ध्यानार्थ- श्री राजीव तिवारी जी-९-१२-२००८ वीडियो एडिटिंग में रोजगार के चमकीले अवसर इलेँट्रॉनिक मीडिया में रोजगार के लिहाज से परदे के सामने की तुलना में परदे के पीछे ज्यादा अवसर होते है। इससे जुडे कई क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल कर चमकीला कॅरियर बनाया जा सकता है। इन्हीं में से एक रोजगार क्षेत्र है वीडियो एडिटिंग का जिसमें कॅढरियर के ढ़ेरों अवसर उपलब्ध हैं । दर्शक जब वीडियो कार्यक्रम देखता है तो जिन दृश्यों को देखकर प्रभावित एवं रोमांचित होता है वह होता है निर्देशक की प्रतिभा का कमाल, लेकिन इस कमाल को बेमिसाल बनाने में वीडियो एडिटिंग का कमाल सबसे महत्वपूर्ण होता है। किसी भी वीडियो कार्यक्रम में वीडियो एडिटर पोस्ट प्रोडक्शन प्रक्रिया में उल्लेखनीय योगदान देता है। वीडियो एडिटिंग के अंतर्गत किसी न्यूज स्टोरी, डॉँयूमेंट्री, टेलीफिल्म या अन्य कार्यक्रमों के लिए शूट अर्थात पिक्चराइज्ड किए गए फुटेज या लिपिंग से स्क्रिप्ट और स्टोरी की माँग के अनुरूप दृश्य (शॉट्स) काटकर क्रमबद्ध तरीके से व्यवस्थित किए जाते हैं और अनावश्यक दृश्य हटा या डिलीट कर दिए जाते है। इसके अलावा इसमें ऑडियो और विजुअल्स की मैचिंग भी होती है। आवश्यकतानुसार स्पेशल इफेक्टस भी डाले जाते हैं, वॉयस ओवर दी जाती है तथा औयूजिक या च्वॉइस ऑफ औयूजिक डाला जाता है। उसके बाद पैकेजिंग होती है। नई-नई मशीनें और नए-नए सॉफ्टवेयर के आ जाने से फिल्म एडिटिंग का काम बहुत आसान हो गया है।
गौरतलब है कि वीडियो एडिटिंग दो तरह की होती है- लीनियर एडिटिंग और नॉन लीनियर एडिटिंग। टेप-टू-टेप एडिटिंग को लीनियर एडिटिंग कहते हैं इसके अंतर्गत एक या एक से अधिक टेप (वीडियो कैसेट) के फुटेज से शॉट्स काटकर स्क्रिप्ट या स्टोरी के अनुरूप एक अलग टेप में क्रमबद्ध तरीके से रिकॉर्ड किए जाते हैं जिसे मास्टर कॉपी कहते हैं। इस प्रक्रिया के अंतर्गत एक-एक शॉट को ढूढने के लिए पूरे टेप को बार-बार रिवर्स और फॉवर्ड करना पडत़ा है, जो बहुत ही समय लेने वाला, ऊबाऊ और मेहनत का काम है। साथ ही टेप और फुटेज दोनों जल्दी खराब हो जाते हैं। वर्तमान में नॉन लीनियर एडिटिंग के आ जाने से आज लीनियर एडिटिंग की उपयोगिता बहुत कम रह गई है। एडिटिंग सॉफ्टवेयर की मदद से कम्प्यूटर द्वारा की जाने वाली एडिटिंग नॉन लीनियर एडिटिंग कही जाती है। इसके अंतर्गत शूट (पिक्चराइज्ड) किए गए फुटेज को सॉफ्टवेयर और कैप्चर कार्ड की मदद से डिजिटल फार्म में कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क में कैप्चर किया जाता है। फिर स्टोरी या स्क्रिप्ट के अनुसार शॉट्स फारवर्ड का झंझट नहीं होता और सारे शॉट्स कम्प्यूटर स्क्रीन पर कुछ ही सेकंड में उपलब्ध हो जाते हैं जिन्हें सिलेक्त करना और इच्छानुसार क्रम देना बहुत आसान काम होता है। नॉन लीनियर एडिटिंग में स्पेशल इफेक्टस, ग्राफिक्स, औयूजिक, साउंड इफेक्टस आदि भी बहुत आसानी से डाले जा सकते हैं।
कुछ संस्थानों में बारहवीं के बाद तो कुछ संस्थानों में स्नातक के उपरांत छात्रों को वीडियो एडिटिंग पाठ्यक्रम में दाखिला प्रदान किया जाता है। वीडियो एडिटिंग के प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम से लेकर डिग्री पाठ्यक्रम तक संस्थानों में उपलब्ध हैं । इन पाठ्यक्रमों के द्वारा इच्छुक युवा संपादन की बुनियादी अवधारणाओं को समझने लायक बन जाता है। इसके साथ ही साथ एक वीडियो एडिटर के भीतर शैक्षिक योग्यता के अलावा टीम के साथ कार्य करने की रुचि और क्षमता, सामान्य ज्ञान, तकनीकी ज्ञान और कम्प्यूटर तथा सॉफ्टवेयर की जानकारी होनी चाहिए। रचनात्मकता, कल्पनाशीलता, विजुअलाइजेशन की क्षमता, स्क्रिप्ट पर अच्छी पकड़, अच्छी समझ, धैर्य, लगन और कड़ी मेहनत का जज्बा हो तो व्यँति इस क्षेत्र में दिन दूनी, रात चौगुनी तरँकी कर सकता है । चूँकि टीवी चैनल के कार्यक्रम या फिल्में टीम वर्क पर आधारित हैं अत: यहाँ प्रत्येक व्यक्ति महत्वपूर्ण होता है और अपने हिस्से का जरूरी काम करता है, एडिटर भी उसमें से एक है इसलिए उसे अपने काम में पेर्फेक्त होना चाहिए। उसे निर्देशक की आवश्यकता को समझते हुए स्टोरी को फायनल टच देना होता है। इसलिए यदि आपको इस क्षेत्र में दिलचस्पी है तथा आप स्टूडियो में फिल्म निर्माण में महीनों और वर्षों का समय गुजारने की इच्छा रखते हैं तो वीडियो एडिटर के रूप में आप निश्चित ही एक ग्लैमरस कॅरियर का चयन कर सकते हैं।
वर्तमान में हमारे देश में सैकडों टीवी चैनल्स पर हजारों कार्यक्रम प्रतिदिन प्रसारित हो रहे हैं और निरंतर उनकी संख्या में वृद्धि हो रही है। इसलिए भविष्य में इस क्षेत्र में प्रशिक्षित लोगों की माँग बढ़ती ही जाएगी। इसके अलावा टीवी के लिए विभिन्न प्रकार के छोटे-बड़े कार्यक्रम बनाने वाले प्रोडँशन हाउसेज में भी रोजगार के असीमित अवसर हैं। हमारे देश में विश्व का सबसे बड़ा सिनेमा उद्योग है जहाँ विभिन्न भाषाओं में प्रतिवर्ष लगभग ८०० फिल्में बनती हैं। इसी बात से आप अनुमान लगा सकते हैं कि इस क्षेत्र में कितने अवसर उपलब्ध हैं।
वीडियो एडिटर के काम में स्थायित्व है और किसी भी फिल्म या टीवी चैनल में उसकी खासी अहमियत होती है। वीडियो एडिटिंग के क्षेत्र में १० से १५ हजार रुपए प्रतिमाह से शुरूआत करके अपनी क्षमतानुसार जितनी चाहें सेलरी पाई जा सकती है। वीडियो एडिटिंग का कोर्स करने के बाद आप स्वतंत्र निर्माण कंपनियों और मोशन पिँचर्स स्टूडियो में भी काम कर सकते हैं। कुछ वर्षों के अनुभव के बाद इस क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से काम किया जा सकता है अथवा अनुभव के आधार पर पोस्ट प्रोडँशन स्टूडियो, टीवी कंपनियों तथा कार्पोरेट कंपनियों में काम कर सकते हैं। इतना ही नहीं, वेबसाइटों में वीडियो तथा मूवी क्लिपिंग का प्रयोग भी निरंतर बढ़ता जा रहा है, इसीलिए ऑनलाइन वीडियो एडिटर की माँग भी लगातार बढ़ती जा रही है। ऑन लाइन वीडियो क्लिलिप की लोकप्रियता बढ़ने से इंटरनेट के क्षेत्र में भी वीडियो एडिटर्स के अवसर बढ़ते जा रहे हैं। कुछ अच्छे एडिटर आगे चलकर अच्छे निर्देशक भी साबित हुए हैं।