प्लास्टिक उद्योग में कॅरियर के चमकीले अवसरआम आदमी की आम जरूरतों से लेकर उद्योग जगत तक में प्लास्टिक अपनी गहरी पैठ बना चुका है। घर हो या बाहर, प्लास्टिक का प्रयोग दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। बीते एक दशक में इस उद्योग का बहुत ही तेजी से विकास हुआ है। इसी के परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएँ भी बढ़ती जा रही हैं। प्लास्टिक के इसी बढ़ते प्रभाव को देखते हुए युवा प्लास्टिक टेक्नोलॉजी का अध्ययन कर इस क्षेत्र में चमकता हुआ कॅरियर बना सकते हैं।
गौरतलब है कि प्लास्टिक वह पोलीमेटिक सामग्री है जिसे किसी भी रूप में ढ़ाला जा सकता है। सभी प्लास्टिक पोलीमर होते हैं। पोलीमर एक रासायनिक यौगिक होता है, जो ऐसी रासायनिक क्रिया के फलस्वरूप निर्मित होता है, जिसमें दो या अधिक छोटे अणु मिलकर ऐसे बड़े अणु बनाते हैं, जिनमें मूल अणुओं की संरचनात्मक इकाइयों का दुहराव होता है। ध्यातव्य है कि प्लास्टिक उद्योग के प्रोफेशनल्स प्लास्टिक के दानों को एँस्ट्रशन, कॉर्पोरेशन, ऒलो, ट्रांसफर, इंजेक्शन, थर्मो फार्मिंग और थर्मो सेटिंग्स जैसी प्रक्रियाओं द्वारा तैयार उत्पाद में बदलते है।
वर्तमान युग का सर्वाधिक वैविध्यपूर्ण उत्पाद प्लास्टिक है।। खिलौनों से लेकर घरेलू सामान और विभिन्न औद्योगिक घटको में प्लास्टिक का उपयोग बहुत अधिक मात्रा में किया जा रहा है।। इसके अतिरिक्त ऑटोमोबाइल्स, रेडियो और टेलीविजन सेट, मोबाइल, इलेक्ट्राक्सनिक्स, पेंट्स, सिंथेटिक टेक्सटाइल्स, एयरक्राफ्टऍट सामग्रियों, मेडिकल और सर्जिकल उपकरणों में भी प्लास्टिक का जमकर इस्तेमाल हो रहा है।। प्लास्टिक का उपयोग दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है।। आर्थिक उदारीकरण और घटती आयात ड्यूटी ने भी प्लास्टिक उद्योग का ग्राफ लगातार ऊँचा किया है।।
भारत सरकार ने प्लास्टिक उद्योग को उच्च प्राथमिकता वाला क्षेत्र माना है। इसका कारण यह है कि अन्य प्राकृतिक संसाधनों की तुलना में बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति में प्लास्टिक एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। इसके साथ ही कृषि और जल प्रबंधन, परिवहन, भवन और निर्माण, दूरसंचार और इलेक्ट्रानिक, सुरक्षा तथा ऊर्जा निर्माण आदि में भी प्लास्टिक एक महत्वपूर्ण घटक है। प्लास्टिक का बहुतायत में पैकेजिंग, घरेलू उत्पादों, कम्युनिकेशन्स मशीन और मशीन टूल्स इंडस्ट्री में उपयोग होता है।
भारत में प्लास्टिक की माँग में प्रतिवर्ष १० से १५ प्रतिशत की वृद्धि हो रही है तथा भारत में प्लास्टिक की खपत २०१५ तक २२०० मिलियन टन हो जाने की संभावना व्यक्त की गई है।। प्लास्टिक की खपत और बढ़ती माँग से आने वाले वर्षों में प्लास्टिक सेँटर में ८५ लाख अतिरिक्त रोजगार के अवसर सृजित होंगे। सार्वजनिक क्षेत्र में प्लास्टिक इंजीनियर्स/टेक्नोलॉजिस्ट्स को पेट्रोलियम मंत्रालय, ऑयल एंड नेचुरल गैस कमीशन, ऑयल इंडिया लेबोरेटरीज, इंजीनियरिंग संयंत्रों, पेट्रोकेमिकल्स, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, विभिन्न राज्यों में पोलीमर्स कार्पोरेशन, पेट्रोलियम कंजर्वेशन रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया, पेट्रोलियम को-ऑपरेटिव लिमिटेड आदि में कॅरियर के अच्छे अवसर हैं। इसके अतिरिक्त स्वरोजगार के क्षेत्र में भी कॅरियर की उजली संभावनाएँ हैं।
प्लास्टिक इंजीनियरिंग के क्षेत्र में प्रशिक्षण देने वाला सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीपेट) एक स्वशासी निकाय है, जो भारत सरकार के रसायन और उर्वरक मंत्रालय के केमिकल एवं पेट्रोकेमिकल विभाग के अधीन आता है। सीपेट का मुंयालय १९६८ में चेन्नई में स्थापित किया गया था। यह संपूर्ण भारत में अपने प्रकार का पहला संस्थान है जहाँ डिजाइन, टूलिंग व प्लास्टिक की प्रोसेसिंग और टेस्टिंग की सुविधा एक ही छत के नीचे उप्लब्ध है। सीपेट देश के प्लास्टिक उद्योग की आवश्यकताओं की पूर्ति मेनपॉवर ट्रेनिंग, प्रोसेसिंग, डिजाइन, टेस्टिंग, कंसल्टेंसी, एडवायजरी और डेवलपमेंट सर्विसेज द्वारा करता है। देश की प्लास्टिक इंडस्ट्री की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सीपेट ने देश के विभिन्न राज्यों में विस्तार केंद्र खोले हैं। सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी की एक शाखा भोपाल के सेँटर-जी, गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया में स्थापित है।
सीपेट द्वारा कराए जाने वाले प्रमुख पाठ्यक्रम इस प्रकार हैं-
- डिप्लोमा/पोस्ट डिप्लोमा इन प्लास्टिक टेक्नोलॉजी- इस पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु १०वीं कक्षा गणित, विज्ञान
- अंग्रेजी विषयों से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु अधिकतम आयु सीमा १८ वर्ष निर्धारित है।।
- पोस्ट डिप्लोमा इन मशीन मेंटेनेंस- इस एक वर्षीय पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु मेकेनिकल, प्लास्टिक, केमिकल टेक्नोलॉजी, टूल, प्रोडक्शन, मेकेट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, टूल एंड डाई मेकिंग में से किसी एक विषय में तीन वर्षीय डिप्लोमा आवश्यक है। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु अधिकतम आयु सीमा २४ वर्ष निर्धारित है।
- पोस्ट डिप्लोमा इन प्लास्टिक मोल्ड डिजाइन- इस एक वर्षीय पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु मेकेनिकल, केमिकल, ऑटोमोबाइल, मेकेट्रॉनिक्स या समकक्ष में तीन वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम आवश्यक है। इस पाठ्यक्रम हेतु अधिकतम आयु सीमा २४ वर्ष निर्धारित है।
- पोस्ट डिप्लोमा इन प्लास्टिक प्रोसेसिंग एंड टेस्टिंग- इस डेढ़ वर्षीय पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु रसायन विषय सहित स्नातक होना आवश्यक है। इस पाठ्यक्रम हेतु अधिकतम आयु सीमा २४ वर्ष निर्धारित है।
- पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन प्लास्टिक इंजीनियरिंग- इस एक वर्षीय पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु बीई,बीटेक, बी.एससी या समकक्ष योग्यता आवश्यक है। इस पाठ्यक्रम हेतु अधिकतम आयु सीमा २६ वर्ष निर्धारित है। च मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी इन प्लास्टिक इंजीनियरिंग- इस दो वर्षीय पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु बीई,बीटेक, बीएससी या समकक्ष योग्यता आवश्यक है। इस पाठ्यक्रम हेतु अधिकतम आयु सीमा ३५ वर्ष निर्धारित है। सेन्ट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा देनी होती है। यह प्रवेश परीक्षा सामान्यत: जुलाई माह में होती है जिसके लिए मई-जून में आवेदन देना होता है।
- देश के अन्य संस्थानों में भी प्लास्टिक टेक्नोलॉजी के विभिन्न कोर्स उप्लब्ध हैं। बारहवीं में विज्ञान (गणित) की पृष्ठ भूमि रखने वाले छात्र प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में बी.टेक करने की पात्रता रखते है।। प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में एम. टेक करने के लिए केमिकल इंजीनियरिंग या प्लास्टिक रबर टेक्नोलॉजी या मैकेनिकल इंजीनियरिंग अथवा टेँक्सटाइल इंजीनियंरिंग में बी.टेक. या बीई उपाधि होना आवश्यक है।। भौतिक शास्त्र अथवा रसायन शास्त्र में एमएससी करने वाले छात्र भी प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में एम.टेक कर सकते हैं। जिन छात्रों ने गेट परीक्षा उत्तीर्णकी हो, उन्हें एम. टेक में प्राथमिकता दी जाती है। प्लास्टिक टेक्नोलॉजी में कढॅरियर बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के पास शैक्षणिक योग्यता के साथ कठोर परिश्रम, नवाचार, कल्पनाशीलता, औसत से अधिक बुद्धिमत्ता तथा भौतिकी और रसायन विज्ञान में गहरी रुचि होना बहुत आवश्यक है।
प्लास्टिक उद्योग से संबंधित विभिन्न कोर्स कराने वाले देश के प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं-
सेन्ट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, (सीपेट), भोपाल। गोविंद वल्लभपंत पोलीटेँनिक, ओखला। इंडियन प्लास्टिक इंस्टीट्यूट, मुंबई। निरमा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, अहमदाबाद। एसएसई कालेज ऑफ इंजीनियंरिंग एंड टेक्नोलॉजी, अकोला। एमआईटी, अन्ना विश्वविद्यालय, चेन्नई।