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प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कॅरियर के उजले अवसर

वर्तमान में इंटरनेट का इस्तेमाल चाहे कितना ही क्यों न ब़ढ़ जाए मगर किताबों और प्रिंटिंग तकनीक का महत्व कहीं कम होता नजर नहीं आ रहा है। शिक्षा के वैश्वीकरण से अब पूरी दुनिया सिमटकर छोटी होती जा रही है और इस परिवर्तन में प्रकाशन एवं प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी (मुद्रण तकनीक) की सराहनीय भूमिका रही है। यही कारण है कि विगत कुछ वर्षों में प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी का बहुत तीव्र गति से विकास हुआ है।

भारत की बात करें तो आज हर क्षेत्र में प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल जोरों पर जारी है। तेजी से फल-फूल रहे प्रिंटिंग उद्योग के मौजूदा हालातों पर नजर दौड़ाएँ तो आज भारत में विदेशी काम की भरमार है। इसका एक अहम कारण यहाँ प्रिंटिंग का सस्ता होना है। ऐसे में जब तकनीकी क्षेत्र में लगातार विस्तार हो रहा है और छापेखाने से हुई प्रिंटिंग शुरुआत ऑफसेट प्रिंटिंग तक पहुँच गई है तो इस क्षेत्र में कॅरियर की भी अनंत संभावनाएँ हैं।

एक आकलन के मुताबिक आज हमारे देश मे छोटे-बड़े, नए-पुराने कुल मिलाकर लगभग 50 हजार से अधिक प्रिंटिंग प्रेस कार्यरत हैं। जिनमें करीब 10 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। इन प्रिंटिंग प्रेसों से विभिन्न भाषाओं की लाखों पत्र-पत्रिकाएँ मुद्रित होती हैं। परंतु हिन्दी भाषा में मुद्रित पत्र-पत्रिकाओं की संख्या सबसे अधिक है। इस प्रकार प्रकाशन एवं प्रिंटिंग व्यवसाय के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी की शिक्षा हासिल करने वाले युवाओं के लिए रोजगार की उजली संभावनाएँ हैं।

जब हम सोचते हैं कि कैसे पत्र-पत्रिकाएँ, करेंसी नोट, स्टाम्प, बैनर आदि कई खूबसूरत एवं आकर्षक रंगों में प्रिंट कर दिए जाते हैं तो यह सब कुछ असंभव सा जान पड़ता है। यह सब प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी के कारण ही संभव हुआ है। सूचना प्रौद्योगिकी, माइक्रोप्रोसेसर युक्त कम्प्यूटर तथा लेसर जैसी उच्च तकनीक के आने के बाद से प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी पूरी तरह हाईटैक हो गई है। अब प्रिंटिंग का व्यवसाय केवल कागज की सादी छपाई तक ही सीमित नहीं रह गया है अपितु बहुविषयी उद्योग का भी रूप लेता जा रहा है। जिसकी मुख्य वजह प्रिटिंग टेक्नोलॉजी में आए व्यापक और विविध परिवर्तन हैं। आज प्रिंटिंग क्षेत्र को एक क्रांति के रूप में देखा जा रहा है। अगर हम साधारण भाषा में प्रिंटिंग की परिभाषा को समझें तो प्रिटिंग में शब्दों व ग्राफिक्स का समन्वय करके कागज, बोर्ड या धातु पर स्याही द्वारा उसे अंतिम रूप दिया जाता है। प्रिंटिंग की तकनीक की बात की जाए तो प्रारंभिक रूप से फिल्म मेकिंग, प्लेट मेकिंग, मशीन प्रिंटिंग आदि आते हैं। उसके बाद फिल्म से प्लेट बनाकर प्रेस में प्रिंटिंग के लिए भेजी जाती है। आधुनिक तकनीक के आ जाने के कारण अब सीधे कम्प्यूटर से प्लेट बन जाती है। कम्प्यूटर से सीधे प्लेट बनने की प्रिंटिंग तकनीक सीटीपी के नाम से जानी जाती है। प्रिंटिंग की तकनीक सीखने हेतु इससे संबंधित पाठ्यक्रम करना आवश्यक है। प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी के पाठ्यक्रमों में प्रिंटिंग प्रोसेस, टाइपोग्राफिक डिजाइन, ग्राफिक रिप्रोडक्शन, लैटर प्रेस, लिथोग्राफी, लैटर असेंबली, बुक बाइंडिग, प्रोसेसिंग, कैमरा ऑपरेशन, फोटो इंग्रेविंग, प्रिंटर्स मशीनरी मेकेनिज्म एंड मेंटेनेंस, लियो ऑफसेट प्रिंटिंग तकनीक की विस्तार से जानकारी दी जाती है।

प्रिंट मीडिया में नई और बेहतर तकनीक के प्रयोग में आने से पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में कॅरियर की अपार संभावनाओं ने जन्म लिया है। बाजार में प्रिंटिंग की कई प्रकार की नई शैलियाँ विकसित हुई हैं यदि आप इनमें से किसी एक में भी पारंगत हो जाते हैं तो आपको बेहतर कॅरियर के अवसर मिलने की संभावना रहती है। प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी के स्नातक कोर्स (बीई इन प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी) में प्रवेश हेतु शैक्षणिक योग्यता गणित विषय समूह के साथ बारहवीं उत्तीर्ण होना है। कई विश्वविद्यालय और संस्थान ऐसे हैं जहाँ लघु अवधि के प्रिंटिंग तकनीक सिखाने के सर्टिफिकेट कोर्स भी कराए जाते हैं। सर्टिफिकेट कोर्सों में प्लेट तैयार करना, ऑफसेट मशीन प्रिंटिंग, मिनी ऑफसेट प्रिंटिंग, स्क्रीन प्रिंटिंग और डेस्क टॉप प्रकाशन की जानकारी दी जाती है।

गौतलब है कि गवर्नमेंट पॉलिटेँनिक कॉलेज, जबलपुर में डिप्लोमा इन प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम उपलब्ध है। इस पाठ्यक्रम हेतु 30 सीटें निर्धारित हैं। इस पाठ्यक्रम में पीपीटी परीक्षा के माध्यम से प्रवेश दिया जाता है। कुछ बड़े प्रिंटिंग प्रेस अपने यहाँ प्रशिक्षणार्थियों की नियुक्ति करके प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी देते हैं। कहीं-कहीं औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में भी प्रिंटिंग से संबंधित कुछ विषयों का प्रशिक्षण दिया जाता है।

प्रिंटिंग का मक्का कहे जाने वाले जर्मनी के हीडलबर्ग प्रिंट मीडिया एकेडमी द्वारा 10 प्रतिभाशाली भारतीय छात्रों के लिए प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी का स्पान्सर प्रोग्राम भी चलाया जाता है। जिसके अंतर्गत हर साल भारत में प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी का कोर्स चला रहे चुनिंदा विश्वविद्यालयों व शिक्षण संस्थानों से 10 युवाओं का चयन इस एकेडमी के लिए किया जाता है। इन चुने गए छात्रों को इस एकेडमी में प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी से जु़डी अहम जानकारियों से अवगत कराया जाता है। इस स्पान्सरशिप प्रोग्राम की विस्तृत जानकारी हीडलबर्ग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, प्रिंट मीडिया एकेडमी, 333, जीएसटी रोड, जामीन पलावरम, चेन्नई से प्राप्त की जा सकती है। प्रिटिंग टेक्नोलॉजी में कोर्स करने के बाद अखबारों, पत्रिकाओं, व्यावसायिक प्रिंटर्स, प्रकाशन कंपनियों, विज्ञापन एजेंसियों, पैकिंग प्रिंटिंग यूनिट, प्रिंटिंग मशीन मैन्युफैक्चरिंग, ई-पब्लिशिंग कंपनियों, सरकारी प्रेस, सिक्युरिटी प्रिंटर्स आदि में रोजगार की उजली संभावनाएँ हैं। आप प्रिटिंग के क्षेत्र में कुछ वर्षों का अनुभव प्राप्त कर अपना स्वयं का व्यवसाय भी शुरू कर सकते हैं तथा असीमित आय प्राप्त् कर सकते हैं। प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी का कोर्स कराने वाले प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं-

  • अविनाशलिंगम डीम्ड यूनिवर्सिटी, कोयम्बटूर।
  • अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई
  • जादवपुर यूनिवर्सिटी, कोलकाता।
  • गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज, जबलपुर।
  • पूसा पॉलिटेक्निक कॉलेज, पूसा, नई दिल्ली।
  • गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी, मुंबई।
  • गुरु जम्बेश्वर यूनिवर्सिटी, हरियाणा।
  • स्कूल ऑफ प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी, बंगलुरु।

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