वैश्वीकरण एवं उदारीकरण के वर्तमान दौर में बीमा क्षेत्र कॅरियर निर्माण हेतु काफी उज्जवल क्षेत्र माना जा रहा है। नई यूपीए सरकार के द्वारा बीमा कानून (संशोधन) विधेयक २००८ के तहत बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा २६ फीसदी से बढ़ाकर ४९ फीसदी किए जाने की संभावनाओं ने बीमा क्षेत्र में कॅरियर की डगर को चमकीला बनाया है। अमेरिका तक में जिन पाँच प्रमुख कॅरियर विकल्पों का बोलबाला है उसमें बीमा क्षेत्र भी शामिल है।
कुछ वर्षों पहले तक भारतीय बीमा क्षेत्र में सरकारी कंपनियों का एकाधिकार था परंतु निजी क्षेत्र को बीमा की अनुमति मिलने के बाद एक ओर जहाँ बाजार में अवसर बढ़े हैं, वहीं दूसरी ओर लोगों को पसंदीदा सेवा चुनने की स्वतंत्रता भी मिल गई है। वर्तमान समय में भारतीय बाजार में विभिन्न प्रकार की सेवाओं के साथ कई बहुराष्ट्रीय और जिनी कंपनियाँ बीमा कारोबार को नया आयाम दे रही हैं।
भारत में बीमा क्षेत्र को खुला बनाए जाने से सरकारी एवं निजी बीमा कंपनियों में आकर्षक नौकरियों के अलावा कई संबद्ध अवसर भी इस क्षेत्र में पैदा हुए हैं । कॅरियर के लिहाज से अपार संभावनाओं वाला यह क्षेत्र जनसंपर्क क्षमताओं की परीक्षा लेने वाला है, अर्थात यदि आपमें लोगों से संपर्क बनाने के गुर और उन्हें अपनी बातों से प्रभावित करने की क्षमता है, तो कॅरियर की असीम ऊँचाइयाँ लिए बीमा क्षेत्र आपका इंतजार कर रहा है। बीमा क्षेत्र में जो प्रमुख रोजगार अवसर हैं, वे इस प्रकार हैं-
एल.आई.सी. एजेंट- भारतीय जीवन बीमा निगम विश्व का सबसे बड़ा बीमा कंपनी है । भारतीय जीवन बीमा निगम (एल.आई.सी.) का बीमा कारोबार एक बार फिर से उफान पर है। हाल ही के वर्षों में एल.आई.सी. के प्रीमियम में आई तेजी ने पूरे जीवन बीमा क्षेत्र को भारी लाभ पहुँचाया है। प्रीमियम में बढ़ोतरी की वजह से बाजार में एलआईसी की हिस्सेदारी बढ़कर ५८.६७ फीसदी हो गई है। ऐसे भारतीय जीवन बीमा निगम में एजेंट (अभिकर्ता) बनकर मानवता की सेवा के साथ-साथ उम्मीदवार उच्चस्तरीय जीवनशैली भी प्राप्त कर सकता है। एल.आई.सी. एजेंट बनने हेतु न्यूनतम आयु १८ वर्ष निर्धारित है । शैक्षणिक योग्यता के अंतर्गत शहरी क्षेत्र हेतु बारहवीं कक्षा तथा ग्रामीण क्षेत्र में बीमा एजेंट बनने हेतु दसवीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। साथ ही एल.आई.सी. से संबंधित कार्यों की १०० घंटे की ट्रेनिंग लेनी होती है तथा आय.आर.डी.ए. द्वारा आयोजित परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक है। एजेंट को उसके कार्य में निपुणता लाने के लिएएल.आई.सी. तथा विकास अधिकारी द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे प्रभावी एवं त्वरित बीमा सेवा प्रदान कर सकें । जहाँ तक एल.आई.सी. एजेंट की आय की बात की जाए तो उसकी आय की कोई सीमा नहीं होती है। वह जितना ज्यादा बीमाकरेगा उसकी आय उतनी ही ज्यादा बढ़ती जाएगी। एक बार बीमा करने पर उसे लगातार उसी बीमा पॉलिसी पर जब तक वह बीमा पॉलिसी कार्यशील रहती है उसे कमीशन प्राप्त होता रहता है।
एल.आई.सी. सहायक प्रशासनिक अधिकारी- एल.आई.सी. में सहायक प्रशासनिक अधिकारी बनने हेतु आयु सीमा २० से ३० वर्ष के मध्य निर्धारित है। एल.आई.सी. में सहायक प्रशासनिक अधिकारी बनने हेतु किसी भी विषय के साथ स्नातक या स्नातकोत्तर परीक्षा ५५ प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण होनी चाहिए । इस हेतु होने वाली प्रतियोगी परीक्षा में भी सफलता होना होता है।
जनरल इंश्योरेंस एजेंट- वर्तमान में सरकारी क्षेत्र में चार कंपनियाँ ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड तथा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड जनरल इंश्योरेंस कंपनियाँ कहलाती हैं। इन कंपनियों में जनरल इंश्योरेंस एजेंट बनने हेतु न्यूनतम आयु सीमा १८ वर्ष निधारित है तथा शहरी क्षेत्रों हेतु बारहवीं तथा ग्रामीण क्षेत्रों हेतु दसवीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसके साथ ही जनरल इंश्योरेंस से संबंधित कार्यों की १०० घंटे की ट्रेनिंग तथा आय.आर.डी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। यदि कोई पहले से ही एल.आई.सी एजेंट भी है तो उसे केवल २५ घंटे की ट्रेनिंग ही लेना पड़ती है। एल.आई.सी एवं जी.आई.सी. का संयुक्त लायसेंस भी बन जाता है। वाहन, मेडिक्लेम, पर्सनल, एँसीडेंट, हाउसहोल्ड पॉलिसी, शॉपकीपर फायर पॉलिसी, थेऍट एवं डकैती, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, ऑल रिस्क, ब्रेक डाउन पॉलिसी, मशीनरी ब्रेक डाउन आदि पालिसियाँ जनरलइंश्योरेंस के एजेंट करते हैं ।
सर्वेयर- बीमा कराए गए किसी कारोबार में हानि का मूल्यांकन करने का काम सर्वेयर करते हैं। ये वास्तविक हानि का मूल्यांकन करते हैं, झूठे दावों को रोकते हैं तथा बीमा कंपनी व बीमित के बीच की कड़ी होते हैं। अभिकर्ता की तरह ये कंपनी के कर्मचारी नहीं होते अपितु स्वतंत्र व्यवसायी होते हैं। सर्वेयर बनने हेतु इंजीनियरिंग में डिग्री या डिप्लोमा/आईसीडऒल्यूएआई/सी.ए./विज्ञान में स्नातक उपाधि आवश्यक है। सर्वेयर बनने हेतु एक वर्ष का प्रशिक्षण किसी वरिष्ठ सर्वेयर या सर्वेयर फर्म के साथ आवश्यक है। उसके बाद एक परीक्षा उत्तीर्ण करना होती है। तदुपरांत उन्हें लायसेंस जारी किया जाता है, तत्पश्चात वे किसी एक कंपनी अथवा अनेक कंपनियों से संबद्ध हो सकते हैं।
इसके अतिरिक्त सरकारी एवं निजी बीमा कंपनियों में क्रेडिट कार्ड एजेन्ट, बीमा विशेषज्ञ, एँचुअरी, आदि में भी उज्ज्वल करियर बनाया जा सकता है। बीमा क्षेत्र में करियर बनाने हेतु पहले प्रशिक्षण देने वाले संस्थानों का अभाव था लेकिन आज अनेक संस्थान इसका बाकायदा प्रशिक्षण देने लगे हैं। इंश्योरेंस से जु़डे पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अनिवार्य योग्यता स्नातक है। इंश्योरेंस के क्षेत्र में जो प्रमुख पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, वे इस प्रकार हैं- पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन इंश्योरेंस, पीजी डिप्लोमा इन इंश्योरेंस मैनेजमेंट एंड मार्केटिंग, एम.बी.ए. इन इंश्योरेंस आदि। इन पाठ्यक्रमों को करने के उपरांत सार्वजनिक एवं निजी बीमा कंपनियों में विभिन्न प्रतिष्ठापूर्ण पदों पर नियुक्त हुआ जा सकता है।
बीमा क्षेत्र से संबंधित पाठ्यक्रम कराने वाले प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं-