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मैं ग्राफिक डिजाइनिंग के क्षेत्र में कॅरियर बनाना चाहता हूँ/चाहती हूँ । कृपया मार्गदर्शन प्रदान करें ?
मीडिया जैसे क्षेत्र में ग्रफिक्स का अपना एक खास महत्व है। इसके माध्यम से किसी भी सूचना को अधिक आकर्षक और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया जाता है। प्रतियोगिता के इस युग में विभिन्न क्षेत्रों में ग्राफिक का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जा रहा है और इसी कारण ग्राफिक डिजाइनरों की माँग भी बढ़ रही है। अगर आपमें सृजनात्मक क्षमता है तो ग्राफिक डिजाइनर के रूप में प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में भी कॅरियर संवारा जा सकता है। ग्रफिक्स के पाठ्यक्रम में दाखिला पाने के लिए कम से कम इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्णहोना आवश्यक है। देशभर के अनेक कालेजों में कंपप्यूटर कोर्स के अंतर्गत ग्रफिक्स डिजाइन का पाठ्यक्रम चलाया जाता है। इसके अलावा कई पॉलिटेँनिक कालेजों में भी शॉर्ट टर्म ग्रफिक्स डिजाइनिंग का कोर्स कराया जाता है।

ग्राफिक डिजाइनिंग का कोर्स इन संस्थानों में उप्लब्ध है-
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद।
  • इंडस्ट्रियल डिजाइन सेंटर, आईआईटी, पवई, मुंबई।
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कानपुर।
  • एपीजे इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, नई दिल्ली।
  • किएटिव आई कालेज ऑफ क्रिएटिव आर्ट, पुणे।
कम्प्यूटर गेमिंग के क्षेत्र में कॅरियर बनाना चाहता हूँ। कृपया मार्गदर्शन दें ?

वर्तमान समय में कम्प्यूटर से मनोरंजन और खेल भी अछूते नहीं रहे हैं। कम्प्यूटर प्रोफेशनल्स और छात्रों को छोड़ दिया जाए तो कम्प्यूटर का सबसे अधिक प्रयोग गेम खेलने में ही होता है। जिस प्रकार कम्प्यूटर गेऔस की लोकप्रियता बढ़ रही है, उसी रऍतार से यह उद्योग भी फल-फूल रहा है और तरह-तरह के कम्प्यूटर गेम विकसित हो रहे हैं। यही वजह है कि इस क्षेत्र में प्रोफेशनल्स की माँग बढ़ रही है। गेमिंग कम्प्यूटर एनीमेशन क्षेत्र की नवीनतम शाखा है। इस क्षेत्र में कदम रखने से पहले गेमिंग के बारे मंे जानकारी लेना अत्यंत आवश्यक है। रचनात्मक अभिरुचि के अलावा कम्प्यूटर गेम खेलने का शौक भी होना चाहिए। इससे संबंधित सभी संस्थानों में प्रवेश लेने के लिए स्नातक होना जरूरी है। इसके लिए अधिकढांश संस्थानों में एक वर्षीय कोर्स उपलब्ध है। वर्तमान में भारतीय गेमिंग उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार विभिन्न कंपनियों को लगभग बीस हजार गेमिंग प्रोफेशनल्स की जरूरत है। इस क्षेत्र में लगभग २५ से ५० हजार रुपए की प्रतिमाह कमाई आसानी से हो सकती है। इसके अतिरिक्त स्वयं ही गेम बनाकर भी अपनी मार्केट वैल्यू बढ़ाई जा सकती है। आप इंडस्ट्री में गेम ऑनर, गेम प्रोग्रामर, गेम डेवलपर आदि के रूप में काम कर सकते हैं।

कम्प्यूटर गेमिंग का कोर्स कराने वाले प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं-
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, पाल्दी, अहमदाबाद।
  • माया एकेडमी ऑफ एडवांस सिनेमेटिँस, ई-१९, साउथ एँसटेंशन-१, नई दिल्ली।
  • सेंटर फार इलेँट्रॉनिँस डिजाइन एंड टेँनोलॉजी ऑफ इंडिया, मोहाली, चंडीगढ़।
  • फारच्यून इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशंस, जी-१७, डी साउथ एँसटेंशन, पार्ट-१, नई

एनिमेशन कार्टूनिंग का कोर्स कराने वाले देश के प्रतिष्ठि त संस्थानों की जानकारी प्रदान करें?
एनिमेशन कार्टूनिंग का कोर्स कराने वाली प्रमुख संस्थाएँ हैं- दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट, तिलक मार्ग, नई दिल्ली, सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट, मुम्बई, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, पाल्दी, अहमदाबाद।

मैं लेदर टेक्नोलॉजी में कॅरियर बनाना चाहता हूँ। कृपया मार्गदर्शन दें ?

भारतीय लेदर इंडस्ट्री का वार्षिक टर्न ओवर १०० अरब रुपए से अधिक का है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस क्षेत्र में युवाओं के लिए कितनी संभावनाएँ हैं। इस क्षेत्र के दो कार्य होते हैं- १. कच्चे चमड़े को परिसज्जित कर फिनिश्ड लेदर का निर्माण तथा २. लेदर गुड्स की डिजाइनिंग, निर्माण तथा मार्केटिंग। फुटवेयर, गारमेंट्स और लेदर गुड्स से संबंधित क्षेत्र में जहाँ लेदर टेक्नोलॉजी में दक्ष व्यक्तियों को रोजगार की प्रचुर संभावनाएँ हैं, वहीं इसे सीखकर स्वरोजगार भी स्थापित किया जा सकता है। लेदर टेक्नोलॉजी में जिन गिनी-चुनी संस्थाओं द्वारा बीएससी, बीटेक और एमटेक पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं, वे हैं- यूनिवर्सिटी कालेज ऑफ टेक्नोलॉजी, हैदराबाद, कालेज ऑफ लेदर टेक्नोलॉजी, कोलकाता, बीआर आऔबेडकर आरईसी, जालंधर।

मैं रंग-बिरंगी मोमबत्तियाँ बनाने का लघु उद्योग खोलना चाहता/चाहती हूँ । कृपया मार्गदर्शन प्रदान करें।
रंग-बिरंगी खूबसूरत मोमबत्तियाँ अपनी सुंदरता के साथ, अपनी झिलमिलाती रोशनी से हर किसी का दिल जीत लेती हैं। एक जमाना था, जब मोमबत्तियाँ केवल सफेद, लाल, हरे या पीले रंगों में ही आती थीं और इनका उपयोग क्रिसमस, जन्मदिन, घर में या चर्च में जलाने के लिए होता था, लेकिन अब इसका स्वरूप बदल गया है। वर्तमान में पाँच सितारा होटलों से लेकर घरों के ड्राइंग रूम, लिविंग रूम, डाइनिंग डेबल आदि में भी सजावट के लिए डिजायनर रंग-बिरंगी मोमबत्तियों का उपयोग होने लगा है। इनकी बढ़ती माँग को देखते हुए अब मोमबत्तियाँ के एक्सक्लूसिव स्टोर भी खुल रहे हैं। आजकल मार्केट में कई तरह की मोमबत्तियाँ मौजूद हैं, जैसे अरोमा मोमबत्ति, ऍलोटिंग मोमबत्तियाँ (पानी में तैरने वाली), मेडिकेटेड मोमबत्ति, रोमांस इनहांसिंग मोमबत्ति आदि। मोमबत्ति का लघु उद्योग खोलने के लिए ज्यादा पूँजी की जरूरत नहीं होती है। इसमें कच्चे माल के रूप में मोम (वैँस), जैल, सेंट, रंग तथा इन्हें संवारने के लिए पत्थर, मोती, सितारे और अन्य सजावटी सामान, धागे आदि की जरूरत पड़ती है। मोम पिघलाने के लिए बड़े बर्तन और चूल्हा तथा मोमबत्तियों को अलग-अलग आकार देने के लिए विभिन्न आकृति के सांचों की जरूरत होती है। चूँकि मोमबत्ति उद्योग लघु उद्योग की श्रेणी में आता है इसलिए सरकार इसे बढ़ावा देने के लिए नए उद्यमियों को प्रोत्साहित भी कर रही है। मोमबत्ति उद्योग हेतु ऋण सुविधा भी उपलब्ध है। रंग-बिरंगी मोमबत्तियों का निर्माण वैसे तो रचनात्मक काम है। इसमें डिजाइन के साथ कलर कॉम्बिनेशन और मार्केट डिमांट को समझने की जरूरत होती है। इसकी निर्माण प्रक्रिया को समझने हेतु इस क्षेत्र में प्रशिक्षण की जरूरत होती है। प्रशिक्षण मे इसके उत्पादन की बारीकियाँ सीखने को मिलती हैं जो एक सफल उद्यमी बनने की पहली सीढ़ी है। मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में स्थित जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र से प्रशिक्षण हेतु संपर्क किया जा सकता है। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग द्वारा भी प्रशिक्षण एवं ऋण की सुविधा उपलब्ध है।

मैंने फाइन आर्ट में बीए किया है। मैं कार्टूनिस्ट के रूप में कार्य करना चाहता हूँ। कृपया मार्गदर्शन दें।
कार्टून कला के लिए अभी तक सरकारी क्षेत्र में किसी औपचारिक पाठ्यक्रम की शुरुआत नहीं हुई है। अत: आप स्वयं घर पर ख्याति प्राप्त् कार्टूनिस्टों की कृतियों का अवलोकन करें। चाहें तो किसी ख्याति प्राप्त् कार्टूनिस्ट के साथ कार्टून कला की बारीकियों एवं तकनीको को सीख सकते हैं। आपके स्वयं के द्वारा तैयार राजनीतिक, सामाजिक, पर्यावरण, अपराध एवं अन्य विविध विषयों से संबंधित कार्टून आदि लेकर अखबार समूहों व टीवी चैनल्स के दफ्तरों में नौकरी के लिए संपर्क कर सकते हैं।
चिप डिजाइनिंग के क्षेत्र में रोजगार के क्या अवसर हैं तथा यह पाठ्यक्रम कहाँ से किया जा सकता है ?

कुछ समय पहले तक मशीनें जहाँ बड़ी-बड़ी प्लेट्स, सेमी कंडक्टर और ट्यूब द्वारा काम करती थीं आज वही काम एक छोटी-सी चिप करने लगी है। सूचना प्रौद्योगिकी के विकास के चलते चिप का अविष्कढार हुआ जिसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यंत्र हल्के हो गए और उनकी कार्य करने की क्षमता पहले से कई गुना बढ़ गई । चिप डिजाइनिंग का क्षेत्र रोजगार की दृष्टि से व्यापक हो चुका है। सभी कंप्यूटर हार्डवेयर कंपनियों को चिप डिजायनरों की जरूरत होती है। बैचलर ऑफ इलेँट्रॉनिँस इंजीनियरिंग या फिजिँस में मास्टर डिग्री करने के बाद चिप डिजाइनिंग के एडवांस कोर्स में दाखिला लिया जा सकता है। चिप लेवल डिजाइनिंग के लिए १२वीं कक्षा कंप्यूटर विषय के साथ ५० प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्णहोना आवश्यक है। यह कोर्स एक से ड़े वर्ष का होता है। योग्यता और अनुभव के आधार पर एक चिप लेवल इंजीनियर की आय ३५ हजार से एक लाख रुपए मासिक तक हो सकती है। आइबीएम, इनफोसिस, सत्यम, एचसीएल जैसी बड़ी कंपनियों में चिप लेवल इंजीनियरों की भारी माँग है।

चिप डिजाइनिंग का पाठ्यक्रम कराने वाले देश के प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं-

  • सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कम्प्यूटिंग (सी-डेक), नई दिल्ली, नोएडा, पुणे, बंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, तिरुवनंतपुरम और कोलकाता।
  • जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली।
  • सीएडीटीआई, निट कैंपस, कलीकट, केरला।
  • बिटमैपर इंटीग्रेशन टेँनोलॉजी प्रायवेट लिमिटेड, पुणे, महाराष्ट्र।

फाइन आर्ट का कोर्स कौन कर सकता है । यह पाठ्यक्रम कहाँ उपलब्ध है ?

सूचना क्रांति के वर्तमान युग में कंप्यूटर की अनिवार्यता के बावजूद कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जो अपनी परऔपरा एवं पहचान लगातार बनाए हुए हैं। इन्हीं में से एक प्रमुख क्षेत्र है फाइन आर्ट का, जिसे ललित कला भी कहा जाता है। फाइन आर्ट एक विजुअल कम्युनिकेशन है, जिसके अंतर्गत पेंटिंग, मूर्तिकला एवं कमर्शियल ऑर्ट शामिल है। आज देश में फाइन आर्ट से संबंधित कई पाठ्यक्रम मौजूद हैं। इसके लिए न्यूनतम योग्यता १२वीं कक्षा उत्तीर्णहोना है। अनेक संस्थान १०वीं के बाद भी कई तरह के डिप्लोमा व सर्टिफेकेट कोर्स करवाते हैं परंतु वे अधिक कारगर नहीं होते। बारहवीं के पश्चात जब छात्र के अंदर बैटर सेंस विकसित हो जाए तभी उसे इस क्षेत्र में कदम रखना चाहिए। बैचलर ऑफ फाइन आर्ट (बीएफए) १२वीं के पश्चात का चार वर्षीय पाठ्यक्रम है। इसके बाद मास्टर डिग्री के रूप में दो वर्षीय मास्टर ऑफ फाइन आर्ट (एमएफए) किया जा सकता है। बीएफए के अंतर्गत तीन साल स्पेशलाइजेशन एवं एक साल फाउंडेशन कराया जाता है, जबकि एमएफए में दोनों साल का स्पेशलाइजेशन होता है। यह क्षेत्र ऐसा है जो छात्रों से परिश्रम और समय माँगता है। इसमें यही देखा जाता है कि छात्र अपनी भावनाओं एवं कल्पनाओं को किस हद तक कैनवास या कागज पर उकेर पा रहा है। यानी उसके अंदर कल्पनाशीलता के साथ कुछ नया गढ़ने का गुण होना आवश्यक है ताकि कला को जीवंतता प्रदान की जा सके। क्रिएटिविटी और कुछ अलग करने का जज्बा इस फील्ड में मनचाही सफलता दिला सकता है।

फाइन आर्ट का कोर्स कराने वाले प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं-

  • सर जे.जे. इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड आर्ट्स, डीएन रोड, मुंबई।
  • डिपार्टमेंट ऑफ फाइन आर्ट, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, जामिया नगर, नई दिल्ली।
  • बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी।
  • डिपार्टमेंट ऑफ फाइन आर्ट, गाँधी नगर, जयपुर, राजस्थान।
  • कॉलेज ऑफ आर्ट्स, २०-२२, तिलक मार्ग, नई दिल्ली।
  • फाइन आर्ट्स कॉलेज, एम.जी. रोड, इंदौर, मध्यप्रदेश।

आभूषण डिजाइनिंग का कोर्स कराने वाले देश के प्रमुख संस्थानों की जानकारी दें ?
आभूषण डिजाइनिंग से जुड़े विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम इन संस्थानों में उपलब्ध हैं-
  • इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद।
  • इंडियन डायमंड इंस्टीट्यूट, सूरत।
  • ज्वेलरी प्रोडँट डेवलपमेंट सेंटर, नई दिल्ली।
फर्नीचर मेकिंग के क्षेत्र में कॅरियर के क्या अवसर हैं ?

फर्नीचर मेकिंग व्यवसाय अब सिर्फ बढ़ई का काम नहीं रह गया, बल्कि इसमें कुशल डिजाइनरों की माँग व्यापक स्तर पर बढ़ी है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले पाँच सालों में बाजार में तकरीबन एक लाख फर्नीचर डिजाइनरों की आवश्यकता होगी। रचनात्मकता और नए डिजाइन के लिए कुशलता के साथ-साथ प्रशिक्षण की भी जरूरत होती है। गौरतलब है कि इस व्यवसाय में धनोपार्जन के साथ-साथ अपनी कलात्मकता को अभिव्यक्त करने का मौका और सृजन की संतुष्टि का अहसास भी मिलता है। दिनों-दिन बढ़ती माँग और स्वर्णिम भविष्य की कल्पनाओं के कारण फर्नीचर मेंकिंग कॅरियर के रूप में आज युवाओं में काफी लोकप्रिय हो रहा है। किसी प्रतिष्ठि त संस्थान से फर्नीचर मेंकिंग का कोर्स करने के बाद किसी भी डिजाइनर के साथ काम किया जा सकता है। फर्नीचर मेंकिंग का कोर्स करने के बाद अपना व्यवसाय भी शुरू किया जा सकता है या इस क्षेत्र में काम कर रही प्रतिष्ठि त कंपनियों से जुड़कर काम कर सकते हैं। भारत में फर्नीचर निर्माण के क्षेत्र में कई विदेशी कंपनियाँ भी कूद चुकी हैं। इस क्षेत्र में कॅरियर की असीम संभावनाओं को देखते हुए अनेक संस्थानों ने फर्नीचर मेंकिंग के कोर्स शुरू किए हैं। आमतौर पर पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए शैक्षणिक योग्यता १०वीं पास है, पर कुछ संस्थानों में नामांकन के लिए आवेदन करते समय १२वीं पास होना आवश्यक है।

फर्नीचर मेंकिंग का कोर्स कराने वाले प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं-

  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइनिंग, अहमदाबाद, गुजरात।
  • प्लाइवुड इंडस्ट्रीज रिसर्च इंस्टीट्यूट, तुमकुर रोड, बंगलुरू।
  • गवर्नमेंट पोलीटेँनिक फार वूमन, चंडीगढ़।
  • कलमकारी वोकेशन ओरिएंटेड वूमंस पोलीटेँनिक, गाँधीनगर, गुजरात।

मल्टीमीडिया के क्षेत्र में कॅरियर के क्या अवसर हैं ? मल्टीमीडिया से संबंधित रोजगारोन्मुखी कोर्स कहाँ से किया जा सकता है ?
एनिमेशन, वीडियो, टेँस्ट, ऑडियो, ग्रफिक्स और इंटरेँटिविटी को मिलाकर बना है -मल्टीमीडिया। मल्टीमीडिया का आजकल प्रिंट, टेलीविजन, सिनेमा, विज्ञापनों, इंटरनेट, बिजनेस प्रजेंटेशन, सॉऍटवेयर इंटरफेज, वीडियो गेमिंग और शिक्षा जैसे तमाम क्षेत्रों में उपयोग हो रहा है। मनोरंजन उद्योग के विकास में आने वाले दिनों में भी मल्टीमीडिया का अहम योगदान रहेगा। इस क्षेत्र में भारत के आगे रहने का प्रमुख कारण एनिमेशन में महारत होना है। नैस कॉ म की एक रिपोर्ट के अनुसार आने वाले दो-तीन वर्षों में ही एनिमेशन का क्षेत्र लगभग ३५ प्रतिशत से अधिक की दर से विकसित होकर ९५०० लाख रुपए के आँकड़े को छू सकता है। मल्टीमीडिया के क्षेत्र में १२वीं के बाद कॅरियर बनाया जा सकता है। मल्टीमीडिया में कॅरियर की संभावनाओं का अंदाजा गली-मोहल्ले एवं नुँकड़ों में खुलते जा रहे मल्टीमीडिया ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट की संख्या को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है लेकिन सभी संस्थाओं में अच्छी सुविधाएँ हों, यह भी जरूरी नहीं है। युवाओं को इस क्षेत्र में प्रतिष्ठि त संस्थान से शॉर्ट टर्म या फिर पार्ट टाइम कोर्सेस के बजाय लंबी अवधि के कोर्स को ज्वॉइन करना चाहिए, क्योंकि मल्टीमीडिया में अच्छे रोजगार के लिए सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों से ज्यादा महत्व डिग्री पाठ्यक्रम को दिया जाता है । मल्टीमीडिया से जुड़े प्रमुख पाठ्यक्रम इन संस्थानों में उपलब्ध हैं-
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, पालदी, अहमदाबाद।
  • फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे।
  • इंडस्ट्रियल डिजाइन सेंटर, आईआईटी, पवई मुंबई।
  • मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों में स्थित एरीना मल्टीमीडिया ।
  • माया एकेडमी ऑफ एडवांस्ड सिनेमेटिँस, इंदौर। ।
मैं सिनेमेटोग्राफर बनना चाहता हूँ । कृपया मार्गदर्शन प्रदान करें ।
वर्तमान समय में फिल्मों में कैमरामैन का काम बेहद अहम हो गया है। एक फिल्म बनाने के दौरान बड़ी संख्या में कैमरों का प्रयोग आम बात हो गई है। फिल्म में इस्तेमाल किए जा रहे सभी कैमरों का समन्वय करने का काम एक व्यक्ति का होता है जिसे हम सिनेमेटोग्राफर कहते हैं इस क्षेत्र में कॅरियर बनाने के इच्छुक लोग कैमरामैन से लेकर सिनेमेटोग्राफर तक अपने भविष्य को विस्तार दे सकते हैं। सिनेमेटोग्राफर का काम मुंयत: इमेजेस से जुडे सभी तकनीकी पक्षों का ध्यान रखना होता है। इस जिम्मेदारी को निभाते हुए उसे लाइटिंग, लैंस निर्धारण, लैंस का सामंजस्य, फिल्टरेशन, एँसपोजर और किस तरह की फिल्म का प्रयोग करना है आदि तय करना होता है। सिनेमेटोग्राफर को फिल्म के प्री और पोस्ट प्रोडँशन में कलात्मक एवं उससे जुडे तथ्यात्मक परिवर्तन करने का भी अधिकार होता है। फिल्म में रंगों का सुंदर संयोजन भी सिनेमेटोग्राफर की ही देन है। कहना गलत नहीं होगा कि सिनेमेटोग्राफर पूरी कैमरा टीम का डायरेक्टर होता है। कॅरियर की दृष्टि से इस क्षेत्र में पैसा और शोहरत दोनों हैं। शुरुआत में निश्चित आय न होते हुए भी इस क्षेत्र का आकाश बहुत विस्तृत है। लेकिन उन ऊँचाइयों तक पहुँचने का रास्ता मजबूत इच्छाशक्ति के साथ दृढ़ निश्चय, परिश्रम और धैर्य से होकर जाता है। सिनेमेटोग्राफढी का कोर्स कराने वाले प्रमुख संस्थान एवं उनसे संबंधित पाठ्यक्रम इस प्रकार हैं-
  • फिल्म एवं टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, लॉ कॉलेज रोड, पुणे-४११००४ (यहाँ से सिनेमेटोग्राफी में तीन साल का पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा पाठ्यक्रम किया जा सकता है।)
  • द विस्लिंग वुड्स इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फिल्म टीवी एंड मीडिया आर्ट्स,मुंबई फिल्म सिटी, गोरेगाँव, मुंबई-६५ (यहाँ से दो साल का सिनेमेटोग्राफफी कोर्स किया जा सकता है।)।
  • एल.वी. प्रसाद फिल्म एवं टीवी एकेडमी, चेन्नई, २८, अरुणाचलम रोड, सालीग्राम, चेन्नई-९३ (यहाँ से दो साल का पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन सिनेमेटोग्राफढी किया जा सकता है।
कार्टूनिंग एवं एनिमेशन के क्षेत्र में कॅरियर बनाना चाहता/चाहती हूँ । कृपया जानकारी प्रदान करें ?
वर्तमान समय में कार्टून एवं एनिमेशन का बाजार इतनी रफ्तार पकड़ रहा है कि कार्टूनिस्टों एवं एनिमेटरों की माँग में भारी तेजी आ गई है। यूँ तो कार्टून एवं एनिमेशन के क्षेत्र में पश्चिमी देशों का दबदबा रहा है, लेकिन पिछले कुछ समय से भारत ने भी इस क्षेत्र में बहुत प्रगति की है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में तो कार्टूनिस्टों की माँग है ही, टेलीविजन पर भी इनकी माँग बढ़ती जा रही है। २-डी और ३-डी एनिमेशन की माँग आने वाले समय में और अधिक होने वाली है। इसका अंदाजा पिछले दिनों रिलीज हुई कार्टून फिल्मों-हनुमान, हनुमान रिटर्न्स, माई फ्रेंड गणेशा और कृष्णा की कामयाबी से लगाया जा सकता है । वैसे तो इस क्षेत्र में आने के लिए किसी औपचारिक शिक्षा की जरूरत नहीं है, केवल आपके अंदर कला सृजन की क्षमता और रचनात्मकता का हुनर होना चाहिए। विश्व के अनेक प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट एवं एनिमेटर अपने हुनर के बूते ही इस क्षेत्र की ऊँचाइयाँ छू रहे हैं लेकिन आपको एक अच्छा कार्टूनिस्ट एवं एनिमेटर बनाने में कई विश्वविद्यालय और संस्थान भी कार्यरत हैं। कार्टूनिंग एवं एनिमेशन में डिप्लोमा और डिग्री कोर्स देश के कई संस्थानों में उपलब्ध है। कार्टूनिंग व एनिमेशन में डिप्लोमा व स्नातक कोर्स के लिए आपको मान्यता प्राप्त् संस्थान से कम से कम ४५ प्रतिशत अंकढों के साथ बाहरवीं उत्तीर्ण होना आवश्यक है। स्नातकोत्तार कोर्स के लिए आपका किसी भी विषय में स्नातक होना जरूरी है, बशर्ते आपकी रचनात्मक पकड़ अच्छी हो। टेलीविजन क्षेत्र में प्राइवेट कम्पनियों के आने से कार्टून और एनिमेशन में कॅरियर की चाह रखने वाले लोगों की माँग तेजी से बढ़ रही है। अनेक कार्टून चैनल और भारत में बढ़ता हुआ कार्टून फिल्मों का बाजार इस माँग को और बढ़ाने का काम कर रहे हैं। टेलीविजन कंपनियों, विज्ञापन कंपनियों, कम्प्युटर व गेम बनाने वाली कंपनियाँ सक्षम एवं योग्य लोगों को हाथों-हाथ ले रही हैं। विकसित देशों जैसे यूरोप और अमेरिका में कार्टून फिल्मों और कार्टूनिस्टों की माँग बहुत है। पश्चिमी देश भारतीय युवाओं को कार्टून एवं एनिमेशन के क्षेत्र में उनकी योग्यता एवं रचनात्मकता के कारण अन्य देशों के युवाओं की अपेक्षा अधिक महत्व देते हैं। यदि आप इस क्षेत्र में दक्षता प्राप्त् कर लेते हैं तो आपकेलिए रोजगार की कोई कमी नहीं है। कार्टूनिंग एंड एनिमेशन का कोर्स कराने वाले प्रमुख संस्थान एवं उनकी वेबसाइट इस प्रकार हैं-
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, पालदी, अहमदाबाद । वेबसाइट- www.nid.edu
  • सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ इमेजिंग टेँनोलॉजी, चित्रांजली स्टूडियो कॉम्पलेस, तिरुवेल्लाम पी.ओ., तिरुअंनतपुरम, केरल । वेबसाइट- www.e-dit.org
  • फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे। वेबसाइट- www.ftiindia.org.
  • विभिन्न शहरों में स्थित एरेना मल्टीमीडिया । वेबसाइट- www.arena-multimedia.com

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मैं मूर्तिकला के क्षेत्र में उज्जवल करियर बनाना चाहता/चाहती हूँ । कृपया मार्गदर्शन दें ।

मूर्तिकला शिल्प की एक प्राचीन विधा है, जिसमें मूर्तिकार विशेष औजारों से अपनी कल्पना को नायाब आकृति के रूप में ढ़ालता है। कोई भी शिल्पकार अपने शिल्प को लकड़ी, धातु या मिट्टी जैसे माध्यमों से खास आकार देता है। इसमें स्मारक, कीर्तिस्तंभ, मानव मूर्ति और अन्य अनेक प्रकार का शिल्प शामिल है। एक मूर्तिकार सामान्यत: मूर्तियाँ बनाने के लिए सीमेंट कंकरीट, सफेद ताँबा,प्लास्टर ऑफ पेरिस या मिट्टी का प्रयोग करता है। हाल ही में समुद्र के किनारे रेत से तथा बर्फीले क्षेत्रों में बर्फ से मूर्तियाँ बनाने का चलन भी जोरों पर है और अब तो मोम की मूर्तियाँ भी बनाई जाने लगी हैं। इसलिए आज देश के साथ-साथ विदेशों में भी मूर्तिकारों के लिए रोजगार के अनेक उजले अवसर हैं। बारहवीं कक्षा के बाद आप मूर्तिकला में बैचलर ऑफ फाइन आर्ट की डिग्री ले सकते हैं। इसके लिए ५० प्रतिशत अंको के साथ बारहवीं कक्षा उत्तीर्णहोना आवश्यक है। अभिरुचि परीक्षा में उत्तीर्णहोने के पश्चात इस पाठ्यक्रम में प्रवेश मिल पाता है। बैचलर ऑफ फाइन आर्ट में ५० प्रतिशत अंक प्राप्त् करने के बाद आप मास्टर ऑफ फाइन आर्ट की डिग्री ले सकते हैं। अनेक संस्थानों द्वारा इसमें डिप्लोमा कोर्स भी कराए जाते हैं। मूर्तिकला के क्षेत्र में अवसरों की कमी नहीं है। जिन लोगों का प्राकृतिक रूप से कला की ओर झुकाव हो, वे अपनी कला को विकसित कर मूर्तिकला के क्षेत्र में महारत हासिल कर अपना नाम चमका सकते हैं। मूर्तिकला में विशेषज्ञता प्राप्त् करने के बाद किसी सरकारी अथवा निजी स्कूल एवं कालेज में क्राफ्टऍट शिक्षक के रूप में कार्य किया जा सकता है। विभिन्न संग्रहालयों में मूर्तियों के रखरखाव के लिए भी मूर्तिकारों को नियुक्त किया जाता है। कलाकार स्वतंत्र रूप से कार्य करके विभिन्न प्रकार के डिजाइन बनाकर एक साथ कई लोगों और संस्थानों के लिए डिजाइनिंग का काम कर सकते हैं । मूर्तिकार अपनी आर्ट गैलरी भी खोल सकते हैं, जिसमें अपने डिजाइन और मूर्तियों को अपनी इच्छानुसार बेच सकते हैं। मूर्तिकला से संबंधित प्रशिक्षण देने वाले प्रमुख संस्थान हैं-
  • फाइन आर्ट कालेज, एमजी रोड, इंदौर ।
  • जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट, मुंबई ।
  • कालेज ऑफ आर्ट, तिलक मार्ग, नई दिल्ली।
  • एम.एल. बड़ौदा विश्वविद्यालय, बड़ौदा, गुजरात।
  • विश्वभारती विश्वविद्यालय, शान्तिनिकेतन,पश्चिम बंगाल।
  • कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र, हरियाणा ।
बैंक प्रोबेशनरी ऑफिसर भर्ती परीक्षा हेतु नोट्स 500 रुपए