बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) क्षेत्र में रोजगार के चमकीले अवसरबिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) सूचना प्रौद्योगिकी देन एक नई व्यापार व्यवस्था है, जिसके तहत किसी संगठन के व्यापारिक उत्पादक कार्यों को किसी बाहरी विक्रेता को हस्तांतरित कर उससे पूरा कराया जाता है। इसमें वितरण चूँकि आई.टी. आधारित होता है, इसलिए बीपीओ को सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाएँ भी कहा जाता है। सरल भाषा में हम यह भी कह कहते हैं कि बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग का मतलब है कोई कार्य व्यापारिक संस्थान के परिसर के बाहर देश या विदेश में कहीं भी उपयोगी रूप से सम्पन्न कराना। ऐसा आईटी के बढ़ते प्रभाव के चलते संभव हो सका है।
दरअसल, पश्चिमी और योरपीय देशों में श्रम काफी महँगा है, जिससे किसी भी सेवा की लागत बढ़ जाती है, जबकि वही कार्य भारत जैसे देश में कराने पर यह बेहद सस्ता पड़ता है। इसे हम एक उदाहरण से अच्छी तरह समझ सकते हैं। मान लीजिए कि अमेरिका में १०० पेजों की एक किताब की सामग्री टाइप कराने में प्रति पेज दस डॉलर का खर्च आता है, जबकि वही कार्य भारत जैसे देश में कराने पर एक डॉलर प्रति पेज से भी कम खर्च आता है। इस तरह की सेवाओं के लिए विकसित देशों मे मासिक वेतन के रूप में एक लाख रुपए से अधिक की डिमांड होती है, जबकि भारत में यह औसतन आठ-दस हजार रुपए मासिक वेतन देकर कराया जा सकता है। इस प्रकार कार्य की लागत में दस गुना का अंतर आ जाता है। अनुसंधान से पता चला है कि अमेरिका- ब्रिटेन में कॉल सेंटरों के संचालन में आने वाली करीब ७० प्रतिशत लागत का सीधा संबंध प्रशिक्षण, लाभ और अन्य श्रम प्रोत्साहनों सहित कर्मिकों पर आने वाली लागत के साथ है जबकि भारत में कार्मिकों से संबंधित लागत मात्र ३५ प्रतिशत के आसपास बैठती है।
सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सेवाओं को बाहरी एजेंसियों से कराने की प्रक्रिया कई वर्षों से अपनाई जा रही है, परंतु इंटरनेट और संचार प्रौद्योगिकी के उदय के साथ पिछले १० से १५ वर्षों में इनके प्रचलन में बहुत तेजी आई है। बड़ी संख्या में विभिन्न उद्योगों से संबद्ध बड़ी कंपनियों ने बीपीओ के लाभों पर विचार किया और अपने अनुषंगी व्यापारिक उत्पादक कार्यों का कुछ भाग बाहरी एजेंसियों को सौंपना शुरू कर दिया। इससे बड़ी कंपनियों की कार्यक्षमता में सुधार आया और लागत में भारी कमी आई। इस नई व्यापारिक संकल्पना के प्रचलन ने दुनियाभर में अनेक विशेषज्ञतापूर्ण बीपीओ सेवा प्रदान करने वालों को जन्म दिया।
गौरतलब है कि नोबे के दशक में जनरल इलेँट्रिक नामक अमेरिकी कंपनी ने यह निर्णय लिया कि प्रमुख व्यापारिक क्रिया-कलापों से इतर कुछ गतिविधियों और ग्राहक सेवा प्रक्रियाओं को भारत में स्थानांतरित करके महत्वपूर्ण लाभ उठाया जा सकता है। यह निर्णय लागत में कमी लाने और गुणवत्ता एवं उत्पादकता के ऊँचे मापदंड हासिल करने की दृष्टि से बड़ी कामयाबी के रूप में सामने आया। इस प्रयास की सफलता ने शेष विश्व को प्रेरित किया कि वह बाहरी संसाधनों (आउटसोर्सिंग) के लक्ष्य के रूप में भारत की संभावनाओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करे। परिस्थितियाँ अनुकूल होने के कारण भारत अंतरराष्ट्रीय बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग गतिविधियों के लिए प्रमुख केंद्र बन गया है। इन अनुकूल स्थितियों में भारतीयों की अच्छी अंग्रेजी और बेहतर उच्चारण, व्यापक कम्प्युतर साक्षरता, व्यक्तिगत खर्च में कमी, अनुकूल समय क्षेत्र और उच्च गुणवायुक्त कार्य शामिल हैं। इस तरह की सेवाएँ काफी गुणवत्ता के साथ संपन्न होने के कारण भारत विकसित देशों के बीच दिनों-दिन काफी लोकप्रिय होता जा रहा है।
अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, मैँसिको, ऑस्ट्रेलिया, फ्रढांस आदि देशों से बड़ी संख्या में काम मिलने के कारण भारत में कॉल सेंटर्स और सेवा प्रदाता कंपनियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। कुछ ही वक्त में इसने रोजगार प्रदान करने वाले प्रमुख क्षेत्रों के बीच स्थान बना लिया है। हाल ही में किए गए एक शोध के अनुसार अगले पाँच वर्षों के दौरान बीमा, बैंकिंग तथा वित्तीय क्षेत्र में करीब तीन लाख से ज्यादा योग्य प्रोफेशनलों की जरूरत होगी। हालांकि आईटी और बीपीओ की तरह इन सेवा क्षेत्रों में भी योग्य प्रोफेशनल्स की कमी महसूस की जा रही है। इतना ही नहीं, आने वाले वर्षों में बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग संबंधित गतिविधियों में भारी बढ़ोतरी होगी जिसके फलस्वरूप रोजगार के लाखों अवसर निर्मित होंगे।
वर्तमान में भारत आईटी आउटसोर्सिंग का वैश्विक केंद्र बन गया है। इसका कारण यह है कि भारत में अत्यंत कुशल एवं प्रशिक्षित कर्मियों का समूह उपलऒध है और यहाँ भली-भाँति परिभाषित व्यापार प्रक्रियाओं को बहुत तेजी से अपनाया जा रहा है। अनुकूल माहौल बनाने मे सरकार के सक्रिय सहयोग और ढाँचागत सुधारों की बीपीओ उद्योग के विकास में उत्प्रेरक भूमिका रही है। बीपीओ के क्षेत्र में भारत की प्रगति के पीछे एक कारण यह भी है कि हमारे यहाँ संचार का मजबूत ढाँचा कायम हो चुका है।
हाल ही में समुद्र में बिछाई गई भारत की पहली प्रायवेट केबल के चालू हो जाने से अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ स्थिति में जबरदस्त सुधार आया है। दूरसंचार उद्योग के निजीकरण से नई कंपनियाँ अस्तित्व में आई हैं और दूरसंचार की दरों में महत्वपूर्ण गिरावट आई है। उच्च कोटि की त्वरित सेवा, वर्ल्डँलास टेँनोलॉजी, बड़ी संख्या में आईटी एँसपर्ट और अंगे्जी में पारंगत युवाओं के अलावा सस्ता श्रम ये ऐसे कारण हैं, जिनकी बदोलत भारत विगत ड़े दशक से पूरे विश्व में बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग यानी बीपीओ के क्षेत्र में अव्वल बना हुआ है। नैस्कॉम का कहना है कि इस समय भारत में बीपीओ उद्योग का सालाना कारोबार २.३४ अरब डॉलर का है। वर्तमान समय में बीपीओ उद्योग के क्षेत्र में भारत दुनिया के हर बड़े देश के लिए बहुत बडा़ डेस्टिनेशन है।
भारत अंग्रेजी के अपने ज्ञान से बीपीओ और केपीओ (नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग) के क्षेत्र में सभी को पीछे छोड रहा है। इस क्षेत्र में बीमा, बैंकिंग, फार्मास्युटिकल्स, दूरसंचार, ऑटोमोटिव और एयरलाइंस का वर्चस्व है । बीमा एवं बैंकिंग ऐसे क्षेत्र हैं जो भारी मात्रा में बचत राशि हासिल करने में सिर्फ इसलिए कामयाब रहे हैं कि वे अपनी प्रक्रियाओं का बड़ा हिस्सा बाहरी एजेंसियों को सौंप सकते हैं। वे कॉल सेंटरों के जरिए दावे और ऋण प्रोसेस करने तथा ग्राहकों को सेवाएँ प्रदान करने जैसे कार्य संचालित कर रहे हैं।
बीपीओ के अंतर्गत निम्न सेवाएँ सम्मिलित की जाती हैं- १. कॉल सेंटर- इन सेवाओं के अंतर्गत तकनीकी सहायता और हेल्प डेस्क विशेषताएँ शामिल हैं। २. विपणन सेवाएँ- इसकढे अंतर्गत टेली मार्केटिंग की गतिविधियाँ आती हैं। इसके अंतर्गत उन ग्राहकों को सेवाएँ प्रदान करना है, जो फोन पर ऑर्डर देते हैं । ३. मानव संसाधन सेवाएँ- इसमें शिक्षा, प्रशिक्षण, भर्ती, कार्मिक प्रशासन, आकस्मिक श्रमिक प्रबंधन सम्मिलित है। ४. इंजीनियरी सेवाएँ- इनके अंतर्गत किसी उत्पाद या सेवा के निर्माण के लिए तकनीकी परामर्श प्रदान किया जाता है। इन कार्यों में अनुसंधान एवं विकास, उत्पाद डिजाइन, परीक्षण परियोजना प्रबंधन, प्रलेखन और इंजीनियरी विश्लेषण शामिल हैं। ५. लॉजिस्टिँस या संभार तंत्र- इन सेवाओं में भुगतान प्रक्रिया, इन्वोइस एकत्रित करना, ढुलाई, मार्ग अनुकूलन, वेयर हाउसिंग और स्टॉक नियंत्रण सेवाएँ शामिल हैं। ६. स्वास्थ्य देखभाल- इस उद्योग की शुरुआत मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन सेवाओं से हुई है और इसकी परिणति रोग प्रबंधन एवं मेडिकल इमेजिंग जैसी सेवाओं में हो रही है। बीपीओ और सेवा क्षेत्र में शीघ्र और अच्छी नौकरी पाने के लिए प्रशिक्षण की जरूरत होती है, ताकि बीपीओ कंपनी में क्वालिटी वर्क किया जा सके। जिस देश के लिए सर्विस प्रोवाइड करना है, वहीं की भाषा और शैली मे काम करना होता है, इसलिए सही उच्चारण और कार्यशैली के लिए पर्याप्त् ट्रेनिंग की जरूरत होती है। चूँकि भारत की परंपरागत शिक्षा पद्धति और सरकारी क्षेत्र में इन नए क्षेत्रों के बारे में कुछ पढ़ाया नहीं जाता और किसी तरह की ट्रेंनिंग उपलब्ध नहीं है, इसलिए इस दिशा में निजी क्षेत्र द्वारा ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। इस तरह के प्रयास हीरो माइंडमाइन, अकिको कालनेट जैसी संस्थाओं द्वारा भी किए जा रहे हैं। इनके द्वारा दो माह से लेकर एक वर्ष तक के कोर्स चलाए जा रहे हैं । छात्रों का रूझान जैसा होता है, उसे उसी के अनुरूप ट्रेनिंग बारहवीं या ग्रेजुएशन के बाद दी जा सकती है। यदि स्टूडेंट अंडर ग्रेजुएट के दौरान इस तरह का कोर्स करते हैं, तो यह उनके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। इसका कारण यह है कि डिग्री कोर्स के साथ-साथ उनकी ट्रेनिंग भी पूरी हो जाएगी और इसके तुरंत बाद वे नौकरी ज्वाइन कर सकते हैं इस तरह उनका अतिरिक्त समय नष्ट नहीं होता है। बीपीओ से संबंधित पाठ्यक्रम करने के उपरांत रोजगार के काफी चमकीले अवसर मौजूद हैं। आईबीएम जैसी बड़ी व मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी की शुरुआत २० हजार रुपए प्रतिमाह की सैलरी से होती है जबकि डोमेस्टिक कंपनियों में ५ से १० हजार रुपए से शुरुआत हो सकती है। दक्षता और अनुभव बढ़ने के साथ सैलरी में भारी वृद्धि होती जाती है।
ट्रेनिंग देने वाले प्रमुख संस्थान निम्न हैं-
- स्मार्ट टॉक-सिनर्जी इन्फोसोल्युशन्स २०१-२०३, आश्रम कॉम्प्लेँस, छप्पन दुकान के पीछे न्यू पलासिया, इंदौर
- इस्सेंट ई- सर्विसेज प्रायवेट लि., वेबसाइट- www.iscentglobal.com
- इन्फोविजन, वेबसाइट- www.infovisiongroup.com
- ग्लोबल वनटेज, ईमेल एड्रेस- hr@gvedge.com
- हीरो माइंडमाइन, इंदौर