने में सक्षम हैं, अगर संरचना को जीवंत बनाने में आपको महारत हासिल है और अगर आप संरचना की खिड़कियों और दरवाजों के माध्यम से अपनी कहानी बयाँ कर सकते हैं तो आर्किटेक्ट के रूप में करियर की असीम ऊँचाइयाँ हाथ फैलाए आपका इंतजार कर रही हैं।

एक आर्किटेक्टर को विविध कार्य करने पड़ते हैं। उसे निर्माण स्थल का विस्तृत खाका तैयार करना होता है। वास्तविक जीवंत तस्वीर बनाने के लिए अधिक जटिल परियोजनाओं के रेखांकन और थ्री-डी मॉडल भी तैयार करने पड़ते हैं। लाइट फिटिंग, वेन्टीलेशन की व्यवस्था और कभी-कभी भूतल निर्माण, चयनित निर्माण सामग्री, साज-सामान तथा आंतरिक सजावट की योजना के चित्र अलग से तैयार करने पड़ते हैं। आर्किटेक्ट को यह भी खास ध्यान रखना पड़ता है कि उसकी योजना में अग्निशमन नियमों, भवन निर्माण संबंधी का नूनों और अन्य आवश्यक बातों का उल्लंघन न हो। इसके बाद आर्किटेक्ट को विशेषताओं, ऍलोरिंग, फिनिशिंग और निर्माण सामग्री की अनुमानित मात्रा तथा परियोजना की अनुमानित लागत का विवरण तैयार करना पड़ता है। इसके लिए अभियांत्रिकी य सिद्धांतों की समझ, निर्माण विधियों, सामग्री तथा पर्यावरण की तकनीको के नवीनतम विका स संबंधी नियमों की जानकारी का होना भी नितांत आवश्यक है। हालाँकि अत्याधुनिक कम्प्यूटर एडिट सीएडी सॉफ्टवेयर के आ जाने से यह काम अब काफी हद तक आसान हो गया है।

निर्माण उद्योग में उछाल आने वाले दशको तक बरकरार रहने की संभावनाओं के मद्देनजर करियर का यह क्षेत्र का फी दिलचस्प भी है। बारहवीं में गणित, भौतिकी और रसायन विषयों की पढ़ाई के बाद आप आर्किटेक्टर में स्नातक की पढ़ाई कर सकते हैं। अगर स्कूल स्तर पर आपने इंजीनियरिंग ड्राइंग की पढ़ाई की हो तो आगे यह कोर्स का फी आसान हो जाता है। बी. आर्क कोर्स में प्रवेश हेतु प्रवेश परीक्षा उतीर्र्ण करनी होती है । पाँच वर्षीय स्नातक कोर्स बी.आर्क में आर्किटेक्टरल डिजाइन, प्लानिंग, आर्ट एप्रीसिएशन, बिल्डिंग मैनेजमेंट, नेचर एंड एनवॉयरमेंट, मेथड ऑफ कंस्ट्रँशन और हिस्ट्री ऑफ आर्ट एंड आर्किटेक्टर विषय पढ़ाए जाते हैं। आर्किटेक्टर में परा स्नातक कोर्स हेतु बी.आर्क डिग्री आवश्यक है। बी. आर्क के अलावा विभिन्न पोलिटेँनिको में तीन वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। आर्किटेक्टर के डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु गणित विषय के साथ दसवीं कक्षा उतीर्र्ण होना आवश्यक है।

आर्किटेँचर में डिग्री लेने के बाद किसी स्थापित संस्था में इंटर्नशिप की जाती है, ताकि प़ढ़े गए विषय पर कार्य करने का अनुभव प्राप्त् किया जा सके। अगर आर्किटेक्ट चाहें तो अपनी फर्म बनाकर फ्रलांस की तरह काम कर सकते हैं, जिसमें उन्हें प्रति डिजाइन के हिसाब से भुगतान किया जाता है। रचनात्मकता इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए महत्वपूर्ण योग्यता है, जिसके आधार पर आप तरँकी की सीढ़ियाँ तेजी से चढ़ सकते हैं। रोजगार के लिहाज से देखा जाए तो इस क्षेत्र में भविष्य बहुत उज्ज्वल है। वर्तमान समय में आवास ऋण प्रक्रिया के सहज हो जाने के का रण भवन निर्माण प्रक्रिया में बहुत तेजी आई है। जिसके चलते वास्तुकार व आर्किटेँटों की माँग में भी काफी इजाफा हुआ है।

आर्किटेक्ट का कार्यक्षेत्र बहुत व्यापक है। आर्किटेक्टरल फर्म, कंस्ट्रँशन कंपनी, सरकारी विभागों और पुल निर्माण व रखरखाव, विभाग, शहरी व ग्रामीण विकास विभाग और नगर पालिका ओं एवं नगर निगमों में आर्किटेक्ट बहुत ही आकर्षक वेतन व सुविधाओं पर रखे जाते हैं। इसके अलावा आज देश में तीन सौ से ज्यादा इंफ्रास्ट्रँशन डेवलपमेंट कंपनियाँ हैं, जो कई सारे प्रोजेँट पर एक साथ का म करती हैं और जिनके यहाँ हजारों आर्किटेक्ट का म करते हैं। महानगरों में बन रहे ऍलाईओवर, आधुनिक यातायात व्यवस्था मेट्रो, नदी पर बनने वाले पुल और सब-वे के बढ़ते चलन ने आर्किटेक्ट के काम को नया विस्तार दिया है। इसके अलावा भवनों के रखरखाव और सरकारी गृह निर्माण योजनाओं में आर्किटेँट की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है, ताकि जगह के सदुपयोग के साथ आम जनता को उनके पैसे की पूरी कीमत भी मिल सके। इस तरह एक आर्किटेक्ट अपने पेशे के साथ-साथ सच्चे अर्थों में जनता की सेवा भी करता है। इसके अलावा रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट में आर्किटेक्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, ताकि यातायात को सही दिशा देने में मदद मिल सके। आर्किटेँट के साथ मिलकर रिसर्चर नए उपकरणों की खोज करते हैं, ताकि का म करने वाले कम परिश्रम में बेहतर का र्य कर सकें।

इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र के माहिरों की केंद्र व राज्य सरकार के विभागों में भी हमेशा माँग बनी रहती है। आप चाहें तो विभिन्न निर्माण का र्यों से जुडी संस्थाओं और प्राधिकरणों से जुडकर विशेषज्ञ आर्किटेक्ट का काम भी संभाल सकते हैं। काउसिंल ऑफ आर्किटेक्टर इंडिया ने इस क्षेत्र से संबंधित विभिन्न सेवाओं के लिए वेतन और पारिश्रमिक का एक मानक निर्धारत कर रखा है। यह पारिश्रमिक अमूमन परियोजना पर आने वाले खर्च का एक निर्धारित प्रतिशत होता है। सीधे शब्दों में कहें तो इस क्षेत्र में आप प्रारंभिक दौर में भी १५ से २० हजार रुपए मासिक कमा सकते हैं जो प्रसिद्धि मिलने के बाद बढ़ता चला जाता है।

आर्किटेँचर का कोर्स कराने वाले प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं-

  • देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर।
  • बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा, रांची।
  • रूड़की इंजीनियरिंग कॉलेज, रूड़की ।
  • गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्किटेक्टर, लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ।
  • दयानंद सागर कॉलेज, ऑफ इंजीनियरिंग, बंगलुरू।
  • कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, केरल विश्वविद्यालय, तिरुवनंतपुरम।
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेँनोलॉजी, खड़गपुर।
  • स्कूल ऑफ आर्किटेक्टर एंड प्लानिंग, चेन्नई।
  • सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ इमेजिंग टेक्नोलॉजी, चित्रांजलि हिल्स, थिरूवल्लम, तिरुवनंतपुरम-२७।
  • जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, जामिया नगर, दिल्ली।
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