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ऐसे करें मध्यप्रदेश राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा-२००९ की तैयारी

मध्यप्रदेश राज्य सेवा परीक्षा के माध्यम से उच्च प्रशासनिक पद की प्राप्ति बड़ी संख्या में युवाओं का एक कॅरियर स्वप्न होता है। वे युवा जो अत्यधिक प्रतिस्पर्धा के कारण सिविल सर्विस परीक्षा में चयनित नहीं हो पाते हैं या जिनका उद्देश्य राज्य में रहकर ही प्रशासनिक सेवा की डगर पर ब़ढ़ना होता है, वे परिश्रम, आत्मविश्वास और सुनियोजित तैयारी से राज्य के विभिन्न तरह के प्रशासनिक पदों पर चयनित हो सकते हैं। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा १८ अप्रैल, २०१० को ली जाने वाली मध्यप्रदेश राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा-२००९ नए पैटर्न एवं नए सिलेबस के आधार पर आयोजित की जा रही है। मध्यप्रदेश राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा-२००९ में दो वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्र होंगे। पहला प्रश्नपत्र सामान्य अध्ययन का एवं दूसरा प्रश्नपत्र ऐच्छिक विषय का होगा । सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र में १५० वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएँगे, जिनके कुल पूर्णांक १५० निधारित हैं जबकि ऐच्छिक विषय के प्रश्नपत्र में १२० वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएँगे जिनके कुल ३०० अंक निधारित हैं।

उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा के बारे में कई उम्मीदवारों की यह धारणा है कि यह बहुत कठिन परीक्षा है और इसमें चयनित होने के लिए प्रतियोगी का केवल मेधावी होना जरूरी है। सामान्य मानसिक स्तर वाले विद्यार्थी इसमें सफल होने की संभावना कम रखते हैं लेकिन यह धारणा पूर्णत: गलत है। इस परीक्षा में मेधावी छात्रों के साथ-साथ वे सभी छात्र-छात्राएँ सफलता की एक जैसी ही संभावनाएँ रखते हैं जो परिश्रम, सुनियोजित तैयारी और अच्छे अध्ययन संदर्भों को आधार बना लेते हैं। नि:संदेह यदि प्रारंभ से ही तैयारी की रणनीति बना ली जाए और अच्छी पुस्तकों तथा पत्रिकाओं को अध्ययन का आधार बना लिया जाए तो पहले दिन से ही सफलता की संभावनाएँ आपकी मुट्ठी में समा जाती हैं। अधिकतर प्रतियोगी सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र के लिए चिंतित तो रहते हैं लेकिन सुनियोजित रूप से वे उसकी तैयारी नहीं करते हैं। नि:संदेह सामान्य अध्ययन की तैयारी पर बहुत ध्यान दिया जाना चाहिए। सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र को दस खंडों में बाँटा गया है, जो निम्न हैं-

  • सामान्य विज्ञान एवं पर्यावरण।
  • राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएँ।
  • भारत का इतिहास एवं स्वतंत्र भारत।
  • भारत का भूगोल एवं विश्व की सामान्य भौगोलिक जानकारी।
  • भारतीय राजनीति एवं अर्थव्यवस्था।
  • खेलकूद।
  • मध्यप्रदेश का भूगोल इतिहास तथा संस्कृति।
  • मध्यप्रदेश की राजनीति एवं अर्थव्यवस्था।
  • सामान्य मानसिक योग्यता।
  • सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी।

राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाओं की तैयारी में प्रतियोगियों को चाहिए कि वे केवल राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व की राजनीतिक घटनाओं को ही इस खंड की तैयारी में शामिल न करें अपितु चर्चा में रहने वाले विभिन्न विषयों पर भी ध्यान दें।

मध्यप्रदेश राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा-२००९ के सामान्य अध्ययन खंड में भारतीय इतिहास तथा संस्कृति से संबंधित कई प्रश्न पूछे जाते हैं। इसकी तैयारी हेतु इतिहास को तीन भागों यथा प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत तथा आधुनिक भारत में बाँटा जा सकता है। प्राचीन भारतीय इतिहास को तीन कालावधियों में विभक्त किया जा सकता है- प्रागैतिहासिक काल, आद्यैतिहासिक काल तथा ऐतिहासिक काल । प्रागैतिहासिक काल व आद्य-ऐतिहासिक काल से प्रश्न प्राय: महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों व वहाँ प्राप्त वस्तुओं पर आधारित होते हैं। ऐतिहासिक काल में मुख्यत: सामाजिक सांस्कृतिक पहलू पर ध्यान देना होता है। इसमें भी विशेष रूप से सामाजिक परिवर्तन, शिक्षा के स्रोत, कला एवं स्थापत्य तथा धार्मिक जीवन का विकास। इस अवधि के राजनीतिक इतिहास का भी अध्ययन करना चाहिए। मध्यकालीन भाग से इतिहास के साथ-साथ संस्कृति से भी अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं । इस काल के साहित्य, चित्रकला व स्थापत्य शैली तथा तकनीकी उपलब्धि की विस्तृत सूची बनाकर रखनी चाहिए। आधुनिक इतिहास सबसे महत्वपूर्ण तथा सर्वाधिक अंकदायी भाग है, अत: इस पर विशेष ध्यान केंद्रित करना चाहिए। स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण घटनाओं का अध्ययन आवश्यक है।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र के अंतर्गत भारतीय राजनीति की तैयारी में संविधान संशोधन के महत्वपूर्ण तथ्यों एवं उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का अध्ययन लाभप्रद होता है । प्रारंभिक परीक्षा में परम्परागत तथा संविधान के विकास से संबंधित दोनों तरह के कई प्रश्न पूछे जाते हैं । राजव्यवस्था के अंतर्गत मानवाधिकार, राज्य के नीति निदेशक तत्व, मूल कर्तव्य, कार्यपालिका, आर्थिक प्रक्रिया जैसे बजट (विभिन्न प्रकार के विधेयक जैसे वित्त विधेयक, धन विधेयक आदि), न्यायपालिका विशेषत: सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय के अधिकार (उनके ऐतिहासिक विकास सहित), संघ व राज्यों के बीच संबंध, प्रशासनिक अधिकरण, चुनाव व चुनाव सुधार, आपातकालीन प्रावधान, संविधान संशोधन, पंचायती राज व्यवस्था इत्यादि से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए इन खंडों को विशेष रूप से तैयार करें ।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र में सामान्य विज्ञान एवं पर्यावरण एक महत्वपूर्ण खंड है। सामान्य विज्ञान एवं पर्यावरण में भौतिकी, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान तथा पर्यावरण एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। भूगोल खंड में भूगोल से संबंधित प्रश्न होते हैं। इनमें भूकंप के बुनियादी लक्षण, दुनिया के जलवायु क्षेत्र, बंदरगाह, ज्वार-भाटा, नदियाँ, बहुउद्देशीय परियोजनाएँ, सिंचाई, फसलें आदि मुख्य होते हैं। भूगोल की तैयारी के संबंध में एक विशेष बात है मानचित्र की जानकारी। मोटे तौर पर परीक्षार्थियों को मानचित्र पर विभिन्न महत्वपूर्ण, स्थानों, पर्वतों, नदियों, झीलों की स्थिति के बारे में जानकारी होना चाहिए। मध्यप्रदेश की भौगोलिक जानकारी से जु़डे प्रश्न भी बहुतायात में पूछे जाते हैं।

सामान्य अध्ययन का एक और महत्वपूर्ण खंड है अर्थव्यवस्था। इसके लिए प्रतियोगी को भारतीय व विश्व अर्थव्यवस्था में हुई पहल व विकास का समीक्षात्मक विश्लेषण करना चाहिए। इसके अन्तर्गत अर्थव्यवस्था की प्रकृति, पूँजी निर्माण, राष्ट्रीय आय, आय वितरण, भारत में नियोजन, भारत का विदेश व्यापार, भुगतान संतुलन, मुद्रास्फीति, भारत में बैंकिंग प्रणाली, राजकोषीय ढाँचा, संरचनात्मक सुधार, खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, औद्योगिक नीति, औद्योगिक रुग्णता तैयारी के मुख्य बिंदु हो सकते हैं।

सामान्य अध्ययन के नए पाठ्यक्रम में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी भी सम्मिलित की गई है। विगत वर्ष इस खंड से बहुत बड़ी संख्या में प्रश्न पूछे गए थे। अत: इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित विभिन्न शब्दों का अर्थ तथा कम्प्यूटर के विभिन्न भागों के कार्यों, हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर की जानकारी भी बेहद जरूरी है। इस भाग की तैयारी हेतु आप बेसिक कम्प्यूटर की किताबों का सहारा भी ले सकते हैं।

सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र की तैयारी हेतु सबसे पहले एनसीईआरटी की वे पुस्तकें जो ११वीं और १२वीं कक्षाओं में पाठ्यक्रम में निर्धारित हैं राज्य सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए पढ़ी जानी चाहिए। इनमें भारतीय इतिहास, भूगोल, राजनीतिक व्यवस्था, अर्थशास्त्र, आर्थिक नियोजन, संविधान और विज्ञान की पुस्तकें अत्यधिक महत्वपूर्ण अध्ययन संदर्भ हैं। सामान्य ज्ञान की ऐसी बुनियादी तैयारी के साथ-साथ प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी हेतु उपलब्ध स्तरीय मासिक पत्रिकाओं का अध्ययन आवश्यक होता है। चूँकि सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र में मध्यप्रदेश से संबंधित ढ़ेरों प्रश्न पूछे जाते हैं। अत: मध्यप्रदेश के सामान्य ज्ञान की भी विशेष तैयारी जरूरी है। सामान्य अध्ययन की तैयारी के लिए जहाँ एक ओर भारत सरकार के प्रकाशन- योजना, कुरुक्षेत्र, मध्यप्रदेश सरकार के प्रकाशन- पंचायिका, मध्यप्रदेश संदेश, रोजगार और निर्माण, स्तरीय मासिक पत्रिकाएँ- मध्यप्रदेश सामान्य ज्ञान केंद्रीत प्रतियोगिता निर्देशिका, सामान्य ज्ञान दर्पण, काम्पीटिशन सक्सेस रिव्यू आदि उपयोगी हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ विशिष्ट पुस्तकें भी लाभप्रद हैं। ये पुस्तकें हैं- इतिहास हेतु- प्राचीन भारत का इतिहास झा एवं श्रीमाली, भारत का इतिहास- रोमिला थापर, मध्यकालीन भारत- डॉ. आशीर्वादी लाल, आधुनिक भारत का इतिहास- बी.एल. ग्रोवर, भारत का स्वतंत्रता संग्राम- डॉ. विपिनचंद्र। संविधान एवं राजव्यवस्था हेतु- भारत का संविधान- डी.डी.बसु । भूगोल हेतु- भारत का भूगोल- गोपालसिंह, सी.बी. मामोरिया। अर्थव्यवस्था हेतु- भारतीय अर्थव्यवस्था-दास एवं सुंदरम्, भारतीय अर्थव्यवस्था मिश्र एवं पुरी । इसके अलावा भारत- २०१० तथा मनोरमा ईयर बुक २०१० का अध्ययन भी काफी लाभप्रद होगा।

वे सभी प्रतियोगी जो आगामी मध्यप्रदेश राज्य सेवा परीक्षा के माध्यम से राज्य सेवा के प्रतिष्ठित पद पर चयनित होने का सपना संजो रहे हैं उन्हें चाहिए कि वे परिश्रम और आत्मविश्वास के संकल्प के साथ राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा-२००९ की तैयारी करें। यदि पूरे मनोयोग से तैयारी करेंगे तो सफलता अवश्य ही मिलेगी।


ऐसे करें मध्यप्रदेश राज्य सेवा मुख्य परीक्षा की तैयारी

नवंबर २००९ में आयोजित होने वाली मध्यप्रदेश राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में सफलता के लिए मध्यप्रदेश राज्य सेवा मुख्य परीक्षा की प्रकृति को समझना एवं प्रश्नपत्रों के बारे में सुनियोजित तैयारी बेहद जरूरी है। गौरतलब है कि राज्य सेवा मुख्य परीक्षा वर्णनात्मक शैली में होती है। मध्यप्रदेश राज्य सेवा मुख्य परीक्षा के सभी प्रश्नपत्रों की अवधि ३ घंटे होती है। निर्धारित अवधि में अभ्यर्थी को प्रश्नपत्रों के उत्तर देना होते हैं। सामान्य अध्ययन के तीनों (हिन्दी सहित) प्रश्नपत्र सभी के लिए अनिवार्य होते हैं। वैकल्पिक विषय का प्रश्नपत्र अभ्यर्थी द्वारा चुना जाता है। प्रश्नपत्रों की भाषा वह चुनें जिसमें आप सहजता से लिख सकते हों, समझ सकते हों, दूसरों को समझा सकते हों और वहीं आदर्श भाषा माध्यम है। उसी भाषा माध्यम में आप बेहतर अभिव्यक्ति कर सकते हैं और बेहतर अभिव्यक्ति ही आपको सफलता दिलाने में सक्षम होती है। मुख्य परीक्षा में सही भाषा माध्यम का चयन अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। अत: ध्यान रखें भाषा माध्यम का चयन किसी के कहने पर, किसी के सुझाव पर नहीं करके स्वेच्छा से गहन चिंतन के बाद करना चाहिए। इस भ्रांति से हमेशा दूर रहना चाहिए कि अंग्रेजी भाषा माध्यम अधिक अंक दायिनी है या अंग्रेजी भाषा माध्यम टॉपर्स की भाषा होती है। यह निराधार है। अंक सिर्फ आपके उत्तरों के प्रस्तुतिकरण पर निर्भर करते हैं। मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए अधिक समय की माँग रहती है, यदि आप देरी से अपनी तैयारी प्रारंभ करेंगे, तो ठीक तरह से तैयारी करना मुमकिन नहीं हो पाएगा।

समय प्रबंधन- मध्यप्रदेश राज्यसेवा मुख्य परीक्षा में सफलता प्राप्त करने की रणनीति का सबसे अहम् विषय समय का प्रबंधन करना है। तैयारी प्रारंभ करने से पूर्व आप अपने समय का प्रबंधन करें, ताकि नियत समय पर सभी प्रश्नपत्रों की तैयारी की जा सके। समय के प्रबंधन के बिना सफला प्राप्त करना बहुत ही कठिन है । समय के प्रबंधन के लिए सबसे पहले आप तैयारी प्रारंभ करने के दिन से लेकर मुख्य परीक्षा तक के कुल दिनों को परीक्षा के सात प्रश्नपत्रों में विभाजित कर प्रत्येक प्रश्नपत्र के लिए प़ाई के दिन तय करें। सभी प्रश्नपत्रों की तैयारी के लिए समय का उचित प्रबंधन अवश्य करें।

लेखन एवं शब्द सीमा का अभ्यास- मध्यप्रदेश राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में आपके लेखन की बहुत बड़ी भूमिका होती है। लेखन में सुंदर हस्तलेखन, सटीक तार्किक अभिव्यक्ति एवं शब्द सीमा का ख्याल रखा जाना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। आपने कितनी भी अच्छी तरह से परीक्षा की तैयारी की हो, यदि आप बेहतर ढंग से अभिव्यक्ति नहीं कर सकते, तो सच मानिए आपकी विफलता इसी में निहित है। अत: राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में प्रविष्ट होने वाले अभ्यर्थी अपनी तैयारी प्रारंभ करने के दौरान नियमित लेखन का अभ्यास अवश्य करें। जो सोचते हैं कि पहले पढ़ लेते हैं अंतिम एक-दो दिन लेखन का अभ्यास करने के लिए रख लेंगे, तो वे सर्वथा भूल करते हैं, क्योंकि लेखन के अभ्यास के बिना पूरी तैयारी व्यर्थ हो जाएगी।

अब समझ लीजिए यदि आपको एकदम सही, सटीक उत्तर देना है, तो लेखन का अभ्यास करना होगा। यदि हम राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में सफलता की दृष्टि से भी बात करें, तो ५० प्रतिशत भूमिका अच्छे अंक दिलाने में सिर्फ लेखन की होती है। इसके साथ ही शब्द सीमा में उत्तर लिखने का प्रयास करें। यदि शब्द सीमा का ध्यान न रखा जाए तो आप कितना ही अच्छा लिखें, आप सफलता नहीं प्राप्त कर सकते हैं। नियमितता से अधिक अच्छा सफलता का सहज उपाय नहीं हो सकता। नियमित तैयारी में स्वाध्याय, नोट्स बनाना, लेखन का व्यवस्थित तरीके से अभ्यास करना, पूर्व वर्षों के प्रश्नपत्रों से गहनता से रूबरू होना इत्यादि गतिविधियों को जारी रखें।

जिस तरह नियमितता आवश्यक है, ठीक उसी तरह पढ़ी गई पाठ्यवस्तु का दोहराना अत्यावश्यक होता है अन्यथा कई बार ऐसा होता है कि आप आगे तैयारी करते चलते हैं और पीछे भूलते जाते हैं, अंतत: परिणाम नगण्य होता है। अत:आप किसी भी तरह न्यूनतम अवधि में दोहराने के कार्यक्रम को अवश्य व्यवस्थित करें। अंत में सफलता के लिए जो सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, वह है परीक्षा के कुछ दिन पूर्व अपना स्वयं का आकलन करें, इससे आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी । आकलन के लिए राज्य सेवा मुख्य परीक्षा के पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को आधार मानकर मॉडल पेपर तैयार करें और उसको निर्धारित अवधि में हल करें। अंत में निष्कर्ष निकालें कि आपकी स्थिति क्या है? जो खामियाँ रह गई हैं उन पर ध्यान केंद्रित कर उन्हें दूर करने का प्रयास करें। जो खामियाँ रह जाती हैं उन्हें छिपाने के बजाय महसूस करते हुए उन पर विशेष ध्यान दें। फिर देखिए आपको मनचाही सफलता प्राप्त करने से कौन रोक सकता है ?

प्रामाणिक पाठ्य सामग्री- मुख्य परीक्षा की तैयारी में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप प्रामाणिक पाठ्य-सामग्री का अध्ययन करें । मुख्य परीक्षा में प्रविष्ट होने वाले अभ्यर्थी विशेषकर अपने वैकल्पिक विषयों की पाठ्य सामग्री के चयन में सर्वथा सावधानी बरतें । इस घोर प्रतिस्पर्धा और विज्ञापन वाले युग में आपके लिए सबसे जटिल समस्या प्रामाणिक पाठ्य सामग्री के चयन की है। प्रतियोगी परीक्षाओं की मासिक पत्रिका कॉम्पीटीशन सक्सेस रिव्यू, सामान्य ज्ञान दर्पण तथा मध्यप्रदेश सामान्य ज्ञान पर केंद्रित प्रतियोगिता निर्देशिका का नियमित अध्ययन आवश्यक है। प्रतिदिन दो प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्रों (विशेष रूप से संपादकीय पृष्ठ) का अवलोकन करें।

सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्रों के तहत जो भी प्रश्न पूछे जाते हैं, वे कुछ हद तक तथ्यात्मक तो होते ही हैं, साथ ही वे काफी हद तक परिकल्पनात्मक एवं विचारात्मक भी होते हैं। यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि इस खंड के कई प्रश्न वर्तमान संदर्भ में ही पूछे जाते हैं। अत: अभ्यर्थियों को यह चाहिए कि वे जिस किसी भी प्रश्न का उत्तर लिख रहे हों, उस प्रश्न को वे वर्तमान परिप्रेक्ष्य में ही लिखने का प्रयास करें तथा अपने उत्तर को पूरी सामयिकता प्रदान करें। आपको सदैव व्यावहारिक एवं समसामयिक संदर्भ में ही अपना उत्तर लिखने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि आपके उत्तर प्रासंगिकता एवं नवीनता प्राप्त् कर सकें। स्पष्ट है कि आपसे जो भी प्रश्न पूछे जाएँगे, वे तथ्यात्मक होने के साथ-साथ विचारात्मक भी होंगे। अत: ऐसे प्रश्नों का उत्तर लिखते समय आपको पूर्णत: व्यावहारिक एवं प्रासंगिक दृष्टि कोण अपनाना होगा, ताकि आप अच्छे अंक प्राप्त् कर सकें। साथ ही, आपको चाहिए कि आप अपने उत्तर में नवीनतम जानकारियाँ एवं आँकड़े भी जरूर डालें (आँकड़े मानक होने चाहिए), जो कि आपके उत्तर को और भी अधिक प्रामाणिकता एवं प्रासंगिकता प्रदान करने वाले होते हैं।

यह सच है कि सामान्य अध्ययन का पाठ्यक्रम काफी व्यापक है और इसके संपूर्ण अध्ययन के लिए अभ्यर्थियों को सदैव जागरूक एवं सचेष्ट रहने की जरूरत है। सामान्य अध्ययन एक निरंतर प्रक्रिया है, जिस पर अपनी पकड़ मजबूत बनाने के लिए आपको सतत् रूप से इससे संपर्क साधना होगा । यदि आप अपने अंदर कुछ जिज्ञासा बनाए रखते हैं तथा सदैव कुछ नए की तलाश में रहते हैं, तो आप चाहे-अनचाहे ही सामान्य अध्ययन की तैयारी करते रहते हैं। जिन अभ्यर्थियों में ऐसी जिज्ञासा अथवा कौतूहल होती है, वे सामान्य अध्ययन के प्रति काफी सहजता महसूस करते हैं। ऐसी स्थिति में, वे अन्य अभ्यर्थियों से कहीं अधिक लाभ की स्थिति में होते हैं। आपको यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि सामान्य अध्ययन प्रश्न-पत्र में अभ्यर्थियों के बीच अंकों का अंतर काफी अधिक देखा गया है और यदि आप इसकी तैयारी के प्रति संतुलित एवं व्यावहारिक रुख अपनाते हैं तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है।

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