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खनन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में रोजगार के चमकीले अवसर

हमारी धरती के नीचे मौजूद प्रचुर खनिज संपदा हमारे जीवन का आधार है। परंतु खनिज संपदा का अनुचित एवं अवैज्ञानिक दोहन पर्यावरणीय असंतुलन की स्थितियाँ पैदा कर सकता है। इसीलिए मानवीय उपयोग के लिए इस प्राकृतिक संपदा को निकालने का काम प्रशिक्षित एवं दक्ष लोगों के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में किया जाता है जिन्हे खनन इंजीनियर तथा इस विधा को खनन (माइनिंग) इंजीनियरिंग कहते हैं। खनन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण एवं कौशल की जरूरत होती है। जिन युवाओं की खनन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में गहन रुचि हो केवल उन्हें ही इस क्षेत्र में कदम आगे बढ़ाना चाहिए क्योंकि इस क्षेत्र में काफी चुनौतियाँ हैं।

गौरतलब है कि हमारे देश में खनिज संपदा का प्रचुर भंडार है। मध्यप्रदेश, बिहार,झारखंड, उड़ीसा व पश्चिम बंगाल आदि राज्यों से भारी मात्रा में खनिज पदार्थ प्राप्त् होते हैं। देश की अर्थव्यवस्था में खनिज संपदा का महत्वपूर्ण स्थान है। अत: देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए शिक्षित- प्रशिक्षित खनन इंजीनियरों की माँग दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। खनन इंजीनियरिंग के तहत खनिज, पेट्रोलियम तथा अन्य भूगर्भीय पदार्थ शामिल होते हैं। देश में खनन कार्यों में आई भारी तेजी के का रण यह क्षेत्र इंजीनियरिंग की एक प्रमुख शाखा बन चुका है। खनन इंजीनियरिंग के अंतर्गत धरती के भीतर खनिज पदार्थों की मौजूदगी का पता लगाना तथा सुरक्षित तरीके से उनकी खुदाई कर धरती से बाहर निका लना शामिल है।

खनन इंजीनियरिंग के कार्यक्षेत्र में प्रमुख रूप से उत्खनन, कच्चे खनिज पदार्थों का शुद्धिकरण आदि आते हैं। खनन इंजीनियर न केवल खनिजों से धातु और मिश्रधातु का उत्पादन करते हैं, बल्कि इस प्रक्रिया के दौरान वातावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को भी कम करने का प्रयास करते हैं। सामान्य रूप से खनन प्रक्रिया एक सूनियोजित भू-प्रायोगिक सर्वेक्षण के बाद ही प्रारंभ की जाती है। जिससे यह पता चल जाता है कि पृथ्वी के अंदर कितनी मात्रा में खनिज पदार्थ मौजूद हैं। एक तरीका यह भी है कि सर्वेक्षण के अंतर्गत चिहिन्त क्षेत्र के किसी भी भू भाग से पत्थरों को निकालकर उनका त्रिस्तरीय अध्ययन कर प्रतिशत का आकलन किया जाता है। खनिज पदार्थों की उपलब्धता ज्ञात होने पर खनन- प्रक्रिया भूमिगत अथवा उपरिगामी दो रूप में होती है। उदाहरण के तौर पर सोना, कोयला आदि भूमिगत खनन के द्वारा मिलते हैं। जबकि लौह अयस्क, चूना आदि चट्टानों को तोड़ने के लिए विस्फोट का सहारा लिया जाता है। यह विस्फोट कम अथवा तीव्र गति के सहारे उन्हीं स्थानों पर किया जाता है, जहाँ कच्चा माल मिलने की भरपूर संभावना रहती है।

खनन इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए उम्मीदवार को बारहवीं की परीक्षा भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र एवं गणित विषय से उतीर्र्णहोना आवश्यक है। प्रवेश परीक्षा उतीर्र्णकरने के पश्चात ही बी.टेक.,बी.ई. (माइनिंग),बी.एससी(माइनिंग इंजीनियरिंग) में प्रवेश दिया जाता है। खनन इंजीनियरिंग के विभिन्न स्नातक पाठ्यक्रमों की अवधि तीन से पाँच वर्ष निर्धारित है। इसके बाद छात्र स्नातको र पाठ्यक्रम अर्थात एम.टेक या एम.ई. जो दो वर्ष का होता है, में प्रवेश केलिए अधिकृत हो जाते हैं।

खनन इंजीनियरी के स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले उम्मीदवारों की आयु १६ से २१ वर्ष के बीच होनी चाहिए। खनन इंजीनियरिंग का पाठ्यक्रम संचालित करने वाले संस्थानों में प्रवेश परीक्षा के आधार पर ही प्रवेश दिया जाता है। इसके लिए विभिन्न संस्थान अखिल भारतीय स्तर पर लिखित परीक्षा का आयोजन करते हैं। लिखित परीक्षा मुंयत: बारहवीं स्तर के फिजिक्स, कैमिस्ट्री, मैथ्स व इंग्लिश आदि विषयों पर आधारित होती है। भारत में डीएड विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त् इंडियन स्कूल ऑफ माइंस में कई तरह के कोर्स जैसे माइनिंग इंजीनियरिंग, पेट्रोलियम इंजीनियरिंग, मिनरल इंजीनियरिंग और मशीनरी माइनिंग आदि पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। इस संस्थान में प्रवेश के लिए प्रत्येक वर्ष जनवरी-फरवरी में आवेदन पत्र आमंत्रित किए जाते हैं । रोजगार की दृष्टि से खनन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अनुभवी व्यक्तियों की माँग सदैव बनी रहती है। सरकारी अथवा प्राइवेट दोनों ही सेँटरों में रोजगार के पर्याप्त् और उजले अवसर विद्यमान हैं। इस क्षेत्र में शिक्षण अथवा शोध की दिशा में भी कदम बढ़ाया जा सकता है। देश की अनेक प्रतिष्ठित कंपनियों जैसे टाटा आयरन एंड स्टील, रिलायंस पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया, यूरेनियम कोर्पोरेशन ऑफ इंडिया, सरकारी खनन निगम आदि में रोजगार के चमकीले अवसर उपलब्ध हैं। प्रमुख सार्वजनिक उपक्रमों जैसे हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड, नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कढॉर्पोरेशन, इंडियन ऒयूरो ऑफ माइंस लिमिटेड में खनन इंजीनियरों की भारी माँग है। इसके अलावा माइनिंग रिसर्च सेंटर, धनबाद, इंडियन एक्स्प्लोसिव लिमिटेड, इंडियन डेटोनेटर्स लिमिटेड आदि में भी रोजगार के प्रचुर अवसर हैं। खनन इंजीनियरिंग का कोर्स करने के उपरांत विदेशों में भी रोजगार के उज्ज्वल अवसर हैं। खनन क्षेत्र में खनन इंजीनियरों के वेतनमान बहुत आकर्षक होते हैं। जोखिम भरा का म होने के का रण जमीन के नीचे खदानों में काम करने वाले इंजीनियरों को धरातल पर काम करने वालों की अपेक्षा अधिक वेतन दिया जाता है। एक खनन इंजीनियर को आमतौर पर शुरूआत में २५ से ३० हजार रुपए तथा खदान के अंदर काम करने वाले को ४० से ५० हजार रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। अनुभव के साथ-साथ वेतन में भी लगातार वृद्धि होती जाती है। अंत में यह कहा जाना उपयुक्त होगा कि यदि आपको चुनौतियाँ पसंद हैं और यदि आप खतरा उठाने का माद्दा रखते हैं तो आपके लिए खनन क्षेत्र में रोजगार एवं करियर की ढ़ेरों संभावनाएँ हैं।

खनन इंजीनियरिंग का कोर्स कराने वाले देश के प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं-

  • इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स, धनबाद, झारखंड।
  • इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी।
  • बिहार इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सिंदरी, बिहार ।
  • महाराष्ट्र इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, १२४, कोथुर्ड रोड, पुणे ।
  • गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज, रायपुर, छतीसगढ़।

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