पबलिक रिलेशन में कॅरियर विश्व के बदलते परिदृश्य में आज सुनियोजित और प्रभावकारी ढंग से संचालित संगठनों की सफलता और यहाँ तक कि उनके अस्तित्व के लिए भी पबलिक रिलेशन (जनसंपर्क) अनिवार्य हो गया है। न केवल सरकारी, सहकारी, निजी, राजनीतिक , शैक्षिक , धार्मिक संस्थाओं के लिए अपितु व्यक्ति विशेष के प्रचार-प्रसार के लिए भी पबलिक रिलेशन महत्वपूर्ण विधा बनकर उभर रहा है । इसी से संबद्ध है पबलिक रिलेशन ऑफिसर का पद। अगर आप में अपनी बात दूसरों तक पहुँचाने और अपनी बात को मनवाने की क्षमता है तो यह मान लें कि पबलिक रिलेशन ऑफिसर का पद आप ही के लिए बना है ।
किसी कंपनी के पबलिक रिलेशन ऑफिसर (पी.आर.ओ.) का जॉब बेहद ही रूचिकर होता है। इसके अंतर्गत न सिर्फ अपनी कंपनी की इमेज ही मार्केट में बनानी होती है बल्कि अपनी कंपनी की उन्नति, सुविधाएँ, क्षेत्र के विषय में भिन्न-भिन्न मैग्जीन, न्यूज पेपर, इलेँट्रॉनिक मीडिया तथा संबंधित कार्पोरेट ब्रॉशर आदि द्वारा लोगों तक जानकारियाँ भी पहुँचानी होती हैं। पबलिक रिलेशन ऑफिसर को प्रेस और जनता से जानकारी संबंधी कॉलों के उत्तर देने होते हैं। उन्हें निमंत्रण सूचियों और प्रेस सम्मेलनों के ब्यौरा तैयार करने संबंधी कार्य, आगन्तुकों और ग्राहकों के स्वागत, अनुसंधान में सहायता, सूचना प्रपत्र लिखने, संपादकीय कार्यालयों में विज्ञप्तियाँ भेजने और मीडिया वितरण सूचियाँ तैयार करने जैसे कार्य करने होते हैं ।
ज्यादातर लोगों का यह मानना है कि पबलिक रिलेशन ऑफिसर अभिव्यक्ति में निपुण और रचनाशील व्यक्ति होते हैं । परंतु पबलिक रिलेशन ऑफिसरों का स्वयं यह मानना है कि इस क्षेत्र में दबाव के समय सही निर्णय लेने की क्षमता बहुत जरूरी है। एक बेहतर पबलिक रिलेशन ऑफिसर होने के नाते उसे नए-नए और अन्य कंपनियों से मजबूत रिलेशनशिप बनाने के तरीके आने चाहिए। क्रिएटिव विचार, प्रेजेंस ऑफ माइंड, डायनेमिक पर्सनेलिटी तथा अंग्रेजी व प्रादेशिक भाषा का ज्ञान उसे अवश्य होना चाहिए। पबलिक रिलेशन ऑफिसर को उस प्रतिष्ठान के प्रति समर्पित होना चाहिए जिससे वह संबद्ध होता है। उसके लिए कार्यालय का बंधा-बंधाया समय कोई महत्व नहीं रखता। उसका हर क्षण उसके प्रतिष्ठान की उन्नति को समर्पित होता है। पबलिक रिलेशन ऑफिसर का संयमशील, शांत स्वभाव,दूरदर्शी, मिलनसारिता और हंसमुख होना अत्यावश्यक है। आकर्षक व्यक्तित्व का मालिक होना तो जैसे सोने पे सुहागा है। पबलिक रिलेशन ऑफिसर को इस हद तक चुस्त-दुरूढस्त होना चाहिए कि वह हर किसी तक उसके प्रतिष्ठान या हस्ती की काबिलियत पहुँचा सके ।
आज बहुत से पत्रकारों ने बदलाव के विकल्प के रूप में पबलिक रिलेशन कार्य को अपनाया है। बड़ी संख्या में स्नातक ऐसे हैं, जो पत्रकारिता के लिए निकलते हैं, परंतु उन्हें पबलिक रिलेशन में भारी भरकम सफलता मिल जाती है। किसी भी विषय से स्नातक करने के उपरांत आप मास कम्युनिकेशन/पबलिक रिलेशन/मैनेजमेंट या एडवरटाइजिंग में मास्टर डिग्री या डिप्लोमा कोर्स कर इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं । उक्त पाठ्यक्रम करने के उपरांत आप पबलिक रिलेशन/कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन/कॉर्पोरेट अफेयर्स/बड़ी कंपनियों के एँसटर्नल अफेयर्स डिपार्टमेंट में स्वतंत्र रूप से पबलिक रिलेशन कंसल्टेंट का काम कर सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न सरकारी एजेंसियों, सेल्स, मैनेजमेंट, कंसल्टेंट ऑर्गेनाइजेशन, ट्रेवल एंड टूरिज्म ऑर्गेनाइजेशन, इवेन्ट मैनेजमेंट तथा बड़े एन.जी.ओ. आदि में भी पबलिक रिलेशन ऑफिसर या कंसल्टेंट के रूप में कार्य कर इस क्षेत्र में शिखर पर पहुँच सकते हैं। पबलिक रिलेशन संबंधी ज्यादातर पाठ्यक्रम पत्रकारिता या जनसंचार संस्थानों द्वारा भी संचालित किए जाते हैं ।
पाठ्यक्रम संबंधी कार्य के अतिरिक्त प्रतिष्ठित पबलिक रिलेशन प्रतिष्ठानों में व्यावहारिक अनुभव या प्रशिक्षण भी महत्वपूर्ण होता है । पबलिक रिलेशन से जु़डे पाठ्यक्रमों में मीडिया ऑफ पबलिक रिलेशंस, प्रोडँशन एंड मीडिया कम्युनिकेशन आदि प्रमुख घटक हैं । आमतौर पर इन पाठ्यक्रमों की अवधि एक से दो वर्ष होती है । वैसे भी पबलिक रिलेशन ऑफिसर के लिए पाठ्यक्रम से ज्यादा उसके अपने अनुभव महत्व रखते हैं। उसे मीडिया के तौर-तरीकों की अच्छी जानकारी होनी चाहिए । इन पाठ्यक्रमों में प्रचार-प्रसार और संपर्क की शिक्षा तो दी ही जाती है, साथ ही प्रभावी पाठ्यक्रम बिजनेस हाउस जरनल, बुलेटिन, पत्रिकाएँ, वार्षिक रिपोर्ट, फोल्डर आदि तैयार करने तथा प्रकाशित कराने का भी ज्ञान दिलाते हैं। आज का परिवेश प्रचार-प्रसार का है इसलिए पबलिक रिलेशन ऑफिसर के लिए नौकरी के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं। आज सभी सरकारी, सहकारी, निजी संस्थाएँ पबलिक रिलेशन ऑफिसरों को अच्छा वेतन देती हैं ।
पाठ्यक्रम संबंधी कार्य के अतिरिक्त प्रतिष्ठित पबलिक रिलेशन प्रतिष्ठानों में व्यावहारिक अनुभव या प्रशिक्षण भी महत्वपूर्ण होता है । पबलिक रिलेशन से जु़डे पाठ्यक्रमों में मीडिया ऑफ पबलिक रिलेशंस, प्रोडँशन एंड मीडिया कम्युनिकेशन आदि प्रमुख घटक हैं । आमतौर पर इन पाठ्यक्रमों की अवधि एक से दो वर्ष होती है । वैसे भी पबलिक रिलेशन ऑफिसर के लिए पाठ्यक्रम से ज्यादा उसके अपने अनुभव महत्व रखते हैं। उसे मीडिया के तौर-तरीकों की अच्छी जानकारी होनी चाहिए । इन पाठ्यक्रमों में प्रचार-प्रसार और संपर्क की शिक्षा तो दी ही जाती है, साथ ही प्रभावी पाठ्यक्रम बिजनेस हाउस जरनल, बुलेटिन, पत्रिकाएँ, वार्षिक रिपोर्ट, फोल्डर आदि तैयार करने तथा प्रकाशित कराने का भी ज्ञान दिलाते हैं। आज का परिवेश प्रचार-प्रसार का है इसलिए पबलिक रिलेशन ऑफिसर के लिए नौकरी के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं। आज सभी सरकारी, सहकारी, निजी संस्थाएँ पबलिक रिलेशन ऑफिसरों को अच्छा वेतन देती हैं । पबलिक रिलेशन में स्नातकोत्तर उपाधि / डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करने वाले प्रमुख विश्वविद्यालय/मीडिया संस्थान इस प्रकार हैं-
- पबलिक रिलेशन और विज्ञापन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली में उपलब्ध है ।
- पबलिक रिलेशन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली में उपलब्ध है।
- पबलिक रिलेशन में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ जर्नलिज्म कम्यूनिकेशन, पुणे में उपलब्ध है ।
- एम.बी.ए.इन पबलिक रिलेशन एंड मास कम्युनिकेशन पाठ्यक्रम देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर में उपलब्ध है ।
- पबलिक रिलेशन, विज्ञापन और प्रबंधन में एम.ए. पाठ्यक्रढम माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय,भोपाल में उपलब्ध है ।