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विदेशी भाषाओं में कॅरियर

वैश्वीकरण के वर्तमान दौर में जहाँ विभिन्न देशों के बीच की दूरियाँ और सीमाएँ सिमटकर रह गई हैं, वहीं विदेशी भाषाओं की जानकारी रोजगार के बेहतरीन अवसर मुहैया करा रही है। यही वजह है कि आज छात्रों को परंपरागत विषयों से हटकर विदेशी भाषा का अध्ययन ज्यादा लुभा रहा है। वर्षों से बड़ी संख्या में छात्र विदेशी भाषाओं, विशेषकर फ्रेंच, जर्मन और रूसी भाषा में कुशलता अर्जित कर रहे हैं। आजकल चीन, जापान और इजरायल सहित अनेक देशों के साथ भारत अपने व्यापार संबंधों का विस्तार कर रहा है। ऐसे में इन देशों की भाषाओं का ज्ञान रखने वाले लोगों की बड़ी संख्या में जरूरत महसूस की जा रही है।

गौरतलब है कि फ्रेंच भाषा मौजूदा समय में अंग्रेजी के बाद विश्व की सर्वाधिक लोकप्रिय भाषा बन गई है। इस भाषा को अंग्रेजी के जानकार बेहद सरलता से सीख सकते हैं क्योंकि यह भाषा अंग्रेजी से काफी कुछ मिलती-जुलती है। फ्रेंच भाषा के बाद जर्मन भाषा का क्रम आता है। जर्मन भाषा को 'अवसरों की भाषा` भी कहा जाता है। जर्मन भाषा, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया व स्विट्जरलैंड आदि देशों में लगभग १० करोड़ लोगों द्वारा बोली व समझी जाती है। यही वजह है कि जर्मन भाषा सीखने वालों में भारतीयों की संख्या भी तेजी से बढ़ती जा रही है। जब से जापान का विश्व के अन्य देशों के साथ व्यापार और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है तब से जापानी भाषा के विशेषज्ञों की माँग भी बढ़ी है। इस भाषा के बढ़ते महत्व ने इसे रोजगारपरक भाषा बना दिया है। जो छात्र जापानी भाषा सीखना चाहते हैं, उन्हें अंग्रेजी का मूलभूत ज्ञान होना अति आवश्यक है। भारत व रूस के मैत्रीपूर्ण घनिष्ठ संबंधों के कारण रूसी भाषा के प्रति भारतीयों का लगाव कई दशक पहले से ही है। इसके अतिरिक्त चीन के साथ भारत के बढ़ते व्यापार को देखते हुए चीनी भाषा के क्षेत्र में भी कॅरियर की उजली संभावनाएँ हैं।

विदेशी भाषा से संबंधित पाठ्यक्रम मुंयत: तीन प्रकार के हैं- प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम, डिप्लोमा पाठ्यक्रम और डिग्री पाठ्यक्रम । प्रमाणपत्र और डिग्री पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए १०+२ परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है, लेकिन ज्यादातर स्थानों पर डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए पात्रता मापदंड संबद्ध भाषा में प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम है। छात्रों को किसी भी विदेशी भाषा कोर्स में एडमिशन लेने से पूर्व सभी भाषाओं के विषय में अच्छी तरह से जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए और जो भाषाएँ वैश्वीकरण के दौर की महत्वपूर्ण भाषाएँ हैं और जो रोजगारोन्मुखी हैं उनकी ओर विद्यार्थियों ने कदम बढ़ाने चाहिए । कई बार ऐसा होता है कि छात्र-छात्राएँ भाषा पाठ्यक्रम में एडमिशन तो ले लेते हैं लेकिन बाद में उन्हें उस संबंधित भाषा को सीखने में कई दिक्कतो का सामना करना पड़ता है।

विदेशी भाषा सीखने और धन कमाने के लिए उसका इस्तेमाल करना, दोनों अलग-अलग चीजें हैं। किसी विदेशी भाषा के जरिए आजीविका अर्जित करने के लिए आपको संबंधित विदेशी भाषा की पत्र-पत्रिकाएँ और पुस्तकें आदि पढ़ने के माध्यम से निरंतर भाषा प्रयोग के संपर्क में रहना होता है। इसके अतिरिक्त संबद्ध भाषा बोलने वाले अन्य लोगों से भी संपर्क बनाए रखना होगा। ताकि आप भाषा बोलने के कढौशल में सुधार कर सकें और भाषा के सूक्ष्म पहलुओं को समझ सकें । इन पहलुओं की जानकारी भाषा बोलने और उसमें वार्तालाप के जरिए ही हासिल की जा सकती है इसलिए विदेशी भाषा में कोई भी पाठ्यक्रम पत्राचार के माध्यम से नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे संबद्ध विदेशी भाषा पर मजबूत पकड़ नहीं बन पाती है। बेहतर है कि आप नियमित पाठ्यक्रम को ही चुनें।

विदेशी भाषा में रोजगार की बात करें तो विदेशी भाषा सीखकर आप अनुवादक या दुभाषिया बन सकते हैं। अनुवादक के कार्य में लिखित सामग्री का अनुवाद करना शामिल है। जो सामान्य पत्राचार, अनुदेश, तकनीकी डाटा, कैढटलॉग, राजनीतिक भाषण या पुस्तकढों के रूप में हो सकता है। दूसरी ओर दुभाषिए का काम थोड़ा कठिन होता है। उसे तत्कढाल एक भाषा का दूसरी भाषा में सही-सही अनुवाद करना पड़ता है। इसके लिए स्रोत भाषा की अधिक गहन जानकारी आवश्यक होती है तथा संबंधित विदेशी भाषा का उच्चारण भी सही-सही आना चाहिए। विदेशी भाषा में रोजगार की संभावना इस बात पर ज्यादा निर्भर करती है कि आपके भीतर अभिव्यक्ति की क्षमता कितनी है ? विदेशी भाषा की पढ़ाई करने के बाद छात्र दुभाषिया तथा अनुवादक के अतिरिक्तढ टूरिस्ट गाइड, अध्यापन, विभिन्न एयरलाइंस में भी कॅरियर बना सकते हैं। इसके अलावा आप स्वतंत्र लेखन, अनुवाद संस्थाओं, शोध संस्थाओं, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, विदेशी कंढपनियों व पुस्तक प्रकाशन में पर्याप्त रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। इस क्षेत्र में रोजगार के ढ़ेरों अवसर विद्यमान हैं। आप होटल और पर्यटन उद्योग, जनसंचार और मनोरंजन, वाणिज्य, व्यापार और औद्योगिक घराने, दूतावास और राजनयिक क्षेत्र में भी अच्छा कॅरियर प्राप्त कर सकते हैं। विदेशी भाषा कोर्स करने के उपरांत विदेशों में भी कॅरियर के काफी उजले अवसर विद्यमान हैं।

आप इन विश्वविद्यालयों/ संस्थानों से विदेशी भाषाओं के विभिन्न पाठ्यक्रम कर सकते हैं-

  • दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली- यहाँ फ्रेंच, जर्मन, स्पैनिश, अरबी, इटैलियन, चीनी, तिऒबती, सुहाली, फारसी, पोलिश, बुल्गारियन आदि भाषाओं में रोजरागोन्मुखी पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।
  • जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय,नई दिल्ली- यहाँ से आप अरबी, फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश, चीनी, रूसी, पुर्तगाली, सिंहली, मंगोलियन, जापानी आदि भाषाओं में कोर्स कर सकते हैं।
  • राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर- यहाँ से जर्मन, फ्रेंच, रूसी इत्यादि भाषाओं में कोर्स कर सकते हैं।
  • मुंबई विश्वविद्यालय मुंबई- यहाँ चीनी तथा जापानी भाषा में डिग्री पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।
  • विश्व भारती, शांति निकेतन, कोलकाता- यहाँ से चीनी तथा जापानी भाषा में प्रमाणपत्र और डिप्लोमा पाठ्यक्रम किया जा सकता है।
  • पुणे विश्वविद्यालय, पुणे- यहाँ जापानी भाषा में प्रमाणपत्र और डिप्लोमा पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।

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