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लॉ के क्षेत्र में रोजगार के चमकीले अवसर

लॉ के क्षेत्र में कॅरियर के लिहाज से आज बहुत उजली संभावनाएँ हैं। अब न्यायिक प्रक्रिया से जुडना सामाजिक ही नहीं, पैसे और रुतबे के नजरिए से भी महत्वपूर्ण हो गया है। ग्लोबलाइजेशन और उसके बाद समाज में आए सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों के बाद तो नए कानूनों के बनने में इतनी तेजी आई है कि लॉ से जुडे अच्छे विशेषज्ञों की कमी सी हो गई है। नए रोजगार सर्वेक्षण इंगति कर रहे हैं कि भारतीय लॉ ग्रेजुएट्स की माँग देश में ही नहीं दुनिया के विकसित और विकासशील देशों में भी है।

लॉ के क्षेत्र में किसी भी कॅरियर के लिए एलएल.बी. की डिग्री अनिवार्य है। गौरतलब है कि एक दशक पहले तक लॉ की शिक्षा सामान्य रूप से तीन वर्ष के एलएल.बी. कोर्स के रूप में होती थी। पहले स्नातक डिग्री के उपरांत ही लॉ की पढ़ाई की जा सकती थी। लॉ में स्नातकोत्तर (एलएलएम) की अवधि दो वर्ष की है। इसमें दाखिला लेने की न्यूनतम योग्यता एलएल.बी. की डिग्री है। पिछले कुछ समय से पाँच वर्षीय नया लॉ पाठ्यक्रम उभरकर सामने आया है। यह पाठ्यक्रम विशेष रूप से बारहवीं शिक्षा पूरी कर चुके विद्यार्थियों के लिए है। वर्तमान में सामान्य विश्वविद्यालयों के साथ-साथ विशेषज्ञता वाले लॉ विश्वविद्यालय भी इस पाँच वर्षीय प्रणाली के अंर्तगत लॉ विषय की शिक्षा प्रदान कर रहे है। कम उम्र में ही लॉ की शिक्षा के बारे में फैसला करने के पीछे औचित्य विधि के व्यवसाय में गहरी रुचि रखने वाले होनहार छात्रों को इस ओर आकृष्ट करना है। छोटी आयु में ही रोजगार एवं आजीविका की दिशा तय हो जाने से ऐसे छात्र पेशेवर दृष्टि से बेहतर तरीके से ढल सकेंगे। कौशल पर आधारित शिक्षा प्राप्त् करने में उनमें उच्च कोटि की तकनीकी क्षमता विकसित होगी और वे अधिक लगन एवं मेहनत से काम करेंगे।

पाँच साल के समन्वित लॉ पाठ्यक्रम के लिए राष्टरीय स्तर के विभिन्न लॉ विश्वविद्यालयों के द्वारा संचालित की जाने वाली प्रवेश परीक्षा का तरीका अलग-अलग हो सकता है लेकिन उन सबमें कुछ बातें एक जैसी है। हालाँकि लॉ के पाँच वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करने वाले विश्वविद्यालयों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है लेकिन बहुत से विश्वविद्यालय ऐसा कर रहे हैं। सभी लॉ विश्वविद्यालय अपने पाँच वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम में लिखित प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रवेश देते हैं। इस परीक्षा में शामिल होने के लिए शैक्षणिक योग्यता कम से कम पचास प्रतिशत अंकों के साथ बारहवीं परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी, भोपाल, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर,नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बंगलौर, नैलसार यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूडीशियल साइंसेज, कोलकाता अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के आधार पर प्रवेश देते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने के साथ-साथ इन प्रवेश परीक्षाओं में एक समानता यह भी है कि इनके प्रश्नपत्र भले ही एक समान न हों, मगर उनमें पर्याप्त् समानता दिखाई देती है। लॉ प्रवेश परीक्षा में अंग्रेजी भाषा में दक्षता के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा की समझ, सामान्य ज्ञान और समसामयिक घटनाओं की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जानकारी, संख्यात्मक अभियोग्यता, तर्क और विश्लेषण पर आधारित विवेचन और कानूनी दक्षता का आकलन किया जाता है। विभिन्न लॉ विश्वविद्यालयों द्वारा ली जाने वाली परीक्षा के प्रश्नों के रुझान में थोड़ा बहुत अंतर हो सकता है लेकिन अधिकतर मामलों में वस्तुनिष्ठ और संक्षिप्त् उत्तर वाले प्रश्न पूछे जाते हैं। विवरणात्मक किस्म के प्रश्नों में भी संक्षेप में उत्तर लिखने होते हैं। इसके अतिरिक्त निबंध या किसी समसामयिक विषय पर संक्षिप्त् टिप्पणी जैसे प्रश्न पूछे जा सकते हैं। प्रत्येक विश्वविद्यालय अपनी प्रवेश परीक्षा का तरीका बदलता रहता है ताकि परीक्षार्थी परीक्षा के बंधे बंधाए ढर्रे के अनुसार तैयारी न कर सकें। इस प्रकार से परीक्षा काफी प्रतिस्पर्धात्मक हो जाती है। इस तरह ऐसे विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में दाखिले की संभावना अधिक होती है, जो इस बारे में गंभीर हैं।

इसमें कोई दोमत नहीं हैं कि आज व्यक्तिगत जीवन में ही नहीं, कंपनी और संगठन के स्तर पर भी कानूनी सलाहकारों की जरूरत बढ़ी है। कानून के विभिन्न क्षेत्रों जैसे सिविल लॉ, कार्पोरेशन लॉ, क्रिमिनल लॉ, इंटरनेशनल लॉ, पेटेंट लॉ, टेँस लॉ, लेबर लॉ, एडमिनिस्ट्रेटिव लॉ, संवैधानिक लॉ आदि में विशेषज्ञता हासिल कर रोजगार पाया जा सकता है। एलएल.बी. की डिग्री के साथ कई शिक्षण संस्थान लॉ के कई सहायक कोर्स भी चलाते हैं, ये डिप्लोमा कोर्स के तौर पर संचालित किए जाते हैं। इनके तहत इंटरनेशनल लॉ, सायबर लॉ, पेटेंट एंड कॉपीराइट लॉ लेबर लॉ, टेँस लॉ आदि के डिप्लोमा कोर्स की विशेष माँग है।

इंटरनेशनल लॉ- इंटरनेशनल लॉ का अर्थ होता है अंतरराष्ट्रीय कानून। इसके तहत विभिन्न राष्ट्रों के रहवासियों एवं व्यवसायियों के साथ-साथ राष्ट्रीय हितों के मध्य उत्पन्न होने वाली समस्याओं को इस कानून के द्वारा सुलझाया जाता है। इस क्षेत्र में करियर के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी उजले अवसर विद्यमान हैं।

सायबर लॉ- वर्तमान युग सूचना प्रौद्योगिकी का है। अत: वर्तमान समय में इंटरनेट एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र को रेग्यूलेट करने हेतु जिस लॉ की आवश्यकता होती है उसे सायबर लॉ कहते हैं। जीवन में सूचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रभाव के कारण इस क्षेत्र में रोजगार के असीमित अवसर हैं। पेंटेट एंड कॉपीराइट लॉ- विभिन्न उत्पादों के पेटेंट एवं कॉपीराइट की समस्याओं के समाधान हेतु इस लॉ की आवश्यकता होती है। इस क्षेत्र में करियर के चमकीले अवसर हैं।

लेबर लॉ- कर्मचारियों के अधिकार एवं उनकी समस्याओं के समाधान के लिए लेबर लॉ बनाया गया है। इस क्षेत्र में भी रोजगार की उजली संभावनाएँ हैं।

टेँस लॉ- विभिन्न प्रकार के उद्योग व्यापारों के दौरान विभिन्न प्रकार की कर समस्याओं एवं अन्य प्रकार की वैयँतिक टेँस समस्याओं का समाधान टेँस लॉ एँसपर्ट्स करते हैं। कॉर्पोरेट क्षेत्रों में टेँस लॉ विशेषज्ञों की खासी माँग है।

सिविल जज परीक्षा- लॉ को कॅरियर के रूप में चुनने वाले अधिकांश विद्यार्थियों का सपना होता है न्यायिक सेवा परीक्षा में चयनित होकर सिविल न्यायाधीश का पद प्राप्त् करना। सिविल न्यायाधीश (सिविल जज) का पद वर्तमान में काफी प्रतिष्ठापूर्ण पद है। इसमें धनोपार्जन के साथ ही साथ सम्मान, प्रतिष्ठा एवं उन्नति के काफी उजले अवसर विद्यमान हैं। देश के सभी राज्यों में सिविल जज परीक्षा आयोजित की जाती है।

सिविल जज के प्रतिष्ठापूर्ण पद के अतिरिक्त वकीलों को संघ लोक सेवा आयोग द्वारा उनके अनुभव के आधार पर केंद्रीय सेवाओं में भी नियुँत किया जाता है। केंद्रीय स्तर पर लॉ ऑफिसर, लीगल एडवाइजर, डिप्टी लीगल एडवाइजर आदि के पद हैं। राज्यों में राज्य पुलिस, राजस्व एवं न्यायिक विभागों में वकीलों की नियुक्ति की जाती है। विभिन्न स्तर के अधीनस्थ न्यायालयों में न्यायिक दंडाधिकारी, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सब मजिस्ट्रेट, लोक अभियोजक, एडवोकेट जनरल, नोटरी एवं शपथ पत्र आयुक्त के पद उपलब्ध हैं। इनके अतिरिँत वकील फर्मों, संस्थानों और परिवार के लिए कानूनी सलाहकार के रूप में कार्य कर सकता है। यदि कोई अधिवँता के रूप में वकालत की प्रैँटिस करना चाहता है तो उसे संबंधित स्टेट बार काउंसिल को निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करना होता है। कई प्राइवेट प्रैँटिस करने वाले प्रतिमाह लाखों में कमाते हैं। कॉर्पोरेट घरानों और कंपनियों से जुडे वकीलों का भी वेतन आकर्षक होता है। सरकारी स्तर पर जजों तथा अन्य लॉ सेवकों का वेतन, वेतन आयोग द्वारा निर्धारित है। इसी तरह सॉलीसिटर, पऒलिक डिफेंडर, अटार्नी जनरल, एडवोकेट जनरल और डिस्ट्रिक अटॉर्नी जैसे पद भी पाए जा सकते हैं। कई जगह कंपनी सेकेटरी के रूप में और लॉ रिपोर्ट लिखने हेतु राइटर की भूमिका में भी रोजगार पाया जा सकता है। शिक्षण और रक्षा सेवा में भी जाने के विकल्प इस पेशे में हैं।

लॉ के क्षेत्र में विभिन्न कोर्स कराने वाले प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं-

  • जवाहरलाल नेहरू, यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
  • सिमबायोसिस जनसंचार संस्थान, सेनापति बापत र्माग, पुणे
  • नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, पोस्ट बॉँस ७२०१, नागरभवी, बंगलौर
  • फैकल्टी ऑफ लॉ, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
  • आईएलएस, लॉ कॉलेज रोड, पुणे
  • नेशनल लॉ कॉलेज, भोपाल
  • देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर

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