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टेली कम्युनिकेशन के क्षेत्र में कॅरियर के उजले अवसर





टेलीफोन का आविष्कार करने वाले ग्राहम बेल ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उसका यह आविष्कार समूचे विश्व को इतना करीब ला देगा कि हम हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोगों से पलभर में जु़ड जाएँगे। वर्तमान समय की बात करें तो टेलीफोन वर्तमान समाज की वह अहम जरूरत बन चुका है, जिसके बिना आपसी संबंधों को जिंदा रख पाना मुमकिन नहीं जान पड़ता। भारत की बात की जाए तो गाँव-गाँव में टेलीफोन एवं मोबाइल के पहुँचने से आज हर सुख-दु:ख में हम सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे अपनों को करीब पाते हैं।

संचार एक ऐसा माध्यम है, जो आम आदमी की हर जरूरत को पूरा करता नजर आ रहा है। जहाँ बेसिक फोन घर की चार दीवारी में उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करते हैं, वहीं मोबाइल (सेल्यूलर) फोन हर कदम पर हमारा साथी बनकर उभरा है। यही कारण है कि आज के दौर में तेजी से विकसित हो रही टेलीकॉम इंडस्ट्री के संचालन के लिए न केवल तकनीकी बल्कि मैनेजमेंट व मार्केटिंग में प्रशिक्षित युवाओं की भारी माँग है। टेलीकॉम इंडस्ट्री में निजी क्षेत्र के प्रवेश करने के बाद से युवाओं में इस क्षेत्र की औपचारिक शिक्षा प्राप्त् करने का रूझान भी बहुत बढ़ गया है।

जिस तेज रफ्तार से इस क्षेत्र का विकास हुआ है, उसी तेजी से देश के प्रशिक्षण संस्थानों में टेलीकॉम इंडस्ट्री की माँग के अनुसार प्रोफेशनल्स तैयार करने के लिए नए-नए कोर्स शुरू हुए हैं। आज आप टेलीकॉम इंडस्ट्री में जाने के लिए बीटेक इन इलेट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन, बी.एस.सी. इन टेलीकम्युनिकेशन, पीजी डिप्लोमा इन मोबाइल एंड ऑप्टिकल टेक्नोलॉजी जैसे कोर्स कर सकते हैं। इसके अलावा एमबीए टेलीकॉम जैसे कोर्स तो इस इंडस्ट्री की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ही डिजाइन किए गए हैं। इसमें ७० प्रतिशत प़ाई प्रबंधन और ३० प्रतिशत पढ़ाई टेलीकॉम इंजीनियरिंग से संबंधित होती है। इन कोर्सों के अलावा टेलीकॉम में एमटेक, एमई आदि कोर्स भी उपलब्ध हैं। बीई, बीटेक कोर्स चार वर्षीय हैं, जबकि एमई, एमटेक और एमबीए दो वर्षीय कोर्स हैं। हालाँकि कुछ समय पहले तक टेलीकॉम इंडस्ट्री में बीटेक इलेट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन की माँग बहुत अधिक थी, लेकिन टेलीकॉम के स्पेशलाइज्ड कोर्सों के आ जाने से कंपनियों का रूझान इन कोर्सों से प्रशिक्षित युवाओं की ओर बढ़ा है।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो बीटेक और बीई कोर्स के लिए गणित एवं भौतिकी के साथ बारहवीं, एमबीए इन टेलीकम्युनिकेशन और पीजी डिप्लोमा इन मोबाइल और ऑप्टिकल टेक्नोलॉजी के लिए विज्ञान या इंजीनियरिंग में स्नातक, एमई और एमटेक पाठ्यक्रमों के लिए संबंधित क्षेत्र में बीई और बीटेक होना जरूरी है। तीन साल के टेलीकम्युनिकेशन के डिप्लोमा पाठ्यक्रम हेतु दसवीं कक्षा गणित विषय के साथ उत्तीर्ण होना आवश्यक है।

मैनेजमेंट और डिप्लोमा कोर्सों के अलावा सभी टेली कम्युनिकेशन कोर्सों के विषय लगभग समान ही होते हैं। बीटेक,बीई में एनालॉग और डिजिटल कम्युनिकेशन, मल्टीमीडिया एवं डाटा कम्युनिकेशन, नेटवर्किंग, ऑप्टिकल कम्युनिकेशन, मॉडयूलेशन टेक्निक आदि विषय पढ़ाए जाते हैं। मास्टर डिग्री में छात्रों को स्पेशलाइज्ड सब्जेक्टस की जानकारी दी जाती है। सॉफ्टवेयर निर्माण, नेटवर्किंग, मेंटेनेंस, मैनेजमेंट, कस्टमर रिलेशन, रिसर्च एवं डेवलपमेंट आदि के विषय में भी जानकारी दी प्रदान की जाती है। जहाँ तक टेलीफोन उपकरणों की असेंबलिंग का सवाल है तो इसकी थोड़ी बहुत जानकारी डिप्लोमा स्तर के शॉर्ट टर्म कोर्सों में भी दी जाती है।

टेलीकॉम इंडस्ट्री में जिस तेजी से तरक्की हो रही है, उसी तेजी के साथ युवाओं के लिए बेहतर भविष्य की राह भी खुल रही है। अनुमानों के अनुसार अगले तीन सालों में इस इंडस्ट्री को तीन लाख से ज्यादा योग्य तथा प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत पड़ने जा रही है। सरकारी क्षेत्र की कंपनियों में बीएसएनएल, एमटीएनएल, वीएसएनएल के विकल्प उपलब्ध हैं, जबकि गैर सरकारी कंपनियों की बात करें तो नौकरियों के विकल्प केवल उन्हीं कंपनियों में ही उपलब्ध नहीं हैं जो सर्विस उपलब्ध कराती हैं, बल्कि उन कंपनियों में भी अच्छे कॅरियर विकल्प हैं, जो विभिन्न प्रकार के टेलीफोनिक उपकरण और मशीनरी का निर्माण करती हैं। विभिन्न कंपनियों के टेलीकॉम डिपार्टमेंट और सरकारी व निजी क्षेत्रों में ट्रेनी, प्रोजेक्ट मैनेजर, जूनियर इंजीनियर, सिस्टम इंजीनियर, ऑपरेशन हेड आदि के रूप में काम कर सकते हैं। इसके अलावा रेलवे, पुलिस और सेना के टेलीकॉम विभाग में भी रोजगार की संभावनाएँ हैं।

जो विद्यार्थी इस क्षेत्र में शिक्षण कार्य को प्राथमिकता देते हैं, उनके लिए शिक्षा व्यवसाय में भी अपार संभावनाएँ हैं। टेलीकॉम इंजीनियरिंग कॉलेजों में यूजीसी वेतनमानों पर शिक्षक, प्रोफेसर, प्रिंसिपल आदि के पद होते हैं। टेलीकॉम कंपनियाँ भी बतौर सलाहकार व प्रशिक्षणार्थी के पद प्रदान करती हैं और विभिन्न सुविधाओं के साथ अच्छा वेतन भी देती हैं। टेलीकॉम सेँटर में स्वरोजगार की भी उजली संभावनाएँ हैं। टेलीफोन एवं मोबाइल फोन रिपेयरिंग का कोर्स करने के उपरांत थोड़ी-सी पूँजी के साथ मोबाइल एवं टेलीफोन रिपेयरिंग का स्वरोजगार भी प्रारंभ किया जा सकता है और अच्छी आमदनी प्राप्त् की जा सकती है। इसके लिए बैंक से ऋण की भी सुविधा उपलब्ध है।

मध्यप्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में टेली कम्युनिकेशन का बैचलर डिग्री पाठ्यक्रम उपलब्ध है। इसमें प्रवेश एमपी पीईटी परीक्षा के माध्यम से दिया जाता है। एमपी पीईटी परीक्षा में देश के सभी राज्यों के विद्यार्थी शामिल हो सकते हैं। एमपी पीईटी के द्वारा प्रायवेट कॉलेजों में भरी जाने वाली ८५ प्रतिशत सीटें ओपन नेशनल मेरिट के आधार पर निर्धारित होती हैं।

टेली कम्युनिकेशन का कोर्स कराने वाले देश के प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं-

  • भारती स्कूल ऑफ टेलीकम्युनिकेशन एंड मैनेजमेंट, आईआईटी कैम्पस, नई दिल्ली।
  • एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेलीकॉम टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, नोएडा।
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, खडग़पुर।
  • बिडल़ा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, राँची।
  • बंगलुरु, इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बंगलुरू।
  • पुणे विश्वविद्यालय, पुणे।
  • मुंबई विश्वविद्यालय, मुंबई।
  • यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, चंडीगढ़।
  • मध्यप्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेज।

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