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इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम क्या है ? इससे संबंधित कोर्स कहाँ से किया जा सकता है? सोशल इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम का उद्देश्य सभी प्रकार की चुनौतियों के लिए एँशन प्लान तैयार करना है, ताकि समाज के सभी वर्गों का समुचित विकास हो सके। सोशल इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में डिजास्टर मैनेजमेंट, मैनेजमेंट इन्फर्मेशन सिस्टम, एग्री बिजनेस मैनेजमेंट, हॉस्पिटल मैनेजमेंट, मास मीडिया एंड कम्युनिकेशन, कार्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी, एनजीओ मैनेजमेंट, हेल्थ एंड डेवलपमेंट, फॉररेस्ट मैनेजमेंट तथा एजुकेशन जैसे विषयों की महत्वपूर्ण जानकारियों को समाहित किया गया है। सोशल इंजीनियरिंग में देश में स्नातकोत्तरपाठ्यक्रम उप्लब्ध हैं। पाठ्यक्रम की अवधि दो वर्ष है। किसी भी विषय से स्नातक उत्तीर्णअभ्यार्थि इस पाठ्यक्रम हेतु होने वाली प्रवेश परीक्षा उत्तीर्णकर इस पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सकता है। सोशल इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम को पूर्ण करने के पश्चात या साथ ही साथ प्रशिक्षु के रूप में आप कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से जुड सकते हैं। छात्र-छात्राएँ प्लानिंग कमीशन, स्टेट लेवल बोर्ड्स, स्टेट डेवलपमेंट कार्पोरेशन, रूरल डेवलपमेंट एजेंसीज, नाबार्ड, को-ऑपरेटिव्स, प्राइवेट सेँटर, इंटरनेशनल डेवलपमेंट एजेंसीज जैसे वर्ल्ड बैंक, यूनिसेफ आदि संस्थानों से जु़ड सकते हैं। ये संस्थाएँ आपको राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीयस्तर पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मौका प्रदान करती हैं। सोशल इंजीनियरिंग का स्नातकोत्तरपाठ्यक्रम लखनऊ विश्वविद्यालय में उप्लब्ध है। अधिक जानकारी के लिए डायरेँटर/को-आर्डिनेटर, डिपार्टमेंट ऑफ सोशियोलॉजी, यूनिवर्सिटी ऑफ लखनऊ, उतरप्रदेश से संपर्क करें।
माइनिंग इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कॅरियर के क्या अवसर हैं ? माइनिंग इंजीनियरिंग का कोर्स कहाँ से किया जा सकता है ?पृथ्वी के गर्भ में मौजूद खनिज संपदा मनुष्य के जीवन का आधार है। लेकिन इसका अवैज्ञानिक दोहन पर्यावरणीय असंतुलन की स्थितियाँ पैदा कर सकता है। यही कारण है कि मानवीय उपयोग के लिए इस प्राकृतिक संपदा को निकालने का काम प्रशिक्षित लोगों के नेतृत्व में किया जाता है। इस क्षेत्र में प्रशिक्षित होने के लिए विशेष अध्ययन की जरूरत होती है और खनन के क्षेत्र में कॅरियर की शुरुआत यहीं से मानी जानी चाहिए। हमारे देश में भी खनिज संपदा का प्रचुर भंडार है। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों से बहुत अधिक मात्रा में खनिज पदार्थ प्राप्त् होते हैं। देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रशिक्षित माइनिंग इंजीनियरों की माँग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। माइनिंग इंजीनियरिंग के क्षेत्र में प्रवेश के लिए छात्र को बारहवीं की परीक्षा भौतिक, रसायन तथा गणित विषय से उत्तीर्णहोना आवश्यक है। प्रवेश परीक्षा उत्तीर्णकरने के बाद ही बीटेक/बीई (माइनिंग) या बीएससी (माइनिंग इंजीनियरिंग) पाठ्यक्रम में प्रवेश मिलता है। माइनिंग इंजीनियरिंग का कोर्स इन संस्थानों में उप्लब्ध है- - इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स, धनबाद, झारखंड ।
- बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सिंदरी, बिहार ।
- कालेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग, उदयपुर, राजस्थान ।
- इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी ।
- गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कालेज, रायपुर, छत्तीसगढ़
न्यूँक्लियर इंजीनियरिंग में पाठ्यक्रम कहाँ से किया जा सकता है ? आईआईटी मुंबई एनर्जी सिस्टम प्रोग्राऔस के तहत न्यूँक्लियर इंजीनियरिंग का पाठ्यक्रम चला रहा है । अंडर ग्रेजुएट्स छात्र मैकेनिकल इंजीनियरिंग प्रोग्राम के तहत न्यूँक्लियर इंजीनियरिंग का हाफ कोर्स कर सकते हैं । आईआईटी मुंबई में चलाया जा रहा यह पीजी प्रोग्राम स्पांसर्ड प्रोग्राम है, जहाँ छात्रों का चयन संयुक्त रूप से फैकल्टी मेंबर्स और डिपार्टमेंट ऑफ एटॉमिक एनर्जी के विंग्स, न्यूँक्लियर पॉवर कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) और एटॉमिक एनर्जी रेग्युलेटरी बोर्ड (एईआरबी) के सदस्य मिलकर करते हैं । न्यूँक्लियर इंजीनियरिंग में स्नातक छात्र को एनपीसीआईएल या एईआरबी में सुनिश्चित रोजगार प्रदान किया जाता है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने चालू सत्र से ही न्यूँक्लियर इंजीनियरिंग में एमटेक कोर्स शुरू किया है ।
माइनिंग इंजीनियरिंग के क्षेत्र में कॅरियर के क्या अवसर हैं ? माइनिंग इंजीनियरिंग का कोर्स कहाँ से किया जा सकता है ?पृथ्वी के गर्भ में मौजूद खनिज संपदा मनुष्य के जीवन का आधार है। लेकिन इसका अवैज्ञानिक दोहन पर्यावरणीय असंतुलन की स्थितियाँ पैदा कर सकता है। यही कारण है कि मानवीय उपयोग के लिए इस प्राकृतिक संपदा को निकालने का काम प्रशिक्षित लोगों के नेतृत्व में किया जाता है। इस क्षेत्र में प्रशिक्षित होने के लिए विशेष अध्ययन की जरूरत होती है और खनन के क्षेत्र में कॅरियर की शुरुआत यहीं से मानी जानी चाहिए। हमारे देश में भी खनिज संपदा का प्रचुर भंडार है। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उड़ीसा, झारखंड, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों से बहुत अधिक मात्रा में खनिज पदार्थ प्राप्त् होते हैं। देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रशिक्षित माइनिंग इंजीनियरों की माँग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। माइनिंग इंजीनियरिंग के क्षेत्र में प्रवेश के लिए छात्र को बारहवीं की परीक्षा भौतिक, रसायन तथा गणित विषय से उत्तीर्णहोना आवश्यक है। प्रवेश परीक्षा उत्तीर्णकरने के बाद ही बीटेक/बीई (माइनिंग) या बीएससी (माइनिंग इंजीनियरिंग) पाठ्यक्रम में प्रवेश मिलता है। माइनिंग इंजीनियरिंग का कोर्स इन संस्थानों में उप्लब्ध है- - इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स, धनबाद, झारखंड ।
- बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सिंदरी, बिहार ।
- कालेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग, उदयपुर, राजस्थान ।
- इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी ।
- गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कालेज, रायपुर, छत्तीसगढ़
मैं बीई कंपप्यूटर इंजीनियरिंग/एमसीए का अंतिम वर्ष का छात्र/छात्रा हूँ । लेकिन सीधे डिग्री के बाद रोजगार मिल जाए ऐसी संभावनाएँ कम हैं । मुझे मध्यप्रदेश स्थित किसी टैलेंट फीनिशिंग स्कूल की जानकारी दें जहाँ से मैं ट्रेनिंग लेकर अच्छा रोजगार प्राप्त् कर सकूँ ? वास्तव में बीई या एमसीए की डिग्री की पढ़ाई के दौरान जो पढ़ाया जाता है केवल उसके आधार पर अच्छे कॅरियर की संभावनाएँ कम होती हैं। इन दिनों आईटी और कंपप्यूटर कंपनियों में नई नौकरियाँ भी कम हैं। ऐसे में रोजगार के अनुरूप विशेष रूप से प्रशिक्षण जरूरी है। इस परिप्रेक्ष्य में इंदौर में वात्सल्य चेंबर, आईनॉँस के सामने स्थित टैलेंट फीनिशिंग स्कूल नोएसिस से ट्रेनिंग कोर्स कर लाभ लिया जा सकता है।
मैं रोबोटिक्स के क्षेत्र में कॅरियर बनाना चाहता हूँ। कृपया मार्गदर्शन प्रदान करें ।रोबोटिक्स में रुचि रखने वाले छात्र गणित में अच्छे होने चाहिए। उच्चतम प्रतियोगी तथा तकनीकी क्षेत्र में आविष्कढार तथा इनोवेट करने के लिए सृजनात्मक योग्यता की भी आवश्यकता होती है।रोबोटिक्स के अध्ययन के लिए इंजीनियरिंग डिग्री आवश्यक है। यदि आप रोबोटिक्स में डिजाइनिंग तथा कंट्रोल में विशेषज्ञता प्राप्त् करना चाहते हैं तो आपको मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिग्री प्राप्त् करनी होगी। रोबोटिक्स से संबंधित पाठ्यक्रम इन संस्थानों में उपलब्ध हैं- - इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बंगलुरू। वेबसाइट- www.iisc.ernet.in
- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेँनोलॉजी, दिल्ली, कानपुर, मुंबई, चेन्नई, खड़गपुर, गुवाहाटी तथा रूड़की।
- सेंटर फार आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एंड रोबोटिँस, बंगलुरू। वेबसाइट- www.eair.res.in
- जादवपुर यूनिवर्सिटी, कोलकाता। वेबसाइट- www.jadavpur.edu
सोलर इंजीनियरिंग से संबंधित कोर्स कहाँ से किया जा सकता है ?सोलर इंजीनियरिंग से संबंधित कोर्स इन संस्थानों में उपलब्ध है - सोलर एनर्जी सोसायटी ऑफ इंडिया, पुणे विश्वविद्यालय, पुणे।
- टाटा ऊर्जा अनुसंधान संस्थान, दिल्ली।
- एनर्जी सिस्टऔस इंजीनियरिंग प्रोग्राम, आईआईटी, कानपुर।
कम्प्यूटर हार्डवेयर के क्षेत्र में कॅरियर के क्या अवसर हैं। कम्प्यूटर हार्डवेयर से संबंधित पाठ्यक्रम कहाँ से किया जा सकता है ? सूचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रभाव के कारण कम्प्यूटर वर्तमान में प्रत्येक व्यक्ति के लिए अनिवार्य आवश्यकता बनता जा रहा है। छोटे-बड़े सभी संस्थानों में इसके बिना काम की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। हर जगह कम्प्यूटर होने के कारण इन्हें मेन्टेन करने, इन्हें खराब होने से बचाने, इनकी खराबी ठीक करने के लिए कम्प्यूटर हार्डवेयर विशेषज्ञ की आवश्यकता होती है। ऐसी स्थिति में कम्प्यूटर हार्डवेयर विशेषज्ञों की बहुत माँग बढ़ गई है। गौरतलब है कि दिनोंदिन कम्प्यूटर पर बढ़ती निर्भरता आने वाले दिनों में इससे जुडे हार्डवेयर उद्योग को और भी बढ़ाएगी। आँकड़े बताते हैं कि सन् २०१० तक कम्प्यूटर हार्डवेयर उद्योग का कारोबार ६२ अरब डॉलर का हो जाएगा। इस तरह यह अपने मौजूदा आकार से १२ गुना बड़ा हो जाएगा। राष्ट्रीय-बहुराष्ट्रीय कम्प्यूटर कंपनियों में हार्डवेयर इंजीनियर को बहुत अच्छे वेतन पर नौकरी पर रखा जाता है। नेटवर्किंग के ज्ञान के साथ हार्डवेयर इंजीनियर कम्प्यूटर सपोर्ट विशेषज्ञ होने के अलावा इंटरनेट इंजीनियर बन सकते हैं। इसके अलावा संस्थान की वेबसाइट के लिए नेटवर्किंग आर्किटेँचर और इंटरनेट इंजीनियर भी बन सकते हैं। संस्थान की वेबसाइट के लिए नेटवर्किंग आर्किटेँचर और कनेक्टिविटी का प्रबंध करने और उसके रखरखाव के लिए भी हार्डवेयर इंजीनियर जिम्मेदार होता है। हार्डवेयर और नेटवर्क के ज्ञान के साथ नेटवर्क इंजीनियर के रूप में कॅरियर के काफी उजले अवसर हैं। कम्प्यूटर का उपयोग करने वाली सभी संस्थाओं को हार्डवेयर विशेषज्ञों की आवश्यकता होती है। अगर आपने किसी अच्छे प्रशिक्षण संस्थान से शिक्षा प्राप्त की है तो आप कम्प्यूटर हार्डवेयर डिजाइन विकास और निर्माण कंपनियों में काम कर सकते हैं। मध्यम और छोटे आकार की कई कंपनियाँ और उपयोगकर्ता जैसे स्कूल, डिपार्टमेंट स्टोर, मॉल आदि में भी रोजगार भी संभावनाएँ हैं। कम्प्यूटर हार्डवेयर मूलत: इंजीनियरिंग से संबंधित क्षेत्र है। आईआईटी जैसे विश्वविंयात इंजीनियरिंग संस्थानों में बीई और बीटेक स्तर पर कम्प्यूटर इंजीनियरिंग के तहत इस विषय को पढ़ाया जाता है, जबकि कुछ शासकीय एवं निजी प्रशिक्षण संस्थान बारहवीं के बाद भी इस तरह की ट्रेनिंग देते है जिसे किसी भी संकाय का विद्यार्थी कर सकता है। कम्प्यूटर हार्डवेयर कोर्सों के तहत नया कम्प्यूटर असेंबल करना, उसके पार्ट्स बदलना, सर्विसिंग, मेंटेनेंस, रिपेयरिंग तथा मार्केटिंग आदि की जानकारी प्रदान की जाती है। हार्डवेयर इंजीनियरों का काम डिजाइन, मूल्यांकन, नए कम्प्यूटर चिप्स, सर्किट बोर्ड, कम्प्यूटर सिस्टम, पेरिफेरल डिवाइसेस की जाँच से लेकर नवीनतम सॉफ़्टवेयर के साथ तालमेल बिठाने वाले उपकरणों के निर्माण और देख-रेख तक फैला होता है। हार्डवेयर का एडवांस क्षेत्र चिप डिजाइनिंग है। चिप डिजाइनिंग का क्षेत्र रोजगार की दृष्टि से बहुत अच्छा है। सभी कम्प्यूटर हार्डवेयर कंपनियों को चिप डिजाइनर की जरूरत होती है। बैचलर ऑफ इलेँक्ट्रोक्निस इंजीनियर या फिक्जिस में मास्टर डिग्री करने के बाद चिप डिजाइनिंग कोर्स में दाखिला लिया जा सकता है। वैसे फिक्जिस में बैचलर और मास्टर डिग्री में एक विषय चिप डिजाइनिंग शामिल है। चिप लेवल डिजाइनिंग के लिए १२वीं कक्षा कम्प्यूटर विषय के साथ ५० प्रतिशत अंको से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। बैचलर ऑफ कम्प्यूटर साइंस और मास्टर इन कम्प्यूटर साइंस के बाद भी चिप डिजाइनिंग कोर्स कर सकते हैं। चिप डिजाइनिंग कोर्स करने वाला सॉफ़्टवेयर इंजीनियर की तुलना में २० से २५ प्रतिशत अधिक आय अर्जित कर सकता है साथ ही अन्य डिग्री होल्डरों की तरह इन्हें नौकरी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। चिप लेवल इंजीनियर चाहे तो अपनी रिपेयरिंग शॉप भी खोल सकढता है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हार्डवेयर टेँनोलॉजी (आईआईएचटी) हार्डवेयर ट्रेनिंग के क्षेत्र में एक जाना पहचाना नाम है। इसकी शाखाएँ देश के सभी प्रमुख शहरों में है। इसमें बारहवीं कक्षा के बाद प्रवेश मिलता है। इसके अतिरिक्त कम्प्यूटर हार्डवेयर इंजीनियरिंग एवं कम्प्यूटर चिप लेवल इंजीनियरिंग का कोर्स कराने वाले प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान इस प्रकार हैं- - सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कम्प्यूटिंग (सी-डेक), नई दिल्ली, नोएडा, पुणे, बंगलौर, हैदराबाद, चेन्नई, तिरुवनंतपुरम और कोलकाता, वेबसाइट-www.cdaindia.com
- बिटमैपर इंटीग्रेशन टेक्नोलॉजी प्रायवेट लिमिटेड, पुणे।
- जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली, वेबसाइट-www.jmi.nic.in
- महात्मा गाँधी मेमोरियल कम्प्यूटर एजुकेशन, नई दिल्ली ।
- माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल (मध्यप्रदेश)वेबसाइट- www.mcrpu.com
- कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग,भोपाल (मध्यप्रदेश)
- आई.आई.टी.दिल्ली
- सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कम्प्यूटिंग (सी-डेक), नई दिल्ली
- दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, नई दिल्ली
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