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    <category>Law</category>
    <item>
      <title>लॉ के क्षेत्र में रोजगार के चमकीले अवसर</title>
      <pubDate>6/11/2010</pubDate>
      <description>&lt;p&gt;लॉ के क्षेत्र में कॅरियर के लिहाज से आज बहुत उजली संभावनाएँ हैं। अब न्यायिक प्रक्रिया से जुडना सामाजिक ही नहीं, पैसे और रुतबे के नजरिए से भी महत्वपूर्ण हो गया है। ग्लोबलाइजेशन और उसके बाद समाज में आए सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों के बाद तो नए कानूनों के बनने में इतनी तेजी आई है कि लॉ से जुडे अच्छे विशेषज्ञों की कमी सी हो गई है। नए रोजगार सर्वेक्षण इंगति कर रहे हैं कि भारतीय लॉ ग्रेजुएट्स की माँग देश में ही नहीं दुनिया के विकसित और विकासशील देशों में भी है। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;लॉ के क्षेत्र में किसी भी कॅरियर के लिए एलएल.बी. की डिग्री अनिवार्य है। गौरतलब है कि एक दशक पहले तक लॉ की शिक्षा सामान्य रूप से तीन वर्ष के एलएल.बी. कोर्स के रूप में होती थी। पहले स्नातक डिग्री के उपरांत ही लॉ की पढ़ाई की जा सकती थी। लॉ में स्नातकोत्तर (एलएलएम) की अवधि दो वर्ष की है। इसमें दाखिला लेने की न्यूनतम योग्यता एलएल.बी. की डिग्री है। पिछले कुछ समय से पाँच वर्षीय नया लॉ पाठ्यक्रम उभरकर सामने आया है। यह पाठ्यक्रम विशेष रूप से बारहवीं शिक्षा पूरी कर चुके विद्यार्थियों के लिए है। वर्तमान में सामान्य विश्वविद्यालयों के साथ-साथ विशेषज्ञता वाले लॉ विश्वविद्यालय भी इस पाँच वर्षीय प्रणाली के अंर्तगत लॉ विषय की शिक्षा प्रदान कर रहे है। कम उम्र में ही लॉ की शिक्षा के बारे में फैसला करने के पीछे औचित्य विधि के व्यवसाय में गहरी रुचि रखने वाले होनहार छात्रों को इस ओर आकृष्ट करना है। छोटी आयु में ही रोजगार एवं आजीविका की दिशा तय हो जाने से ऐसे छात्र पेशेवर दृष्टि से बेहतर तरीके से ढल सकेंगे। कौशल पर आधारित शिक्षा प्राप्त् करने में उनमें उच्च कोटि की तकनीकी क्षमता विकसित होगी और वे अधिक लगन एवं मेहनत से काम करेंगे। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;पाँच साल के समन्वित लॉ पाठ्यक्रम के लिए राष्टरीय स्तर के विभिन्न लॉ विश्वविद्यालयों के द्वारा संचालित की जाने वाली प्रवेश परीक्षा का तरीका अलग-अलग हो सकता है लेकिन उन सबमें कुछ बातें एक जैसी है। हालाँकि लॉ के पाँच वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करने वाले विश्वविद्यालयों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है लेकिन बहुत से विश्वविद्यालय ऐसा कर रहे हैं। सभी लॉ विश्वविद्यालय अपने पाँच वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम में लिखित प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रवेश देते हैं। इस परीक्षा में शामिल होने के लिए शैक्षणिक योग्यता कम से कम पचास प्रतिशत अंकों के साथ बारहवीं परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी, भोपाल, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर,नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बंगलौर, नैलसार यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूडीशियल साइंसेज, कोलकाता अखिल भारतीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं के आधार पर प्रवेश देते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने के साथ-साथ इन प्रवेश परीक्षाओं में एक समानता यह भी है कि इनके प्रश्नपत्र भले ही एक समान न हों, मगर उनमें पर्याप्त् समानता दिखाई देती है। लॉ प्रवेश परीक्षा में अंग्रेजी भाषा में दक्षता के साथ-साथ अंग्रेजी भाषा की समझ, सामान्य ज्ञान और समसामयिक घटनाओं की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जानकारी, संख्यात्मक अभियोग्यता, तर्क और विश्लेषण पर आधारित विवेचन और कानूनी दक्षता का आकलन किया जाता है। विभिन्न लॉ विश्वविद्यालयों द्वारा ली जाने वाली परीक्षा के प्रश्नों के रुझान में थोड़ा बहुत अंतर हो सकता है लेकिन अधिकतर मामलों में वस्तुनिष्ठ और संक्षिप्त् उत्तर वाले प्रश्न पूछे जाते हैं। विवरणात्मक किस्म के प्रश्नों में भी संक्षेप में उत्तर लिखने होते हैं। इसके अतिरिक्त निबंध या किसी समसामयिक विषय पर संक्षिप्त् टिप्पणी जैसे प्रश्न पूछे जा सकते हैं। प्रत्येक विश्वविद्यालय अपनी प्रवेश परीक्षा का तरीका बदलता रहता है ताकि परीक्षार्थी परीक्षा के बंधे बंधाए ढर्रे के अनुसार तैयारी न कर सकें। इस प्रकार से परीक्षा काफी प्रतिस्पर्धात्मक हो जाती है। इस तरह ऐसे विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में दाखिले की संभावना अधिक होती है, जो इस बारे में गंभीर हैं। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसमें कोई दोमत नहीं हैं कि आज व्यक्तिगत जीवन में ही नहीं, कंपनी और संगठन के स्तर पर भी कानूनी सलाहकारों की जरूरत बढ़ी है। कानून के विभिन्न क्षेत्रों जैसे सिविल लॉ, कार्पोरेशन लॉ, क्रिमिनल लॉ, इंटरनेशनल लॉ, पेटेंट लॉ, टेँस लॉ, लेबर लॉ, एडमिनिस्ट्रेटिव लॉ, संवैधानिक लॉ आदि में विशेषज्ञता हासिल कर रोजगार पाया जा सकता है। एलएल.बी. की डिग्री के साथ कई शिक्षण संस्थान लॉ के कई सहायक कोर्स भी चलाते हैं, ये डिप्लोमा कोर्स के तौर पर संचालित किए जाते हैं। इनके तहत इंटरनेशनल लॉ, सायबर लॉ, पेटेंट एंड कॉपीराइट लॉ लेबर लॉ, टेँस लॉ आदि के डिप्लोमा कोर्स की विशेष माँग है। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;इंटरनेशनल लॉ- इंटरनेशनल लॉ का अर्थ होता है अंतरराष्ट्रीय कानून। इसके तहत विभिन्न राष्ट्रों के रहवासियों एवं व्यवसायियों के साथ-साथ राष्ट्रीय हितों के मध्य उत्पन्न होने वाली समस्याओं को इस कानून के द्वारा सुलझाया जाता है। इस क्षेत्र में करियर के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी उजले अवसर विद्यमान हैं। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;सायबर लॉ- वर्तमान युग सूचना प्रौद्योगिकी का है। अत: वर्तमान समय में इंटरनेट एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र को रेग्यूलेट करने हेतु जिस लॉ की आवश्यकता होती है उसे सायबर लॉ कहते हैं। जीवन में सूचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते प्रभाव के कारण इस क्षेत्र में रोजगार के असीमित अवसर हैं। पेंटेट एंड कॉपीराइट लॉ- विभिन्न उत्पादों के पेटेंट एवं कॉपीराइट की समस्याओं के समाधान हेतु इस लॉ की आवश्यकता होती है। इस क्षेत्र में करियर के चमकीले अवसर हैं। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;लेबर लॉ- कर्मचारियों के अधिकार एवं उनकी समस्याओं के समाधान के लिए लेबर लॉ बनाया गया है। इस क्षेत्र में भी रोजगार की उजली संभावनाएँ हैं। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;टेँस लॉ-&lt;/b&gt; विभिन्न प्रकार के उद्योग व्यापारों के दौरान विभिन्न प्रकार की कर समस्याओं एवं अन्य प्रकार की वैयँतिक टेँस समस्याओं का समाधान टेँस लॉ एँसपर्ट्स करते हैं। कॉर्पोरेट क्षेत्रों में टेँस लॉ विशेषज्ञों की खासी माँग है। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;सिविल जज परीक्षा- &lt;/b&gt;लॉ को कॅरियर के रूप में चुनने वाले अधिकांश विद्यार्थियों का सपना होता है न्यायिक सेवा परीक्षा में चयनित होकर सिविल न्यायाधीश का पद प्राप्त् करना। सिविल न्यायाधीश (सिविल जज) का पद वर्तमान में काफी प्रतिष्ठापूर्ण पद है। इसमें धनोपार्जन के साथ ही साथ सम्मान, प्रतिष्ठा एवं उन्नति के काफी उजले अवसर विद्यमान हैं। देश के सभी राज्यों में सिविल जज परीक्षा आयोजित की जाती है। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;सिविल जज के प्रतिष्ठापूर्ण पद के अतिरिक्त वकीलों को संघ लोक सेवा आयोग द्वारा उनके अनुभव के आधार पर केंद्रीय सेवाओं में भी नियुँत किया जाता है। केंद्रीय स्तर पर लॉ ऑफिसर, लीगल एडवाइजर, डिप्टी लीगल एडवाइजर आदि के पद हैं। राज्यों में राज्य पुलिस, राजस्व एवं न्यायिक विभागों में वकीलों की नियुक्ति की जाती है। विभिन्न स्तर के अधीनस्थ न्यायालयों में न्यायिक दंडाधिकारी, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सब मजिस्ट्रेट, लोक अभियोजक, एडवोकेट जनरल, नोटरी एवं शपथ पत्र आयुक्त के पद उपलब्ध हैं। इनके अतिरिँत वकील फर्मों, संस्थानों और परिवार के लिए कानूनी सलाहकार के रूप में कार्य कर सकता है। यदि कोई अधिवँता के रूप में वकालत की प्रैँटिस करना चाहता है तो उसे संबंधित स्टेट बार काउंसिल को निर्धारित प्रपत्र में आवेदन करना होता है। कई प्राइवेट प्रैँटिस करने वाले प्रतिमाह लाखों में कमाते हैं। कॉर्पोरेट घरानों और कंपनियों से जुडे वकीलों का भी वेतन आकर्षक होता है। सरकारी स्तर पर जजों तथा अन्य लॉ सेवकों का वेतन, वेतन आयोग द्वारा निर्धारित है। इसी तरह सॉलीसिटर, पऒलिक डिफेंडर, अटार्नी जनरल, एडवोकेट जनरल और डिस्ट्रिक अटॉर्नी जैसे पद भी पाए जा सकते हैं। कई जगह कंपनी सेकेटरी के रूप में और लॉ रिपोर्ट लिखने हेतु राइटर की भूमिका में भी रोजगार पाया जा सकता है। शिक्षण और रक्षा सेवा में भी जाने के विकल्प इस पेशे में हैं।&lt;/p&gt; लॉ के क्षेत्र में विभिन्न कोर्स कराने वाले प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं- &lt;p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;जवाहरलाल नेहरू, यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली&lt;/li&gt; &lt;li&gt;सिमबायोसिस जनसंचार संस्थान, सेनापति बापत र्माग, पुणे&lt;/li&gt;&lt;li&gt;नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, पोस्ट बॉँस ७२०१, नागरभवी, बंगलौर&lt;/li&gt;&lt;li&gt;फैकल्टी ऑफ लॉ, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली&lt;/li&gt; &lt;li&gt;आईएलएस, लॉ कॉलेज रोड, पुणे&lt;/li&gt;&lt;li&gt;नेशनल लॉ कॉलेज, भोपाल&lt;/li&gt;&lt;li&gt;देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;/p&gt;</description>
    </item>
    <item>
      <title>मध्यप्रदेश सिविल न्यायाधीश वर्ग-2 (प्रवेश स्तर) परीक्षा-2010 हेतु नोट्स</title>
      <pubDate>6/17/2010</pubDate>
      <description>&lt;div style="clear:both;font-size: 25px; padding: 20px"&gt; &lt;div style="float:left; width:400px;"&gt; &lt;h1&gt;मध्यप्रदेश सिविल न्यायाधीश वर्ग-2 (प्रवेश स्तर) परीक्षा-2010 हेतु नोट्स&lt;/h1&gt; &lt;br /&gt; &lt;p&gt; मध्यप्रदेश सिविल न्यायाधीश वर्ग-2 (प्रवेश स्तर) परीक्षा-2010 के लिए परीक्षोपयोगी नोट्स उपलब्ध हैं । नोट्स में सामान्य अध्ययन तथा भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता, व्यवहार प्रक्रिया संहिता, भारतीय संविदा अधिनियम, संपत्ति अंतरण अधिनियम, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, मियाद अधिनियम, मध्यप्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम एवं मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता पर अत्यधिक परीक्षोपयोगी सामग्री है। सिविल न्यायाधीश वर्ग-2 (प्रवेश स्तर) परीक्षा-2010 के नोट्स मँगाने के लिए 550 रुपए (डाक खर्च 50 रुपए सहित) का मनीऑर्डर / बैंक ड्रॉफ्ट भेजें&lt;/p&gt; &lt;/div&gt; &lt;div style="float:right; width:400px;"&gt; &lt;h1&gt;मध्यप्रदेश सिविल न्यायाधीश वर्ग-2 (प्रवेश स्तर) परीक्षा-2010 के मॉडल टेस्ट पेपर &lt;/h1&gt;&lt;br/&gt; &lt;p&gt; मध्यप्रदेश सिविल न्यायाधीश वर्ग-2 (प्रवेश स्तर) परीक्षा-2010 के मॉडल टेस्ट पेपर प्रतियोगिता निर्देशिका के जून,जुलाई, अगस्त, 2010 अंक में दिए जा रहे हैं।&lt;br/&gt; प्रतियोगिता निर्देशिका का मूल्य 20 रुपए हैं। आज ही अपनी प्रति नजदीक के बुक स्टॉल से खरीदें। प्रतियोगिता निर्देशिका की वार्षिक सदस्यता प्राप्त करने हेतु 200 रुपए का मनीऑर्डर / बैंक ड्रॉफ्ट भेजें&lt;/p&gt; &lt;/div&gt; &lt;/div&gt; &lt;div style="clear:both;font-size: 25px; "&gt; पता:&lt;br/&gt; प्रतियोगिता निर्देशिका 111, गुमास्तानगर,इंदौर-9 फोन नं. 0731- 2482060 begin_of_the_skype_highlighting              0731- 2482060      end_of_the_skype_highlighting, 2480090 &lt;/div&gt;</description>
    </item>
    <item>
      <title>साइबर लॉ में कॅरियर </title>
      <pubDate>6/11/2010</pubDate>
      <description>&lt;p&gt;सदियों से जारी चोरी, हत्या, डकैती, अपहरण और लूटपाट जैसे अपराधों की दुनिया में साइबर क्राइम ने एक नए अवतार के रूप में प्रवेश किया और देखते ही देखते इंटरनेट साइट की हैकिंग, क्रेडिट कार्डों से लेनदेन में हेराफेरी, साइबर वायरस से सिस्टम में छेड़छाड़ के प्रकरणों की बा़ढ़-सी आ गई। कुछ समय पहले तक कानून के प्रावधानों में ऐसे अपराधों का न तो कहीं वर्णन था और न ही इससे निपटने के तरीके कहीं खोजे मिलते थे। परंतु जब सूचना प्रौद्योगिकी संसार और साइबर जगत में अपराधों के प्रकरण ब़ढ़ने लगे तो अंतरराष्ट्रीय सहयोग से साइबर लॉ बनाए गए। जब साइबर लॉ बन गए तो इन्हें जानने वालों तथा इनका उपयोग कर साइबर क्राइम पर अंकुश लगाने वाले कानूनविदों की जरूरत महसूस की जाने लगी। साइबर अपराध के अवतरण के साथ ही साइबर लॉयर (वकील) ने भी कानूनी जगत में अवतार लिया और साइबर अपराध और साइबर लॉयर के टकराव ने करियर निर्माण के एक अनूठे और संभावनाओं से भरपूर अवसर को पैदा किया।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;गौरतलब है कि भारत एशिया का दूसरा और दुनिया का १२वाँ ऐसा देश है जिसका अपना अलग इंफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम २००० के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों तथा डिजिटल सिग्नेचर को विधिक मान्यता प्रदान की गई है। इस कानून में हैकिंग, क्रेडिट कार्ड फ्राड, साइबर स्टॉकिंग, ब्लेक मैलिंग, कम्प्यूटर सोर्स कोड के प्रसारण, नग्नता तथा बौद्धिक संपदा, कॉपीराइटर तथा ट्रेडमार्क से जु़डे अपराध के खिलाफ सख्त प्रावधान बनाए गए हैं। वर्तमान में इंटरनेट पर होने वाले सभी अपराधों के मामले साइबर लॉ के माध्यम से ही निपटाए जा रहे हैं। वास्तव में साइबर लॉ एक तरह का विनियमन है जो कॉपीराइट, बौद्धिक संपदा, अनुबंध आदि को अधिशासित करता है। इन विनियमों पर किसी एक देश का अधिकार नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी जगत में यह विस्तारित है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;यदि आपकी सूचना प्रौद्योगिकी में अच्छी पकड़ है और लीगल करियर बनाने में दिलचस्पी है तो साइबर लॉ आपके लिए संभावाओं से भरपूर क्षेत्र है। साइबर लॉयर बनकर आप साइबर लॉ के क्षेत्र में अपना करियर बनाकर साइबर क्राइम विशेषज्ञ के रूप में ख्याति प्राप्त् कर सकते हैं। मूलत: साइबर लॉयर वह शक्स होता है, जो हैकिंग, क्रेडिट कार्ड जलसाजी, ई-कॉमर्स तथा इंटरनेट पर ई- बिजनेस से रक्षोपाय के लिए डिजिटल हस्ताक्षर के संरक्षण, इनक्रिप्शन कोड या इलेक्ट्रॉनिक कोड आदि से जु़डे अपराधों से निपटता है। बौद्धिक संपदा कानून अथवा कॉपीराइट्स, सॉफ्टवेयर पेटेन्ट्स, नेट बैंकिंग जैसे प्रकरण भी साइबर लॉ की मदद से निपटाए जाते हैं। इसके लिए आपको विधि विषय में स्नातक उपाधि प्राप्त् करने के बाद साइबर लॉ में डिग्री या डिप्लोमा प्राप्त् करना होगा। विधि के अलावा यदि अन्य क्षेत्र के छात्र चाहें तो वह भी साइबर लॉ का कोर्स कर सकते हैं। अब हमारे यहाँ कई लॉ स्कूलों और विश्वविद्यालयों में स्नातकोतर स्तर पर बकायदा साइबर लॉ की प़ाई होने लगी है। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;साइबर लॉ में कोर्स करने के उपरांत आप स्वतंत्र रूप से बतौर कंसल्टेंट अपना कॅरियर आरंभ कर सकते हैं। अथवा साइबर क्राइम से जु़डे प्रकरणों में वकीलों की सहायता करने के लिए किसी लीगल कंसल्टिंग तथा आरबिट्रेशन फर्म में असिस्टेंट या जूनियर प्रेक्टिशनर की भूमिका अदा कर सकते हैं। आजकल बड़ी-बड़ी कंपनियों में साइबर क्राइम से जु़डे मामलों को देखने के लिए अपने लीगल डिपार्टमेंटों में साइबर लॉयर रखे जाते हैं, उनसे जु़डकर आप कार्पोरेट सेक्टर में भी कॅरियर बना सकते हैं। साइबर लॉयर तथा साइबर कंसल्टेंट्स सरकारी विभागों में खासकर सूचना एवं प्रसारण, सूचना प्रौद्योगिकी तथा विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालयों में सलाहकार के रूप में कॅरियर बना सकते हैं। उन्हें टेक्नोलॉजी फर्मों में बतौर सिक्योरिटी ऑडिटर तथा ऑडिटर तथा नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर का काम भी मिल जाता है। आप चाहें तो इस क्षेत्र में आगे रिसर्च को अपना सकते हैं या शिक्षण कर सकते हैं। साइबर अपराधों के साथ-साथ साइबर लॉयर की माँग भी खासी ब़ढ़ रही है। चूँकि इस क्षेत्र में फिलहाल प्रशिक्षित और शिक्षित विशेषज्ञों का अभाव है, इसलिए साइबर एक्सपर्ट को इंटरनेट, नेट बैंकिंग और ई-बिजनेस से जु़डे कार्पोरेट सेक्टर में मुँहमाँगा वेतन मिल रहा है। यदि आप इस क्षेत्र में अच्छा अनुभव हासिल कर लें तो देश ही नहीं विदेशों में भी डॉलरों में कमाई कर सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;साइबर लॉ का कोर्स कराने वाले देश के प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं- &lt;br /&gt;&lt;p&gt;&lt;ul&gt; &lt;li&gt;नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, बेंगलुरू ।&lt;/li&gt;&lt;li&gt;द इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट, डीम्ड यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;साइबर लॉ कॉलेज चेन्नई/मैसूर/हुबली/मंगलोर तथा बेंगलुरू ।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;सिम्बायोसिस सोसायटी लॉ कॉलेज, पुणे।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;/p&gt;</description>
    </item>
    <item>
      <title>मध्यप्रदेश राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2010 में सफलता हेतु रणनीति</title>
      <pubDate>10/20/2010</pubDate>
      <description>
&lt;p&gt;मध्यप्रदेश राज्य सेवा परीक्षा के माध्यम से उच्च प्रशासनिक पद की प्राप्ति बड़ी संख्या में युवाओं का एक करियर  स्वप्न होता है। वे युवा जो अत्यधिक प्रतिस्पर्धा के कारण सिविल सर्विस परीक्षा में चयनित नहीं हो पाते हैं या  जिनका उद्देश्य राज्य में रहकर ही प्रशासनिक  सेवा की डगर पर बढ़ना होता है, वे परिश्रम, आत्मविश्वास और  सुनियोजित तैयारी से राज्य के विभिन्न तरह के प्रशासनिक पदों पर चयनित हो सकते हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ध्यातव्य है कि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा 20 फरवरी, 2011 को ली जाने वाली मध्यप्रदेश राज्य सेवा  प्रारंभिक परीक्षा-2010 नए पैटर्न एवं नए सिलेबस के आधार पर आयोजित की जानी है। इस बार 305 पद  विज्ञापित किए गए हैं। मध्यप्रदेश राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2010 में दो वस्तुनिष्ठ  प्रश्नपत्र होंगे। पहला प्रश्नपत्र  सामान्य अध्ययन का एवं दूसरा प्रश्नपत्र ऐच्छिक विषय का होगा । सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र में 150 वस्तुनिष्ठ  प्रश्न पूछे जाएँगे, जिनके कुल पूर्णांक 150 निर्धारित हैं जबकि ऐच्छिक विषय के  प्रश्नपत्र में 120 वस्तुनिष्ठ  प्रश्न  पूछे जाएँगे जिनके कुल 300 अंक निधारित हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;गौरतलब है कि मध्यप्रदेश राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा के बारे में कई उम्मीदवारों की यह धारणा होती है कि यह  बहुत कठिन परीक्षा है और इसमें चयनित होने के लिए प्रतियोगी का केवल मेधावी होना जरूरी है। सामान्य  मानसिक स्तर वाले विद्यार्थी इसमें सफल होने की संभावना कम रखते हैं लेकिन यह धारणा पूर्णत: गलत है। इस  परीक्षा में मेधावी छात्रों के  साथ-साथ वे सभी छात्र-छात्राएँ सफलता की एक जैसी ही संभावनाएँ रखते हैं जो  परिश्रम, सुनियोजित तैयारी और अच्छे अध्ययन संदर्भों को आधार बना लेते हैं। नि:संदेह यदि प्रारंभ से ही तैयारी  की रणनीति बना ली जाए और अच्छी पुस्तकों तथा पत्रिकाओं को अध्ययन का आधार बना लिया जाए तो पहले  दिन से ही सफलता की संभावनाएँ आपकी मुट्ठी में समा जाती हैं। इस परीक्षा में सम्मिलित होने वाले सभी  प्रतियोगी सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र के लिए चिंतित तो रहते हैं लेकिन सुनियोजित रूप से वे उसकी तैयारी नहीं  करते हैं। नि:संदेह सामान्य अध्ययन की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।&lt;/p&gt;
सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र को दस खंडों में बाँटा गया है, जो इस प्रकार हैं- 
&lt;ul&gt;
&lt;li&gt;सामान्य विज्ञान एवं पर्यावरण&lt;/li&gt; 
&lt;li&gt;राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएँ&lt;/li&gt; 
&lt;li&gt;भारत का इतिहास एवं स्वतंत्र भारत&lt;/li&gt; 
&lt;li&gt;भारत का भूगोल एवं विश्व की सामान्य भौगोलिक जानकारी&lt;/li&gt; 
&lt;li&gt;भारतीय राजनीति एवं अर्थव्यवस्था&lt;/li&gt; 
&lt;li&gt;खेलकूद&lt;/li&gt; 
&lt;li&gt;मध्यप्रदेश का भूगोल इतिहास तथा संस्कृति&lt;/li&gt; 
&lt;li&gt;मध्यप्रदेश की राजनीति एवं अर्थव्यवस्था&lt;/li&gt; 
&lt;li&gt;सामान्य मानसिक योग्यता&lt;/li&gt; 
&lt;li&gt;सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी&lt;/li&gt; 
&lt;/ul&gt;
&lt;p&gt;मध्यप्रदेश राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2010 के सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र  में सामान्य विज्ञान एवं पर्यावरण एक  महत्वपूर्ण खंड है। सामान्य विज्ञान एवं पर्यावरण में भौतिकी, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान तथा पर्यावरण एवं  पर्यावरण संरक्षण से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।  इन प्रश्नों की विशेष तैयारी आवश्यक है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाओं की तैयारी में प्रतियोगियों को चाहिए कि वे केवल राष्ट्रीय एवं  अंतरराष्ट्रीय महत्व की राजनीतिक  घटनाओं को ही इस खंड की तैयारी में शामिल न करें अपितु चर्चा में रहने वाले  विभिन्न विषयों पर भी ध्यान दें।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;मध्यप्रदेश राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2010 के सामान्य अध्ययन खंड में भारतीय इतिहास तथा संस्कृति से  संबंधित कई प्रश्न पूछे जाते हैं। इसकी तैयारी हेतु इतिहास को तीन भागों यथा प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत  तथा आधुनिक भारत में बाँटा जा सकता है। प्राचीन भारतीय इतिहास को तीन कालावधियों में विभक्त किया जा  सकता है- प्रागैतिहासिक काल, आद्यैतिहासिक काल तथा ऐतिहासिक काल। प्रागैतिहासिक काल व आद्य-ऐतिहासिक  काल से प्रश्न प्राय: महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों व वहाँ प्राप्त वस्तुओं पर आधारित होते हैं। ऐतिहासिक काल में  मुख्यत: सामाजिक-सांस्कृतिक पहलू पर ध्यान देना होता है। इसमें भी विशेष रूप से सामाजिक परिवर्तन, शिक्षा के  स्रोत, कला एवं स्थापत्य तथा धार्मिक जीवन का विकास। इस अवधि के राजनीतिक इतिहास का भी अध्ययन  करना चाहिए। मध्यकालीन भाग से  इतिहास के  साथ-साथ संस्कृति से भी अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं । इस काल  के  साहित्य, चित्रकला व स्थापत्य शैली तथा तकनीकी उपलब्धि की विस्तृत सूची बनाकर रखनी चाहिए। आधुनिक  इतिहास सबसे महत्वपूर्ण तथा सर्वाधिक अंकदायी भाग है, अत: इस पर विशेष ध्यान केंद्रित करना चाहिए।  स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण घटनाओं का अध्ययन आवश्यक है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;भूगोल खंड में भूगोल से संबंधित प्रश्न होते हैं। इनमें भूकंप के  बुनियादी लक्षण, दुनिया के  जलवायु क्षेत्र,  बंदरगाह, ज्वार-भाटा, नदियाँ, बहुउद्देशीय परियोजनाएँ, सिंचाई, फसलें आदि मुख्य होते हैं। भूगोल की तैयारी के   संबंध में एक विशेष बात है मानचित्र की जानकारी। मोटे तौर पर परीक्षार्थियों को मानचित्र पर विभिन्न महत्वपूर्ण,  स्थानों, पर्वतों, नदियों, झीलों की स्थिति के बारे में जानकारी होना चाहिए। मध्यप्रदेश की भौगोलिक जानकारी से  जु़डे प्रश्न भी बहुतायात में पूछे जाते हैं।
&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र के अंतर्गत भारतीय राजनीति की तैयारी में संविधान संशोधन के महत्वपूर्ण तथ्यों एवं  उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का अध्ययन लाभप्रद होता है । प्रारंभिक परीक्षा में परम्परागत  तथा संविधान के विकास से संबंधित दोनों तरह के कई प्रश्न पूछे जाते हैं । राजव्यवस्था के  अंतर्गत मानवाधिकार,  राज्य के  नीति निदेशक तत्व, मूल कर्तव्य, कार्यपालिका, आर्थिक प्रक्रिया जैसे बजट (विभिन्न प्रकार के विधेयक  जैसे वित्त विधेयक धन विधेयक आदि), न्यायपालिका विशेषत: सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय के  अधिकार  (उनके ऐतिहासिक विकास सहित), संघ व राज्यों के बीच संबंध, प्रशासनिक अधिकरण, चुनाव व चुनाव सुधार,  आपातकालीन प्रावधान, संविधान संशोधन, पंचायती राज व्यवस्था इत्यादि से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए  इन खंडों को विशेष रूप से तैयार करें। सामान्य अध्ययन का एक और महत्वपूर्ण खंड है अर्थव्यवस्था। इसके लिए  प्रतियोगी को भारतीय व विश्व अर्थव्यवस्था में हुई पहल व विकास का समीक्षात्मक  विश्लेषण करना चाहिए। इसके  अन्तर्गत अर्थव्यवस्था की प्रकृति, पूँजी निर्माण, राष्ट्रीय आय, आय वितरण, भारत में नियोजन, भारत का विदेश  व्यापार, भुगतान संतुलन, मुद्रास्फीति, भारत में बैंकिंग प्रणाली, राजकोषीय ढाँचा, संरचनात्मक सुधार, खाद्य सुरक्षा,  सार्वजनिक वितरण प्रणाली, औद्योगिक नीति, औद्योगिक  रुग्णता तैयारी के मुख्य बिंदु हो सकते हैं।  सामान्य  अध्ययन के नए पाठ्यक्रम में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी भी सम्मिलित की गई है विगत वर्ष इस खंड से बहुत  बड़ी संख्या में प्रश्न पूछे गए थे। अत: इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित  विभिन्न शब्दों का अर्थ तथा कम्प्यूटर के विभिन्न भागों के कार्यों, हार्डवेयर एवं सॉऍटवेयर की जानकारी भी बेहद  जरूरी है। इस भाग की तैयारी हेतु आप बेसिक कम्प्यूटर की किताबों का सहारा भी ले सकते हैं। सामान्य अध्ययन  प्रश्नपत्र की तैयारी हेतु सबसे पहले एनसीईआरटी की वे पुस्तकें जो 11वीं और 12वीं कक्षाओं में पाठ्यक्रम में  निर्धारित हैं राज्य सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए पढ़ी जानी चाहिए। इनमें भारतीय इतिहास, भूगोल, राजनीतिक व्यवस्था, अर्थशास्त्र, आर्थिक नियोजन, संविधान और विज्ञान की पुस्तकें अत्यधिक  महत्वपूर्ण अध्ययन संदर्भ हैं।  सामान्य ज्ञान की ऐसी बुनियादी तैयारी के  साथ-साथ प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी हेतु उपलब्ध स्तरीय मासिक  पत्रिकाओं का अध्ययन आवश्यक होता है। चूँकि सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र में मध्यप्रदेश से संबंधित ढ़ेरों प्रश्न  पूछे जाते हैं। अत: मध्यप्रदेश के  सामान्य ज्ञान की भी विशेष तैयारी जरूरी है। सामान्य अध्ययन की तैयारी के  लिए जहाँ एक ओर भारत सरकार के  प्रकाशन- योजना, कुरुक्षेत्र, मध्यप्रदेश सरकार के प्रकाशन- पंचायिका,  मध्यप्रदेश संदेश, रोजगार और निर्माण, स्तरीय मासिक पत्रिकाएँ- मध्यप्रदेश सामान्य ज्ञान केंद्रीत प्रतियोगिता  निर्देशिका, सामान्य ज्ञान दर्पण, काम्पीटिशन सक्सेस रिव्यू आदि उपयोगी हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ विशिष्ट  पुस्तकें  भी लाभप्रद हैं । ये पुस्तकें हैं- इतिहास  हेतु- प्राचीन भारत का इतिहास झा एवं श्रीमाली, भारत का इतिहास-  रोमिला थापर, मध्यकालीन भारत- डॉ. आशीर्वादी लाल, आधुनिक भारत का इतिहास- बी.एल. ग्रोवर, भारत का  स्वतंत्रता संग्राम- डॉ. विपिनचंद्र। संविधान एवं राजव्यवस्था हेतु- भारत का संविधान- डी.डी.बसु। भूगोल हेतु- भारत  का भूगोल- गोपालसिंह, सी.बी. मामोरिया। अर्थव्यवस्था हेतु- भारतीय अर्थव्यवस्था-दत्त एवं सुंदरम्, भारतीय  अर्थव्यवस्था मिश्र एवं पुरी । इसके अलावा भारत- 2010 तथा मनोरमा ईयर बुक 2010 का अध्ययन भी काफी  लाभप्रद होगा।  इसके साथ ही प्रतियोगिता निर्देशिका के नोट्स भी तैयारी में बहुत सहायक सिद्ध होंगे। वे सभी  प्रतियोगी जो आगामी मध्यप्रदेश राज्य सेवा परीक्षा के माध्यम से राज्य सेवा के  प्रतिष्ठित पद पर चयनित होने  का सपना संजो रहे हैं उन्हें चाहिए कि वे परिश्रम और आत्मविश्वास के संकल्प के साथ राज्य सेवा प्रारंभिक  परीक्षा-2010 की तैयारी करें। यदि पूरे मनोयोग से तैयारी करेंगे तो सफलता अवश्य ही मिलेगी।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://www.flair-solution.com/docs/test-paper-MPPSC-PRE-2010.pdf" target="_blank"&gt;Download Model Paper for MPPSC Pre 2010&lt;a&gt;&lt;/p&gt;
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    </item>
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      <title>ऐसे करें जिला न्यायालय सहायक ग्रेड-3, शीघ्रलेखक ग्रेड-2, ग्रेड-3, सहायक ग्रंथपाल तथा ट्रांसलेटर हेतु होने वाली प्रारंभिक परीक्षा-2011 की तैयारी</title>
      <pubDate>1/19/2011</pubDate>
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&lt;p&gt;मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं राज्य के जिला न्यायालयों में सहायक ग्रेड-3, शीघ्रलेखक ग्रेड-2, ग्रेड-3, ट्रांसलेटर, सहायक ग्रंथपाल आदि के 931 रिक्त पदों के लिए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इन पदों हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 18 फरवरी, 2011 निर्धारित की गई है तथा इन पदों हेतु होने वाली प्रारंभिक परीक्षा 13 मार्च, 2011 को आयोजित की जानी है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;गौरतलब है कि इन विभिन्न पदों के लिए होने वाली प्रारंभिक परीक्षा में 100 वस्तुनिष्ठ  प्रश्न पूछे जाएँगे। जो इस प्रकार हैं- सामान्य ज्ञान के 40 प्रश्न, सामान्य हिन्दी के 10 प्रश्न, सामान्य अंग्रेजी के 20 प्रश्न तथा कम्प्यूटर ज्ञान के 30 प्रश्न। चूँकि इस परीक्षा में सामान्य ज्ञान के 40 प्रश्न पूछे जाएँगे इसलिए सामान्य ज्ञान के प्रश्नों की विशेष तैयारी जरूरी है। सामान्य ज्ञान खंड में इस बात की जाँच की जाती है कि परीक्षार्थी में सामान्य ज्ञान का स्तर कितना है। समाज, देश और विश्व से जु़डी प्रमुख घटनाओं के प्रति परीक्षार्थी की जागरूकता का पता इसी परीक्षा से लगाया जाता है। सामान्य ज्ञान में प्राय: सामान्य ज्ञान के प्रश्नों के साथ पिछले कुछ समय में हुई घटनाओं पर भी प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके लिए यह बहुत जरूरी है कि पूरे नवीनतम घटनाक्रम पर नजर रखी जाए। इस भाग की तैयारी के लिए राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्र, प्रतियोगी परीक्षाओं की मध्यप्रदेश सामान्य ज्ञान केंद्रित मासिक पत्रिका प्रतियोगिता निर्देशिका,कॉम्पीटिशन सक्सेस रिव्यू तथा सामान्य ज्ञान दर्पण बहुत उपयोगी है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;सामान्य ज्ञान के तहत विज्ञान एवं पर्यावरण की तैयारी हेतु आप भौतिकी में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न सूत्रों को कंठस्थ कर लें। मापन, गति एवं बल, कार्य, ऊर्जा एवं शक्ति, ध्वनि, प्रकाश, विद्युत ऊर्जा आदि से संबंधित सूत्रों एवं अवधारणाओं को याद कर लें। इसी प्रकार रसायन शास्त्र के तहत द्रव्य की प्रकृति, बंध, रासायनिक अभिक्रियाएँ, आवर्त सारणी, कार्बनिक रसायन पर विशेष ध्यान दें। जीव विज्ञान के अंतर्गत कोशिका, वनस्पति क्रिया विज्ञान, परिसंचरण तंत्र, श्वसन तंत्र, उत्सर्जन तंत्र, तंत्रिका तंत्र, अंत:स्त्रावी तंत्र, आनुवांशिकी, पोषण, स्वास्थ व रोग महत्वपूर्ण टॉपिक हैं। इन टॉपिँस पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;सामान्य ज्ञान में इतिहास, भूगोल, राजनीति शास्त्र तथा अर्थशास्त्र से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इतिहास को तीन भागों यथा प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत तथा आधुनिक भारत में बाँटा जा सकता है। प्राचीन भारतीय इतिहास को तीन कालावधियों में बाँटा जाता है- प्रागैतिहासिक काल तथा ऐतिहासिक काल व आद्य ऐतिहासिक काल से प्रश्न प्राय: महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों व वहाँ प्राप्त वस्तुओं पर आधारित होते हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ऐतिहासिक काल में मुख्यत: सामाजिक, सांस्कृतिक पहलू पर ध्यान देना चाहिए। इसमें भी विशेष रूप से सामाजिक परिवर्तन, शिक्षा के स्रोत, कला एवं स्थापत्य तथा धार्मिक जीवन का विकास एवं इस अवधि के राजनीतिक इतिहास का भी अध्ययन करना चाहिए। मध्यकालीन भाग से इतिहास के साथ-साथ संस्कृति से भी अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं। इस काल के साहित्य, चित्रकला व स्थापत्य शैली तथा तकनीकी उपलब्धि की विस्तृत सूची बनाकर अध्ययन करना चाहिए। इतिहास खंड में आधुनिक इतिहास सबसे महत्वपूर्ण तथा सर्वाधिक अंकदायी भाग है, अत: इस पर विशेष ध्यान केंद्रित करना चाहिए। स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण घटनाओं का अध्ययन लाभप्रद होता है।राजव्यवस्था से जु़डे सामान्य ज्ञान के प्रश्नों की तैयारी में संविधान संशोधन के महत्वपूर्ण तथ्यों एवं उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए महत्वपूर्ण निर्णयों का अध्ययन लाभप्रद होता है। परीक्षा की दृष्टि से भारतीय राजव्यवस्था को दो भागों में बाँट सकते हैं। संवैधानिक पक्ष एवं राजव्यवस्था से संबंधित सामायिक विकास। संवैधानिक पक्ष को पुन: दो भागों में बाँटा जा सकता है यथा भारतीय संविधान, संसदीय कार्यवाही व प्राविधिकता। राजव्यवस्था के अंतर्गत राज्य के नीति निदेशक तत्व, मूल कर्तव्य, कार्यपालिका, बजट, न्यायपालिका, केंद्र-राज्य संबंध, चुनाव, आपातकालीन प्रावधान व संविधान संशोधन  सम्मिलित हैं। इन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;सामान्य ज्ञान में भूगोल खंड में अधिकांश प्रश्न भारत के भूगोल से संबंधित होते हैं। इनमें भूकंप के बुनियादी लक्षण, भारत के जलवायु क्षेत्र, बंदरगाह, ज्वार-भाटा, नदियाँ, बहुउद्देश्यीय परियोजनाएँ, सिंचाई, फसलें आदि मुख्य होते हैं। भूगोल की तैयारी के संबंध में एक विशेष बात है मानचित्र की जानकारी। मोटे तौर पर परीक्षार्थियों को मानचित्र पर विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों, पर्वतों, नदियों, झीलों की स्थिति के बारे में जानकारी होनी चाहिए। भूगोल की तैयारी हेतु सी.बी. मामोरिया की पुस्तक बहुत लाभप्रद है। सामान्य ज्ञान में अर्थव्यवस्था खंड की तैयारी हेतु भारतीय व विश्व अर्थव्यवस्था में हुई पहल व विकास का समीक्षात्मक विश्लेषण करना चाहिए। इसके अंतर्गत अर्थव्यवस्था की प्रकृति, पूँजी निर्माण, राष्ट्रीय आय, आय वितरण, भारत में नियोजन, संरचनात्मक सुधार, खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, औद्योगिक नीति, औद्योगिक रुग्णता, मुद्रास्फीति, भुगतान संतुलन, बैंकिंग प्रणाली तथा राजकोषीय ढाँचे के अध्ययन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इस खंड हेतु दत्त एवं सुंदरम की भारतीय अर्थव्यवस्था उपयोगी पुस्तक है।
&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;प्रारंभिक परीक्षा में कम्प्यूटर ज्ञान के 30 प्रश्न पूछे जाएँगे। अत: इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित विभिन्न शब्दों का अर्थ तथा कम्प्यूटर के विभिन्न भागों के कार्यों, हार्डवेयर एवं सॉऍटवेयर की जानकारी भी बेहद जरूरी है। आपको शॉर्टकट कीज तथा कम्प्यूटर से जु़डी बारीक से बारीक पुर्जों के कामकाज की जानकारी भी होनी चाहिए। इस भाग की तैयारी हेतु बेसिक कम्प्यूटर की किताबों का सहारा लेना चाहिए।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;प्रारंभिक परीक्षा में  हिन्दी के 10 तथा अंग्रेजी के 20 प्रश्न पूछे जाएँगे इसलिए इस खंड का महत्व भी कम नहीं है। हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा के खंड का उद्देश्य भाषा ज्ञान की परीक्षा करना है। व्याकरण, शब्दावली, वाक्य पूर्ण करना, समानार्थी, विरुद्धार्थी, अनुच्छेद की समझ आदि संबंधी प्रश्नों से अंग्रेजी तथा हिन्दी भाषा संबंधी ज्ञान की परीक्षा की जाती है। अंग्रेजी भाषा खंड हेतु हरिमोहन प्रसाद और ऊषा रानी सिन्हा द्वारा लिखित पुस्तक ऑब्जेक्टिव इंग्लिश और कॉम्पीटेटिव इंग्लिश बहुत उपयोगी हैं। हिन्दी भाषा खंड हेतु डॉ. शिवाशंकर पांडे की सामान्य हिन्दी परिचय काफी उपयोगी पुस्तक है। वे सभी प्रतियोगी जो जिला न्यायालय सहायक ग्रेड-3, शीघ्रलेखक ग्रेड-2, ग्रेड-3, सहायक ग्रंथपाल तथा ट्रांसलेटर हेतु होने वाली प्रारंभिक परीक्षा-2011 में सफल होना चाहते हैं उन्हें चाहिए कि वे परिश्रम और आत्मविश्वास के संकल्प के साथ तैयारी करें। यदि पूरे मनोयोग से तैयारी करेंगे तो सफलता अवश्य ही मिलेगी।
&lt;/p&gt;
&lt;a href="http://www.flair-solution.com/docs/MPPSC-Assistant-Grade-3.pdf" target="_blank"&gt;Download Latest Sample Paper&lt;/a&gt;
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