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    <category>Other Options</category>
    <item>
      <title>विदेशी भाषाओं में कॅरियर </title>
      <pubDate>6/11/2010</pubDate>
      <description>&lt;p&gt;वैश्वीकरण के वर्तमान दौर में जहाँ विभिन्न देशों के बीच की दूरियाँ और सीमाएँ सिमटकर रह गई हैं, वहीं विदेशी भाषाओं की जानकारी रोजगार के बेहतरीन अवसर मुहैया करा रही है। यही वजह है कि आज छात्रों को परंपरागत विषयों से हटकर विदेशी भाषा का अध्ययन ज्यादा लुभा रहा है। वर्षों से बड़ी संख्या में छात्र विदेशी भाषाओं, विशेषकर फ्रेंच, जर्मन और रूसी भाषा में कुशलता अर्जित कर रहे हैं। आजकल चीन, जापान और इजरायल सहित अनेक देशों के साथ भारत अपने व्यापार संबंधों का विस्तार कर रहा है। ऐसे में इन देशों की भाषाओं का ज्ञान रखने वाले लोगों की बड़ी संख्या में जरूरत महसूस की जा रही है। &lt;/p&gt;&lt;p&gt; गौरतलब है कि फ्रेंच भाषा मौजूदा समय में अंग्रेजी के बाद विश्व की सर्वाधिक लोकप्रिय भाषा बन गई है। इस भाषा को अंग्रेजी के जानकार बेहद सरलता से सीख सकते हैं क्योंकि यह भाषा अंग्रेजी से काफी कुछ मिलती-जुलती है। फ्रेंच भाषा के बाद जर्मन भाषा का क्रम आता है। जर्मन भाषा को 'अवसरों की भाषा` भी कहा जाता है। जर्मन भाषा, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया व स्विट्जरलैंड आदि देशों में लगभग १० करोड़ लोगों द्वारा बोली व समझी जाती है। यही वजह है कि जर्मन भाषा सीखने वालों में भारतीयों की संख्या भी तेजी से बढ़ती जा रही है। जब से जापान का विश्व के अन्य देशों के साथ व्यापार और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है तब से जापानी भाषा के विशेषज्ञों की माँग भी बढ़ी है। इस भाषा के बढ़ते महत्व ने इसे रोजगारपरक भाषा बना दिया है। जो छात्र जापानी भाषा सीखना चाहते हैं, उन्हें अंग्रेजी का मूलभूत ज्ञान होना अति आवश्यक है। भारत व रूस के मैत्रीपूर्ण घनिष्ठ संबंधों के कारण रूसी भाषा के प्रति भारतीयों का लगाव कई दशक पहले से ही है। इसके अतिरिक्त चीन के साथ भारत के बढ़ते व्यापार को देखते हुए चीनी भाषा के क्षेत्र में भी कॅरियर की उजली संभावनाएँ हैं। &lt;/p&gt;&lt;p&gt; विदेशी भाषा से संबंधित पाठ्यक्रम मुंयत: तीन प्रकार के हैं- प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम, डिप्लोमा पाठ्यक्रम और डिग्री पाठ्यक्रम । प्रमाणपत्र और डिग्री पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए १०+२ परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है, लेकिन ज्यादातर स्थानों पर डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए पात्रता मापदंड संबद्ध भाषा में प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम है। छात्रों को किसी भी विदेशी भाषा कोर्स में एडमिशन लेने से पूर्व सभी भाषाओं के विषय में अच्छी तरह से जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए और जो भाषाएँ वैश्वीकरण के दौर की महत्वपूर्ण भाषाएँ हैं और जो रोजगारोन्मुखी हैं उनकी ओर विद्यार्थियों ने कदम बढ़ाने चाहिए । कई बार ऐसा होता है कि छात्र-छात्राएँ भाषा पाठ्यक्रम में एडमिशन तो ले लेते हैं लेकिन बाद में उन्हें उस संबंधित भाषा को सीखने में कई दिक्कतो का सामना करना पड़ता है। &lt;/p&gt;&lt;p&gt; विदेशी भाषा सीखने और धन कमाने के लिए उसका इस्तेमाल करना, दोनों अलग-अलग चीजें हैं। किसी विदेशी भाषा के जरिए आजीविका अर्जित करने के लिए आपको संबंधित विदेशी भाषा की पत्र-पत्रिकाएँ और पुस्तकें आदि पढ़ने के माध्यम से निरंतर भाषा प्रयोग के संपर्क में रहना होता है। इसके अतिरिक्त संबद्ध भाषा बोलने वाले अन्य लोगों से भी संपर्क बनाए रखना होगा। ताकि आप भाषा बोलने के कढौशल में सुधार कर सकें और भाषा के सूक्ष्म पहलुओं को समझ सकें । इन पहलुओं की जानकारी भाषा बोलने और उसमें वार्तालाप के जरिए ही हासिल की जा सकती है इसलिए विदेशी भाषा में कोई भी पाठ्यक्रम पत्राचार के माध्यम से नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे संबद्ध विदेशी भाषा पर मजबूत पकड़ नहीं बन पाती है। बेहतर है कि आप नियमित पाठ्यक्रम को ही चुनें।&lt;/p&gt;&lt;p&gt; विदेशी भाषा में रोजगार की बात करें तो विदेशी भाषा सीखकर आप अनुवादक या दुभाषिया बन सकते हैं। अनुवादक के कार्य में लिखित सामग्री का अनुवाद करना शामिल है। जो सामान्य पत्राचार, अनुदेश, तकनीकी डाटा, कैढटलॉग, राजनीतिक भाषण या पुस्तकढों के रूप में हो सकता है। दूसरी ओर दुभाषिए का काम थोड़ा कठिन होता है। उसे तत्कढाल एक भाषा का दूसरी भाषा में सही-सही अनुवाद करना पड़ता है। इसके लिए स्रोत भाषा की अधिक गहन जानकारी आवश्यक होती है तथा संबंधित विदेशी भाषा का उच्चारण भी सही-सही आना चाहिए। विदेशी भाषा में रोजगार की संभावना इस बात पर ज्यादा निर्भर करती है कि आपके भीतर अभिव्यक्ति की क्षमता कितनी है ? विदेशी भाषा की पढ़ाई करने के बाद छात्र दुभाषिया तथा अनुवादक के अतिरिक्तढ टूरिस्ट गाइड, अध्यापन, विभिन्न एयरलाइंस में भी कॅरियर बना सकते हैं। इसके अलावा आप स्वतंत्र लेखन, अनुवाद संस्थाओं, शोध संस्थाओं, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, विदेशी कंढपनियों व पुस्तक प्रकाशन में पर्याप्त रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। इस क्षेत्र में रोजगार के ढ़ेरों अवसर विद्यमान हैं। आप होटल और पर्यटन उद्योग, जनसंचार और मनोरंजन, वाणिज्य, व्यापार और औद्योगिक घराने, दूतावास और राजनयिक क्षेत्र में भी अच्छा कॅरियर प्राप्त कर सकते हैं। विदेशी भाषा कोर्स करने के उपरांत विदेशों में भी कॅरियर के काफी उजले अवसर विद्यमान हैं। &lt;/p&gt;आप इन विश्वविद्यालयों/ संस्थानों से विदेशी भाषाओं के विभिन्न पाठ्यक्रम कर सकते हैं-&lt;p&gt; &lt;ul&gt;&lt;li&gt;दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली- यहाँ फ्रेंच, जर्मन, स्पैनिश, अरबी, इटैलियन, चीनी, तिऒबती, सुहाली, फारसी, पोलिश, बुल्गारियन आदि भाषाओं में रोजरागोन्मुखी पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। &lt;/li&gt; &lt;li&gt;जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय,नई दिल्ली- यहाँ से आप अरबी, फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश, चीनी, रूसी, पुर्तगाली, सिंहली, मंगोलियन, जापानी आदि भाषाओं में कोर्स कर सकते हैं। &lt;/li&gt; &lt;li&gt;राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर- यहाँ से जर्मन, फ्रेंच, रूसी इत्यादि भाषाओं में कोर्स कर सकते हैं। &lt;/li&gt; &lt;li&gt;मुंबई विश्वविद्यालय मुंबई- यहाँ चीनी तथा जापानी भाषा में डिग्री पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।&lt;/li&gt;&lt;li&gt;विश्व भारती, शांति निकेतन, कोलकाता- यहाँ से चीनी तथा जापानी भाषा में प्रमाणपत्र और डिप्लोमा पाठ्यक्रम किया जा सकता है।&lt;/li&gt;&lt;li&gt;पुणे विश्वविद्यालय, पुणे- यहाँ जापानी भाषा में प्रमाणपत्र और डिप्लोमा पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;/p&gt;</description>
    </item>
    <item>
      <title>बीमा क्षेत्र में चमकीले कॅरियर </title>
      <pubDate>6/11/2010</pubDate>
      <description>&lt;p&gt;&lt;img height="300" alt="Career Options in Insurance, Insurance as Career" width="300" align="left" style="margin-right: 20px" height="300" src="/Portals/0/ins.gif" /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div style="font-size: 14px;"&gt;&lt;p&gt;वैश्वीकरण एवं उदारीकरण के वर्तमान दौर में बीमा क्षेत्र कॅरियर निर्माण हेतु काफी उज्जवल क्षेत्र माना जा रहा है। नई यूपीए सरकार के द्वारा बीमा कानून (संशोधन) विधेयक २००८ के तहत बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा २६ फीसदी से बढ़ाकर ४९ फीसदी किए जाने की संभावनाओं ने बीमा क्षेत्र में कॅरियर की डगर को चमकीला बनाया है। अमेरिका तक में जिन पाँच प्रमुख कॅरियर विकल्पों का बोलबाला है उसमें बीमा क्षेत्र भी शामिल है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;कुछ वर्षों पहले तक भारतीय बीमा क्षेत्र में सरकारी कंपनियों का एकाधिकार था परंतु निजी क्षेत्र को बीमा की अनुमति मिलने के बाद एक ओर जहाँ बाजार में अवसर बढ़े हैं, वहीं दूसरी ओर लोगों को पसंदीदा सेवा चुनने की स्वतंत्रता भी मिल गई है। वर्तमान समय में भारतीय बाजार में विभिन्न प्रकार की सेवाओं के साथ कई बहुराष्ट्रीय और जिनी कंपनियाँ बीमा कारोबार को नया आयाम दे रही हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;भारत में बीमा क्षेत्र को खुला बनाए जाने से सरकारी एवं निजी बीमा कंपनियों में आकर्षक नौकरियों के अलावा कई संबद्ध अवसर भी इस क्षेत्र में पैदा हुए हैं । कॅरियर के लिहाज से अपार संभावनाओं वाला यह क्षेत्र जनसंपर्क क्षमताओं की परीक्षा लेने वाला है, अर्थात यदि आपमें लोगों से संपर्क बनाने के गुर और उन्हें अपनी बातों से प्रभावित करने की क्षमता है, तो कॅरियर की असीम ऊँचाइयाँ लिए बीमा क्षेत्र आपका इंतजार कर रहा है। बीमा क्षेत्र में जो प्रमुख रोजगार अवसर हैं, वे इस प्रकार हैं-&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;एल.आई.सी. एजेंट&lt;/b&gt;- भारतीय जीवन बीमा निगम विश्व का सबसे बड़ा बीमा कंपनी है । भारतीय जीवन बीमा निगम (एल.आई.सी.) का बीमा कारोबार एक बार फिर से उफान पर है। हाल ही के वर्षों में एल.आई.सी. के प्रीमियम में आई तेजी ने पूरे जीवन बीमा क्षेत्र को भारी लाभ पहुँचाया है। प्रीमियम में बढ़ोतरी की वजह से बाजार में एलआईसी की हिस्सेदारी बढ़कर ५८.६७ फीसदी हो गई है। ऐसे भारतीय जीवन बीमा निगम में एजेंट (अभिकर्ता) बनकर मानवता की सेवा के साथ-साथ उम्मीदवार उच्चस्तरीय जीवनशैली भी प्राप्त कर सकता है। एल.आई.सी. एजेंट बनने हेतु न्यूनतम आयु १८ वर्ष निर्धारित है । शैक्षणिक योग्यता के अंतर्गत शहरी क्षेत्र हेतु बारहवीं कक्षा तथा ग्रामीण क्षेत्र में बीमा एजेंट बनने हेतु दसवीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। साथ ही एल.आई.सी. से संबंधित कार्यों की १०० घंटे की ट्रेनिंग लेनी होती है तथा आय.आर.डी.ए. द्वारा आयोजित परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक है। एजेंट को उसके कार्य में निपुणता लाने के लिएएल.आई.सी. तथा विकास अधिकारी द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है ताकि वे प्रभावी एवं त्वरित बीमा सेवा प्रदान कर सकें । जहाँ तक एल.आई.सी. एजेंट की आय की बात की जाए तो उसकी आय की कोई सीमा नहीं होती है। वह जितना ज्यादा बीमाकरेगा उसकी आय उतनी ही ज्यादा बढ़ती जाएगी। एक बार बीमा करने पर उसे लगातार उसी बीमा पॉलिसी पर जब तक वह बीमा पॉलिसी कार्यशील रहती है उसे कमीशन प्राप्त होता रहता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;एल.आई.सी. सहायक प्रशासनिक अधिकारी&lt;/b&gt;- एल.आई.सी. में सहायक प्रशासनिक अधिकारी बनने हेतु आयु सीमा २० से ३० वर्ष के मध्य निर्धारित है। एल.आई.सी. में सहायक प्रशासनिक अधिकारी बनने हेतु किसी भी विषय के साथ स्नातक या स्नातकोत्तर परीक्षा ५५ प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण होनी चाहिए । इस हेतु होने वाली प्रतियोगी परीक्षा में भी सफलता होना होता है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;जनरल इंश्योरेंस एजेंट&lt;/b&gt;- वर्तमान में सरकारी क्षेत्र में चार कंपनियाँ ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड तथा नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड जनरल इंश्योरेंस कंपनियाँ कहलाती हैं। इन कंपनियों में जनरल इंश्योरेंस एजेंट बनने हेतु न्यूनतम आयु सीमा १८ वर्ष निधारित है तथा शहरी क्षेत्रों हेतु बारहवीं तथा ग्रामीण क्षेत्रों हेतु दसवीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। इसके साथ ही जनरल इंश्योरेंस से संबंधित कार्यों की १०० घंटे की ट्रेनिंग तथा आय.आर.डी.ए. की परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। यदि कोई पहले से ही एल.आई.सी एजेंट भी है तो उसे केवल २५ घंटे की ट्रेनिंग ही लेना पड़ती है। एल.आई.सी एवं जी.आई.सी. का संयुक्त लायसेंस भी बन जाता है। वाहन, मेडिक्लेम, पर्सनल, एँसीडेंट, हाउसहोल्ड पॉलिसी, शॉपकीपर फायर पॉलिसी, थेऍट एवं डकैती, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, ऑल रिस्क, ब्रेक डाउन पॉलिसी, मशीनरी ब्रेक डाउन आदि पालिसियाँ जनरलइंश्योरेंस के एजेंट करते हैं ।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;&lt;b&gt;सर्वेयर&lt;/b&gt;- बीमा कराए गए किसी कारोबार में हानि का मूल्यांकन करने का काम सर्वेयर करते हैं। ये वास्तविक हानि का मूल्यांकन करते हैं, झूठे दावों को रोकते हैं तथा बीमा कंपनी व बीमित के बीच की कड़ी होते हैं। अभिकर्ता की तरह ये कंपनी के कर्मचारी नहीं होते अपितु स्वतंत्र व्यवसायी होते हैं। सर्वेयर बनने हेतु इंजीनियरिंग में डिग्री या डिप्लोमा/आईसीडऒल्यूएआई/सी.ए./विज्ञान में स्नातक उपाधि आवश्यक है। सर्वेयर बनने हेतु एक वर्ष का प्रशिक्षण किसी वरिष्ठ सर्वेयर या सर्वेयर फर्म के साथ आवश्यक है। उसके बाद एक परीक्षा उत्तीर्ण करना होती है। तदुपरांत उन्हें लायसेंस जारी किया जाता है, तत्पश्चात वे किसी एक कंपनी अथवा अनेक कंपनियों से संबद्ध हो सकते हैं।&lt;/p&gt;&lt;p&gt;इसके अतिरिक्त सरकारी एवं निजी बीमा कंपनियों में क्रेडिट कार्ड एजेन्ट, बीमा विशेषज्ञ, एँचुअरी, आदि में भी उज्ज्वल करियर बनाया जा सकता है। बीमा क्षेत्र में करियर बनाने हेतु पहले प्रशिक्षण देने वाले संस्थानों का अभाव था लेकिन आज अनेक संस्थान इसका बाकायदा प्रशिक्षण देने लगे हैं। इंश्योरेंस से जु़डे पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अनिवार्य योग्यता स्नातक है। इंश्योरेंस के क्षेत्र में जो प्रमुख पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं, वे इस प्रकार हैं- पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन इंश्योरेंस, पीजी डिप्लोमा इन इंश्योरेंस मैनेजमेंट एंड मार्केटिंग, एम.बी.ए. इन इंश्योरेंस आदि। इन पाठ्यक्रमों को करने के उपरांत सार्वजनिक एवं निजी बीमा कंपनियों में विभिन्न प्रतिष्ठापूर्ण पदों पर नियुक्त हुआ जा सकता है। &lt;br /&gt;बीमा क्षेत्र से संबंधित पाठ्यक्रम कराने वाले प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं-&lt;/p&gt;&lt;/div&gt;&lt;ul&gt;&lt;br /&gt;&lt;li&gt;कालेज ऑफ वोकेशनल स्टडीज, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली।&lt;/li&gt;&lt;li&gt;एकेडमी ऑफ इंश्योरेंस मैनेजमेंट, दिल्ली&lt;/li&gt;&lt;li&gt;बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी, दिल्ली।&lt;/li&gt;&lt;li&gt;इंश्योरेंस इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, मुंबई।&lt;/li&gt;&lt;li&gt;कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरूक्षेत्र ।&lt;/li&gt;&lt;li&gt;एँचुरियल सोसायटी ऑफ इंडिया, मुंबई।&lt;/li&gt;&lt;/ul&gt;&lt;br /&gt;</description>
    </item>
    <item>
      <title>पबलिक रिलेशन में कॅरियर </title>
      <pubDate>6/11/2010</pubDate>
      <description>&lt;p&gt; विश्व के बदलते परिदृश्य में आज सुनियोजित और प्रभावकारी ढंग से संचालित संगठनों की सफलता और यहाँ तक कि उनके अस्तित्व के लिए भी पबलिक रिलेशन (जनसंपर्क) अनिवार्य हो गया है। न केवल सरकारी, सहकारी, निजी, राजनीतिक , शैक्षिक , धार्मिक संस्थाओं के लिए अपितु व्यक्ति विशेष के प्रचार-प्रसार के लिए भी पबलिक रिलेशन महत्वपूर्ण विधा बनकर उभर रहा है । इसी से संबद्ध है पबलिक रिलेशन ऑफिसर का पद। अगर आप में अपनी बात दूसरों तक पहुँचाने और अपनी बात को मनवाने की क्षमता है तो यह मान लें कि पबलिक रिलेशन ऑफिसर का पद आप ही के लिए बना है ।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;किसी कंपनी के पबलिक रिलेशन ऑफिसर (पी.आर.ओ.) का जॉब बेहद ही रूचिकर होता है। इसके अंतर्गत न सिर्फ अपनी कंपनी की इमेज ही मार्केट में बनानी होती है बल्कि अपनी कंपनी की उन्नति, सुविधाएँ, क्षेत्र के विषय में भिन्न-भिन्न मैग्जीन, न्यूज पेपर, इलेँट्रॉनिक मीडिया तथा संबंधित कार्पोरेट ब्रॉशर आदि द्वारा लोगों तक जानकारियाँ भी पहुँचानी होती हैं। पबलिक रिलेशन ऑफिसर को प्रेस और जनता से जानकारी संबंधी कॉलों के उत्तर देने होते हैं। उन्हें निमंत्रण सूचियों और प्रेस सम्मेलनों के ब्यौरा तैयार करने संबंधी कार्य, आगन्तुकों और ग्राहकों के स्वागत, अनुसंधान में सहायता, सूचना प्रपत्र लिखने, संपादकीय कार्यालयों में विज्ञप्तियाँ भेजने और मीडिया वितरण सूचियाँ तैयार करने जैसे कार्य करने होते हैं । &lt;/p&gt; &lt;p&gt; ज्यादातर लोगों का यह मानना है कि पबलिक रिलेशन ऑफिसर अभिव्यक्ति में निपुण और रचनाशील व्यक्ति होते हैं । परंतु पबलिक रिलेशन ऑफिसरों का स्वयं यह मानना है कि इस क्षेत्र में दबाव के समय सही निर्णय लेने की क्षमता बहुत जरूरी है। एक बेहतर पबलिक रिलेशन ऑफिसर होने के नाते उसे नए-नए और अन्य कंपनियों से मजबूत रिलेशनशिप बनाने के तरीके आने चाहिए। क्रिएटिव विचार, प्रेजेंस ऑफ माइंड, डायनेमिक पर्सनेलिटी तथा अंग्रेजी व प्रादेशिक भाषा का ज्ञान उसे अवश्य होना चाहिए। पबलिक रिलेशन ऑफिसर को उस प्रतिष्ठान के प्रति समर्पित होना चाहिए जिससे वह संबद्ध होता है। उसके लिए कार्यालय का बंधा-बंधाया समय कोई महत्व नहीं रखता। उसका हर क्षण उसके प्रतिष्ठान की उन्नति को समर्पित होता है। पबलिक रिलेशन ऑफिसर का संयमशील, शांत स्वभाव,दूरदर्शी, मिलनसारिता और हंसमुख होना अत्यावश्यक है। आकर्षक व्यक्तित्व का मालिक होना तो जैसे सोने पे सुहागा है। पबलिक रिलेशन ऑफिसर को इस हद तक चुस्त-दुरूढस्त होना चाहिए कि वह हर किसी तक उसके प्रतिष्ठान या हस्ती की काबिलियत पहुँचा सके ।&lt;/p&gt; &lt;p&gt; आज बहुत से पत्रकारों ने बदलाव के विकल्प के रूप में पबलिक रिलेशन कार्य को अपनाया है। बड़ी संख्या में स्नातक ऐसे हैं, जो पत्रकारिता के लिए निकलते हैं, परंतु उन्हें पबलिक रिलेशन में भारी भरकम सफलता मिल जाती है। किसी भी विषय से स्नातक करने के उपरांत आप मास कम्युनिकेशन/पबलिक रिलेशन/मैनेजमेंट या एडवरटाइजिंग में मास्टर डिग्री या डिप्लोमा कोर्स कर इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं । उक्त पाठ्यक्रम करने के उपरांत आप पबलिक रिलेशन/कॉर्पोरेट कम्युनिकेशन/कॉर्पोरेट अफेयर्स/बड़ी कंपनियों के एँसटर्नल अफेयर्स डिपार्टमेंट में स्वतंत्र रूप से पबलिक रिलेशन कंसल्टेंट का काम कर सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न सरकारी एजेंसियों, सेल्स, मैनेजमेंट, कंसल्टेंट ऑर्गेनाइजेशन, ट्रेवल एंड टूरिज्म ऑर्गेनाइजेशन, इवेन्ट मैनेजमेंट तथा बड़े एन.जी.ओ. आदि में भी पबलिक रिलेशन ऑफिसर या कंसल्टेंट के रूप में कार्य कर इस क्षेत्र में शिखर पर पहुँच सकते हैं। पबलिक रिलेशन संबंधी ज्यादातर पाठ्यक्रम पत्रकारिता या जनसंचार संस्थानों द्वारा भी संचालित किए जाते हैं । &lt;/p&gt; &lt;p&gt; पाठ्यक्रम संबंधी कार्य के अतिरिक्त प्रतिष्ठित पबलिक रिलेशन प्रतिष्ठानों में व्यावहारिक अनुभव या प्रशिक्षण भी महत्वपूर्ण होता है । पबलिक रिलेशन से जु़डे पाठ्यक्रमों में मीडिया ऑफ पबलिक रिलेशंस, प्रोडँशन एंड मीडिया कम्युनिकेशन आदि प्रमुख घटक हैं । आमतौर पर इन पाठ्यक्रमों की अवधि एक से दो वर्ष होती है । वैसे भी पबलिक रिलेशन ऑफिसर के लिए पाठ्यक्रम से ज्यादा उसके अपने अनुभव महत्व रखते हैं। उसे मीडिया के तौर-तरीकों की अच्छी जानकारी होनी चाहिए । इन पाठ्यक्रमों में प्रचार-प्रसार और संपर्क की शिक्षा तो दी ही जाती है, साथ ही प्रभावी पाठ्यक्रम बिजनेस हाउस जरनल, बुलेटिन, पत्रिकाएँ, वार्षिक रिपोर्ट, फोल्डर आदि तैयार करने तथा प्रकाशित कराने का भी ज्ञान दिलाते हैं। आज का परिवेश प्रचार-प्रसार का है इसलिए पबलिक रिलेशन ऑफिसर के लिए नौकरी के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं। आज सभी सरकारी, सहकारी, निजी संस्थाएँ पबलिक रिलेशन ऑफिसरों को अच्छा वेतन देती हैं । &lt;/p&gt; पाठ्यक्रम संबंधी कार्य के अतिरिक्त प्रतिष्ठित पबलिक रिलेशन प्रतिष्ठानों में व्यावहारिक अनुभव या प्रशिक्षण भी महत्वपूर्ण होता है । पबलिक रिलेशन से जु़डे पाठ्यक्रमों में मीडिया ऑफ पबलिक रिलेशंस, प्रोडँशन एंड मीडिया कम्युनिकेशन आदि प्रमुख घटक हैं । आमतौर पर इन पाठ्यक्रमों की अवधि एक से दो वर्ष होती है । वैसे भी पबलिक रिलेशन ऑफिसर के लिए पाठ्यक्रम से ज्यादा उसके अपने अनुभव महत्व रखते हैं। उसे मीडिया के तौर-तरीकों की अच्छी जानकारी होनी चाहिए । इन पाठ्यक्रमों में प्रचार-प्रसार और संपर्क की शिक्षा तो दी ही जाती है, साथ ही प्रभावी पाठ्यक्रम बिजनेस हाउस जरनल, बुलेटिन, पत्रिकाएँ, वार्षिक रिपोर्ट, फोल्डर आदि तैयार करने तथा प्रकाशित कराने का भी ज्ञान दिलाते हैं। आज का परिवेश प्रचार-प्रसार का है इसलिए पबलिक रिलेशन ऑफिसर के लिए नौकरी के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हैं। आज सभी सरकारी, सहकारी, निजी संस्थाएँ पबलिक रिलेशन ऑफिसरों को अच्छा वेतन देती हैं । पबलिक रिलेशन में स्नातकोत्तर उपाधि / डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित करने वाले प्रमुख विश्वविद्यालय/मीडिया संस्थान इस प्रकार हैं- &lt;br /&gt; &lt;p&gt; &lt;ul&gt; &lt;li&gt; पबलिक रिलेशन और विज्ञापन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली में उपलब्ध है ।&lt;/li&gt; &lt;li&gt; पबलिक रिलेशन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली में उपलब्ध है। &lt;/li&gt; &lt;li&gt;पबलिक रिलेशन में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ जर्नलिज्म कम्यूनिकेशन, पुणे में उपलब्ध है । &lt;/li&gt; &lt;li&gt;एम.बी.ए.इन पबलिक रिलेशन एंड मास कम्युनिकेशन पाठ्यक्रम देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर में उपलब्ध है । &lt;/li&gt; &lt;li&gt;पबलिक रिलेशन, विज्ञापन और प्रबंधन में एम.ए. पाठ्यक्रढम माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय,भोपाल में उपलब्ध है ।&lt;/li&gt; &lt;/ul&gt; &lt;/p&gt; </description>
    </item>
    <item>
      <title>ऐसे करें कराधान सहायक परीक्षा-2010 की तैयारी</title>
      <pubDate>6/17/2010</pubDate>
      <description>&lt;p&gt;वाणिज्य विषय के जो विद्यार्थी टेक्सेशन में रुचि और दक्षता रखते हैं, उनके लिए मध्यप्रदेश में कराधान सहायक (टेक्सेशन असिस्टेंट) एक अच्छा करियर विकल्प है। मध्यप्रदेश शासन, वाणिज्यिक कर विभाग के अन्तर्गत कराधान सहायक के 175 रिक्त पदों हेतु मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा 6 जून, 2010 को कराधान सहायक परीक्षा-2010 की लिखित परीक्षा आयोजित की जानी है। इस परीक्षा में वाणिज्य से स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण छात्र सम्मिलित हो सकते हैं। इस परीक्षा में सम्मिलित होने हेतु सामान्य वर्ग हेतु न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष और अधिकतम आयु सीमा 30 वर्ष है। मध्यप्रदेश के मूल निवासियों हेतु अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष निर्धारित है। कराधान सहायक परीक्षा के तहत लिखित परीक्षा एवं साक्षात्कार आयोजित किया जाएगा। लिखित परीक्षा वस्तुनिष्ठ (ऑब्जेक्टिव) प्रकार की होगी। लिखित परीक्षा हेतु कुल 450 अंक निर्धारित हैं तथा साक्षात्कार हेतु 50 अंक निर्धारित हैं । इस प्रकार यह परीक्षा 500 अंकों की होगी।&lt;/p&gt; &lt;p&gt;यह उल्लेखनीय है कि कराधान सहायक लिखित परीक्षा में दो प्रश्त्रपत्र होंगे। प्रथम प्रश्नपत्र सामान्य अध्ययन का होगा जो 150 अंकों का होगा। सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र को दो खंडों खंड 'अ` तथा खंड 'ब` में विभाजित किया गया है। खंड 'अ` सामान्य अध्ययन का तथा खंड 'ब` मध्यप्रदेश के सामान्य परिचय से संबंधित होगा। दोनों खंडों हेतु 75-75 अंक निर्धारित हैं। द्वितीय प्रश्नपत्र वाणिज्य विषय का होगा जिसके लिए 300 अंक निर्धारित हैं। &lt;/p&gt; &lt;p&gt;सामान्य अध्ययन का प्रश्नपत्र- सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र के खंड 'अ` में सामान्य विज्ञान एवं पर्यावरण, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएँ ,भारत का इतिहास एवं स्वतंत्र भारत, भारत का भूगोल एवं विश्व की सामान्य भौगोलिक जानकारी भारतीय राजनीति एवं अर्थव्यवस्था, खेलकूद, सामान्य मानसिक योग्यता तथा सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी से संबंधित प्रश्न पूछे जाएँगे। सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र के खंड 'अ` की तैयारी हेतु भारतीय इतिहास तथा संस्कृति को तीन भागों यथा प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत तथा आधुनिक भारत में बाँटा जा सकता है। प्राचीन भारतीय इतिहास को तीन कालावधियों में विभक्त किया जा सकता है- प्रागैतिहासिक काल, आद्यैतिहासिक काल तथा ऐतिहासिक काल । प्रागैतिहासिक काल व आद्य-ऐतिहासिक काल से प्रश्न प्राय: महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों व वहाँ प्राप्त वस्तुओं पर आधारित होते हैं। ऐतिहासिक काल में मुख्यत: सामाजिक सांस्कृतिक पहलू पर ध्यान देना होता है। इसमें भी विशेष रूप से सामाजिक परिवर्तन, शिक्षा के स्रोत, कला एवं स्थापत्य तथा धार्मिक जीवन का विकास। इस अवधि के राजनीतिक इतिहास का भी अध्ययन करना चाहिए। मध्यकालीन भाग से इतिहास के साथ-साथ संस्कृति से भी प्रश्न पूछे जाते हैं । इस काल के साहित्य, चित्रकला व स्थापत्य शैली तथा तकनीकी उपलब्धियों की विस्तृत सूची बनाकर रखनी चाहिए। आधुनिक इतिहास पर विशेष ध्यान केंद्रित करना चाहिए। स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण घटनाओं का अध्ययन आवश्यक है। भारतीय राजनीति की तैयारी में संविधान संशोधन के महत्वपूर्ण तथ्यों एवं उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का अध्ययन लाभप्रद होता है । परीक्षा में पम्परागत तथा संविधान के विकास से संबंधित दोनों तरह के कई प्रश्न पूछे जाते हैं। राजव्यवस्था के अंतर्गत मानवाधिकार, राज्य के नीति निदेशक तत्व, मूल कर्तव्य, कार्यपालिका, आर्थिक प्रक्रिया जैसे बजट (विभिन्न प्रकार के विधेयक जैसे वित्त विधेयक, धन विधेयक आदि), न्यायपालिका विशेषत: सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय के अधिकार (उनके ऐतिहासिक विकास सहित), संघ व राज्यों के बीच संबंध, प्रशासनिक अधिकरण, चुनाव व चुनाव सुधार, आपातकालीन प्रावधान, संविधान संशोधन, पंचायती राज व्यवस्था इत्यादि से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए इन खंडों को विशेष रूप से तैयार करें । सामान्य विज्ञान एवं पर्यावरण एक महत्वपूर्ण खंड है। &lt;/p&gt; &lt;p&gt;सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र के खंड 'अ` में सामान्य विज्ञान एवं पर्यावरण में भौतिकी, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान तथा पर्यावरण एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित प्रश्न भी पूछे जाएंगे। भूगोल खंड में भूगोल से संबंधित प्रश्न होते हैं। इनमें भूकंप के बुनियादी लक्षण, दुनिया के जलवायु क्षेत्र, बंदरगाह, ज्वार-भाटा, नदियाँ, बहुउद्देशीय परियोजनाएँ, सिंचाई, फसलें आदि मुख्य होते हैं। मध्यप्रदेश की भौगोलिक जानकारी से जु़डे प्रश्न भी बहुतायात में पूछे जाते हैं। सामान्य अध्ययन का एक और महत्वपूर्ण खंड है अर्थव्यवस्था। इसके लिए प्रतियोगी को भारतीय व विश्व अर्थव्यवस्था में हुई पहल व विकास का समीक्षात्मक विश्लेषण करना चाहिए। इसके अन्तर्गत अर्थव्यवस्था की प्रकृति, पूँजी निर्माण, राष्ट्रीय आय, आय वितरण, भारत में नियोजन, भारत का विदेश व्यापार, भुगतान संतुलन, मुद्रास्फीति, भारत में बैंकिंग प्रणाली, राजकोषीय ढाँचा, संरचनात्मक सुधार, खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, औद्योगिक नीति, औद्योगिक रुग्णता तैयारी के मुख्य बिंदु हो सकते हैं। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित विभिन्न शब्दों का अर्थ तथा कम्प्यूटर के विभिन्न भागों के कार्यों, हार्डवेयर एवं सॉफ्टवेयर की जानकारी भी बेहद जरूरी है। इस भाग की तैयारी हेतु आप बेसिक कम्प्यूटर की किताबों का सहारा भी ले सकते हैं। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाओं की तैयारी में प्रतियोगियों को चाहिए कि वे केवल राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व की राजनीतिक घटनाओं को ही इस खंड की तैयारी में शामिल न करें अपितु चर्चा में रहने वाले विभिन्न विषयों पर भी ध्यान दें। &lt;/p&gt; &lt;p&gt;चूँकि सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र के खंड 'ब` में मध्यप्रदेश से संबंधित 75 प्रश्न पूछे जाएँगे। अत: मध्यप्रदेश के सामान्य ज्ञान की विशेष तैयारी जरूरी है। सामान्य अध्ययन खंड (ब) के प्रश्नपत्र में मध्यप्रदेश का भूगोल, मध्यप्रदेश के प्राकृतिक संसाधन, मध्यप्रदेश में मानव संसाधन, मध्यप्रदेश में ऊर्जा संसाधन, मध्यप्रदेश में उद्योग, मध्यप्रदेश का पर्यावरण, मध्यप्रदेश की योजनाएँ एवं मूल्यांकन, मध्यप्रदेश की प्रशासनिक संरचना, मध्यप्रदेश में खेलकूद, मध्यप्रदेश की संस्कृति, साहित्य, संगीत, नृत्य, कला एवं इतिहास, मध्यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति, मध्यप्रदेश के कार्यत्रऎम, मध्यप्रदेश की पुरातात्विक विरासत तथा मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से संबंधित प्रश्न पूछे जाएँगे। &lt;/p&gt; &lt;p&gt;वाणिज्य का प्रश्नपत्र - कराधान सहायक लिखित परीक्षा का द्वितीय प्रश्नपत्र वाणिज्य विषय से संबंधित है। इस प्रश्नपत्र में सैद्धांतिक लेखांकन, व्यवहारिक लेखांकन, साझेदारी लेखे, कऔपनी लेखे, लागन लेखे, अंकेक्षण, प्रबंधन, सचिवीय पद्धति, व्यावसायिक गणित, वाणिज्य के विविध आयाम (उद्यमिता की प्रकृति कार्य एवं महत्व, स्कंध विनिर्माण के कार्य एवं महत्व, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ एवं उनके कार्य,व्यवसायिक वातावरण को प्रभावित करने वाले घटक, ई-कामर्स की विशेषताएँ, व्यवसाय में कम्प्यूटर का अनुप्रयोग आदि) तथा मूल्य वर्धित कर, केंद्रीय बिक्री कर एवं प्रवेश कर से संबंधित प्रश्न पूछे जाएँगे। &lt;/p&gt; &lt;p&gt; चूँकि कराधान सहायक का पद अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसमें बड़ी संख्या में वाणिज्य केछात्र शामिल होंगे अतएवं इस परीक्षा के दोनों प्रश्नपत्रों की सुनियोजित तैयारी जरूरी है। सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र के भाग'अ` की तैयारी हेतु सबसे पहले एनसीईआरटी की वे पुस्तकें जो 11वीं और 12वीं कक्षाओं में पाठ्यक्रम में निर्धारित हैं राज्य सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए पढ़ी जानी चाहिए। इनमें भारतीय इतिहास, भूगोल, राजनीतिक व्यवस्था, अर्थशास्त्र, आर्थिक नियोजन, संविधान और विज्ञान की पुस्तकें अत्यधिक महत्वपूर्ण अध्ययन संदर्भ हैं। सामान्य ज्ञान की ऐसी बुनियादी तैयारी के साथ-साथ प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी हेतु उपलब्ध स्तरीय मासिक पत्रिकाओं का अध्ययन आवश्यक होता है। वहीं दूसरी ओर कुछ विशिष्ट पुस्तकें भी लाभप्रद हैं । ये पुस्तकें हैं- इतिहास हेतु- प्राचीन भारत का इतिहास झा एवं श्रीमाली, मध्यकालीन भारत- डॉ. आशीर्वादी लाल, आधुनिक भारत का इतिहास- बी.एल. ग्रोवर, भारत का स्वतंत्रता संग्राम- डॉ. विपिनचंद्र। संविधान एवं राजव्यवस्था हेतु- भारत का संविधान- डी.डी.बसु । भूगोल हेतु- भारत का भूगोल- गोपालसिंह, सी.बी. मामोरिया। अर्थव्यवस्था हेतु- भारतीय अर्थव्यवस्था-दास एवं सुंदरम्, भारतीय अर्थव्यवस्था मिश्र एवं पुरी । वाणिज्य के प्रश्नपत्र की तैयारी के लिए उम्मीदवार उन सभी पुस्तकों का अध्ययन कर सकते हैं जो उन्होंने कामर्स ग्रेजुएट होने तक प़ढ़ी हैं। इन सबके साथ-साथ मध्यप्रदेश सरकार के प्रकाशन- पंचायिका, मध्यप्रदेश संदेश, रोजगार और निर्माण तथा मध्यप्रदेश सामान्य ज्ञान केंद्रीत मासिक पत्रिका प्रतियोगिता निर्देशिका एवं प्रतियोगिता निर्देशिका के कराधान सहायक परीक्षा-2010 के परीक्षोपयोगी नोट्स का अध्ययन भी काफी लाभप्रद होगा । &lt;/p&gt; &lt;p&gt; वे सभी युवा जो कराधान सहायक परीक्षा-2010 में चयनित होने का सपना संजो रहे हैं उन्हें चाहिए कि वे परिश्रम और आत्मविश्वास के संकल्प के साथ अच्छे अध्ययन संदर्भों का उपयोग करें। यदि उम्मीदवार समय प्रबंधन के साथ व्यवस्थित तरीके से इस परीक्षा की तैयारी कर लेते हैं तो सफलता निश्चित ही उनके कदमों में होगी। &lt;/p&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt; </description>
    </item>
    <item>
      <title>टेली कम्युनिकेशन के क्षेत्र में कॅरियर के उजले अवसर </title>
      <pubDate>6/11/2010</pubDate>
      <description>&lt;p&gt; टेलीफोन का आविष्कार करने वाले ग्राहम बेल ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उसका यह आविष्कार समूचे विश्व को इतना करीब ला देगा कि हम हजारों किलोमीटर दूर बैठे लोगों से पलभर में जु़ड जाएँगे। वर्तमान समय की बात करें तो टेलीफोन वर्तमान समाज की वह अहम जरूरत बन चुका है, जिसके बिना आपसी संबंधों को जिंदा रख पाना मुमकिन नहीं जान पड़ता। भारत की बात की जाए तो गाँव-गाँव में टेलीफोन एवं मोबाइल के पहुँचने से आज हर सुख-दु:ख में हम सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे अपनों को करीब पाते हैं।&lt;/p&gt; &lt;p&gt; संचार एक ऐसा माध्यम है, जो आम आदमी की हर जरूरत को पूरा करता नजर आ रहा है। जहाँ बेसिक फोन घर की चार दीवारी में उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरा करते हैं, वहीं मोबाइल (सेल्यूलर) फोन हर कदम पर हमारा साथी बनकर उभरा है। यही कारण है कि आज के दौर में तेजी से विकसित हो रही टेलीकॉम इंडस्ट्री के संचालन के लिए न केवल तकनीकी बल्कि मैनेजमेंट व मार्केटिंग में प्रशिक्षित युवाओं की भारी माँग है। टेलीकॉम इंडस्ट्री में निजी क्षेत्र के प्रवेश करने के बाद से युवाओं में इस क्षेत्र की औपचारिक शिक्षा प्राप्त् करने का रूझान भी बहुत बढ़ गया है। &lt;/p&gt;&lt;p&gt; जिस तेज रफ्तार से इस क्षेत्र का विकास हुआ है, उसी तेजी से देश के प्रशिक्षण संस्थानों में टेलीकॉम इंडस्ट्री की माँग के अनुसार प्रोफेशनल्स तैयार करने के लिए नए-नए कोर्स शुरू हुए हैं। आज आप टेलीकॉम इंडस्ट्री में जाने के लिए बीटेक इन इलेट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन, बी.एस.सी. इन टेलीकम्युनिकेशन, पीजी डिप्लोमा इन मोबाइल एंड ऑप्टिकल टेक्नोलॉजी जैसे कोर्स कर सकते हैं। इसके अलावा एमबीए टेलीकॉम जैसे कोर्स तो इस इंडस्ट्री की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ही डिजाइन किए गए हैं। इसमें ७० प्रतिशत प़ाई प्रबंधन और ३० प्रतिशत पढ़ाई टेलीकॉम इंजीनियरिंग से संबंधित होती है। इन कोर्सों के अलावा टेलीकॉम में एमटेक, एमई आदि कोर्स भी उपलब्ध हैं। बीई, बीटेक कोर्स चार वर्षीय हैं, जबकि एमई, एमटेक और एमबीए दो वर्षीय कोर्स हैं। हालाँकि कुछ समय पहले तक टेलीकॉम इंडस्ट्री में बीटेक इलेट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन की माँग बहुत अधिक थी, लेकिन टेलीकॉम के स्पेशलाइज्ड कोर्सों के आ जाने से कंपनियों का रूझान इन कोर्सों से प्रशिक्षित युवाओं की ओर बढ़ा है। &lt;/p&gt; &lt;p&gt;शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो बीटेक और बीई कोर्स के लिए गणित एवं भौतिकी के साथ बारहवीं, एमबीए इन टेलीकम्युनिकेशन और पीजी डिप्लोमा इन मोबाइल और ऑप्टिकल टेक्नोलॉजी के लिए विज्ञान या इंजीनियरिंग में स्नातक, एमई और एमटेक पाठ्यक्रमों के लिए संबंधित क्षेत्र में बीई और बीटेक होना जरूरी है। तीन साल के टेलीकम्युनिकेशन के डिप्लोमा पाठ्यक्रम हेतु दसवीं कक्षा गणित विषय के साथ उत्तीर्ण होना आवश्यक है।&lt;/p&gt; &lt;p&gt; मैनेजमेंट और डिप्लोमा कोर्सों के अलावा सभी टेली कम्युनिकेशन कोर्सों के विषय लगभग समान ही होते हैं। बीटेक,बीई में एनालॉग और डिजिटल कम्युनिकेशन, मल्टीमीडिया एवं डाटा कम्युनिकेशन, नेटवर्किंग, ऑप्टिकल कम्युनिकेशन, मॉडयूलेशन टेक्निक आदि विषय पढ़ाए जाते हैं। मास्टर डिग्री में छात्रों को स्पेशलाइज्ड सब्जेक्टस की जानकारी दी जाती है। सॉफ्टवेयर निर्माण, नेटवर्किंग, मेंटेनेंस, मैनेजमेंट, कस्टमर रिलेशन, रिसर्च एवं डेवलपमेंट आदि के विषय में भी जानकारी दी प्रदान की जाती है। जहाँ तक टेलीफोन उपकरणों की असेंबलिंग का सवाल है तो इसकी थोड़ी बहुत जानकारी डिप्लोमा स्तर के शॉर्ट टर्म कोर्सों में भी दी जाती है।&lt;/p&gt;&lt;p&gt; टेलीकॉम इंडस्ट्री में जिस तेजी से तरक्की हो रही है, उसी तेजी के साथ युवाओं के लिए बेहतर भविष्य की राह भी खुल रही है। अनुमानों के अनुसार अगले तीन सालों में इस इंडस्ट्री को तीन लाख से ज्यादा योग्य तथा प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत पड़ने जा रही है। सरकारी क्षेत्र की कंपनियों में बीएसएनएल, एमटीएनएल, वीएसएनएल के विकल्प उपलब्ध हैं, जबकि गैर सरकारी कंपनियों की बात करें तो नौकरियों के विकल्प केवल उन्हीं कंपनियों में ही उपलब्ध नहीं हैं जो सर्विस उपलब्ध कराती हैं, बल्कि उन कंपनियों में भी अच्छे कॅरियर विकल्प हैं, जो विभिन्न प्रकार के टेलीफोनिक उपकरण और मशीनरी का निर्माण करती हैं। विभिन्न कंपनियों के टेलीकॉम डिपार्टमेंट और सरकारी व निजी क्षेत्रों में ट्रेनी, प्रोजेक्ट मैनेजर, जूनियर इंजीनियर, सिस्टम इंजीनियर, ऑपरेशन हेड आदि के रूप में काम कर सकते हैं। इसके अलावा रेलवे, पुलिस और सेना के टेलीकॉम विभाग में भी रोजगार की संभावनाएँ हैं। &lt;/p&gt; &lt;p&gt; जो विद्यार्थी इस क्षेत्र में शिक्षण कार्य को प्राथमिकता देते हैं, उनके लिए शिक्षा व्यवसाय में भी अपार संभावनाएँ हैं। टेलीकॉम इंजीनियरिंग कॉलेजों में यूजीसी वेतनमानों पर शिक्षक, प्रोफेसर, प्रिंसिपल आदि के पद होते हैं। टेलीकॉम कंपनियाँ भी बतौर सलाहकार व प्रशिक्षणार्थी के पद प्रदान करती हैं और विभिन्न सुविधाओं के साथ अच्छा वेतन भी देती हैं। टेलीकॉम सेँटर में स्वरोजगार की भी उजली संभावनाएँ हैं। टेलीफोन एवं मोबाइल फोन रिपेयरिंग का कोर्स करने के उपरांत थोड़ी-सी पूँजी के साथ मोबाइल एवं टेलीफोन रिपेयरिंग का स्वरोजगार भी प्रारंभ किया जा सकता है और अच्छी आमदनी प्राप्त् की जा सकती है। इसके लिए बैंक से ऋण की भी सुविधा उपलब्ध है। &lt;/p&gt;&lt;p&gt;मध्यप्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों में टेली कम्युनिकेशन का बैचलर डिग्री पाठ्यक्रम उपलब्ध है। इसमें प्रवेश एमपी पीईटी परीक्षा के माध्यम से दिया जाता है। एमपी पीईटी परीक्षा में देश के सभी राज्यों के विद्यार्थी शामिल हो सकते हैं। एमपी पीईटी के द्वारा प्रायवेट कॉलेजों में भरी जाने वाली ८५ प्रतिशत सीटें ओपन नेशनल मेरिट के आधार पर निर्धारित होती हैं।&lt;/p&gt;टेली कम्युनिकेशन का कोर्स कराने वाले देश के प्रमुख संस्थान इस प्रकार हैं- &lt;ul&gt;&lt;br /&gt; &lt;li&gt;भारती स्कूल ऑफ टेलीकम्युनिकेशन एंड मैनेजमेंट, आईआईटी कैम्पस, नई दिल्ली। &lt;/li&gt; &lt;li&gt;एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेलीकॉम टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट, नोएडा।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, खडग़पुर।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;बिडल़ा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, राँची।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;बंगलुरु, इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बंगलुरू।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;पुणे विश्वविद्यालय, पुणे।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;मुंबई विश्वविद्यालय, मुंबई।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, चंडीगढ़।&lt;/li&gt; &lt;li&gt;मध्यप्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेज।&lt;/li&gt; &lt;/ul&gt;&lt;br /&gt;</description>
    </item>
    <item>
      <title>मध्यप्रदेश सिविल न्यायाधीश वर्ग-2 (प्रवेश स्तर) परीक्षा-2010 हेतु नोट्स</title>
      <pubDate>6/17/2010</pubDate>
      <description>&lt;div style="clear:both;font-size: 25px; padding: 20px"&gt; &lt;div style="float:left; width:400px;"&gt; &lt;h1&gt;मध्यप्रदेश सिविल न्यायाधीश वर्ग-2 (प्रवेश स्तर) परीक्षा-2010 हेतु नोट्स&lt;/h1&gt; &lt;br /&gt; &lt;p&gt; मध्यप्रदेश सिविल न्यायाधीश वर्ग-2 (प्रवेश स्तर) परीक्षा-2010 के लिए परीक्षोपयोगी नोट्स उपलब्ध हैं । नोट्स में सामान्य अध्ययन तथा भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता, व्यवहार प्रक्रिया संहिता, भारतीय संविदा अधिनियम, संपत्ति अंतरण अधिनियम, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, मियाद अधिनियम, मध्यप्रदेश आवास नियंत्रण अधिनियम एवं मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता पर अत्यधिक परीक्षोपयोगी सामग्री है। सिविल न्यायाधीश वर्ग-2 (प्रवेश स्तर) परीक्षा-2010 के नोट्स मँगाने के लिए 550 रुपए (डाक खर्च 50 रुपए सहित) का मनीऑर्डर / बैंक ड्रॉफ्ट भेजें&lt;/p&gt; &lt;/div&gt; &lt;div style="float:right; width:400px;"&gt; &lt;h1&gt;मध्यप्रदेश सिविल न्यायाधीश वर्ग-2 (प्रवेश स्तर) परीक्षा-2010 के मॉडल टेस्ट पेपर &lt;/h1&gt;&lt;br/&gt; &lt;p&gt; मध्यप्रदेश सिविल न्यायाधीश वर्ग-2 (प्रवेश स्तर) परीक्षा-2010 के मॉडल टेस्ट पेपर प्रतियोगिता निर्देशिका के जून,जुलाई, अगस्त, 2010 अंक में दिए जा रहे हैं।&lt;br/&gt; प्रतियोगिता निर्देशिका का मूल्य 20 रुपए हैं। आज ही अपनी प्रति नजदीक के बुक स्टॉल से खरीदें। प्रतियोगिता निर्देशिका की वार्षिक सदस्यता प्राप्त करने हेतु 200 रुपए का मनीऑर्डर / बैंक ड्रॉफ्ट भेजें&lt;/p&gt; &lt;/div&gt; &lt;/div&gt; &lt;div style="clear:both;font-size: 25px; "&gt; पता:&lt;br/&gt; प्रतियोगिता निर्देशिका 111, गुमास्तानगर,इंदौर-9 फोन नं. 0731- 2482060 begin_of_the_skype_highlighting              0731- 2482060      end_of_the_skype_highlighting, 2480090 &lt;/div&gt;</description>
    </item>
    <item>
      <title>मध्यप्रदेश राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2010 में सफलता हेतु रणनीति</title>
      <pubDate>10/20/2010</pubDate>
      <description>
&lt;p&gt;मध्यप्रदेश राज्य सेवा परीक्षा के माध्यम से उच्च प्रशासनिक पद की प्राप्ति बड़ी संख्या में युवाओं का एक करियर  स्वप्न होता है। वे युवा जो अत्यधिक प्रतिस्पर्धा के कारण सिविल सर्विस परीक्षा में चयनित नहीं हो पाते हैं या  जिनका उद्देश्य राज्य में रहकर ही प्रशासनिक  सेवा की डगर पर बढ़ना होता है, वे परिश्रम, आत्मविश्वास और  सुनियोजित तैयारी से राज्य के विभिन्न तरह के प्रशासनिक पदों पर चयनित हो सकते हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;ध्यातव्य है कि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा 20 फरवरी, 2011 को ली जाने वाली मध्यप्रदेश राज्य सेवा  प्रारंभिक परीक्षा-2010 नए पैटर्न एवं नए सिलेबस के आधार पर आयोजित की जानी है। इस बार 305 पद  विज्ञापित किए गए हैं। मध्यप्रदेश राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2010 में दो वस्तुनिष्ठ  प्रश्नपत्र होंगे। पहला प्रश्नपत्र  सामान्य अध्ययन का एवं दूसरा प्रश्नपत्र ऐच्छिक विषय का होगा । सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र में 150 वस्तुनिष्ठ  प्रश्न पूछे जाएँगे, जिनके कुल पूर्णांक 150 निर्धारित हैं जबकि ऐच्छिक विषय के  प्रश्नपत्र में 120 वस्तुनिष्ठ  प्रश्न  पूछे जाएँगे जिनके कुल 300 अंक निधारित हैं।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;गौरतलब है कि मध्यप्रदेश राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा के बारे में कई उम्मीदवारों की यह धारणा होती है कि यह  बहुत कठिन परीक्षा है और इसमें चयनित होने के लिए प्रतियोगी का केवल मेधावी होना जरूरी है। सामान्य  मानसिक स्तर वाले विद्यार्थी इसमें सफल होने की संभावना कम रखते हैं लेकिन यह धारणा पूर्णत: गलत है। इस  परीक्षा में मेधावी छात्रों के  साथ-साथ वे सभी छात्र-छात्राएँ सफलता की एक जैसी ही संभावनाएँ रखते हैं जो  परिश्रम, सुनियोजित तैयारी और अच्छे अध्ययन संदर्भों को आधार बना लेते हैं। नि:संदेह यदि प्रारंभ से ही तैयारी  की रणनीति बना ली जाए और अच्छी पुस्तकों तथा पत्रिकाओं को अध्ययन का आधार बना लिया जाए तो पहले  दिन से ही सफलता की संभावनाएँ आपकी मुट्ठी में समा जाती हैं। इस परीक्षा में सम्मिलित होने वाले सभी  प्रतियोगी सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र के लिए चिंतित तो रहते हैं लेकिन सुनियोजित रूप से वे उसकी तैयारी नहीं  करते हैं। नि:संदेह सामान्य अध्ययन की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।&lt;/p&gt;
सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र को दस खंडों में बाँटा गया है, जो इस प्रकार हैं- 
&lt;ul&gt;
&lt;li&gt;सामान्य विज्ञान एवं पर्यावरण&lt;/li&gt; 
&lt;li&gt;राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएँ&lt;/li&gt; 
&lt;li&gt;भारत का इतिहास एवं स्वतंत्र भारत&lt;/li&gt; 
&lt;li&gt;भारत का भूगोल एवं विश्व की सामान्य भौगोलिक जानकारी&lt;/li&gt; 
&lt;li&gt;भारतीय राजनीति एवं अर्थव्यवस्था&lt;/li&gt; 
&lt;li&gt;खेलकूद&lt;/li&gt; 
&lt;li&gt;मध्यप्रदेश का भूगोल इतिहास तथा संस्कृति&lt;/li&gt; 
&lt;li&gt;मध्यप्रदेश की राजनीति एवं अर्थव्यवस्था&lt;/li&gt; 
&lt;li&gt;सामान्य मानसिक योग्यता&lt;/li&gt; 
&lt;li&gt;सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी&lt;/li&gt; 
&lt;/ul&gt;
&lt;p&gt;मध्यप्रदेश राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2010 के सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र  में सामान्य विज्ञान एवं पर्यावरण एक  महत्वपूर्ण खंड है। सामान्य विज्ञान एवं पर्यावरण में भौतिकी, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान तथा पर्यावरण एवं  पर्यावरण संरक्षण से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।  इन प्रश्नों की विशेष तैयारी आवश्यक है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाओं की तैयारी में प्रतियोगियों को चाहिए कि वे केवल राष्ट्रीय एवं  अंतरराष्ट्रीय महत्व की राजनीतिक  घटनाओं को ही इस खंड की तैयारी में शामिल न करें अपितु चर्चा में रहने वाले  विभिन्न विषयों पर भी ध्यान दें।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;मध्यप्रदेश राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2010 के सामान्य अध्ययन खंड में भारतीय इतिहास तथा संस्कृति से  संबंधित कई प्रश्न पूछे जाते हैं। इसकी तैयारी हेतु इतिहास को तीन भागों यथा प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत  तथा आधुनिक भारत में बाँटा जा सकता है। प्राचीन भारतीय इतिहास को तीन कालावधियों में विभक्त किया जा  सकता है- प्रागैतिहासिक काल, आद्यैतिहासिक काल तथा ऐतिहासिक काल। प्रागैतिहासिक काल व आद्य-ऐतिहासिक  काल से प्रश्न प्राय: महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों व वहाँ प्राप्त वस्तुओं पर आधारित होते हैं। ऐतिहासिक काल में  मुख्यत: सामाजिक-सांस्कृतिक पहलू पर ध्यान देना होता है। इसमें भी विशेष रूप से सामाजिक परिवर्तन, शिक्षा के  स्रोत, कला एवं स्थापत्य तथा धार्मिक जीवन का विकास। इस अवधि के राजनीतिक इतिहास का भी अध्ययन  करना चाहिए। मध्यकालीन भाग से  इतिहास के  साथ-साथ संस्कृति से भी अधिक प्रश्न पूछे जाते हैं । इस काल  के  साहित्य, चित्रकला व स्थापत्य शैली तथा तकनीकी उपलब्धि की विस्तृत सूची बनाकर रखनी चाहिए। आधुनिक  इतिहास सबसे महत्वपूर्ण तथा सर्वाधिक अंकदायी भाग है, अत: इस पर विशेष ध्यान केंद्रित करना चाहिए।  स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण घटनाओं का अध्ययन आवश्यक है।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;भूगोल खंड में भूगोल से संबंधित प्रश्न होते हैं। इनमें भूकंप के  बुनियादी लक्षण, दुनिया के  जलवायु क्षेत्र,  बंदरगाह, ज्वार-भाटा, नदियाँ, बहुउद्देशीय परियोजनाएँ, सिंचाई, फसलें आदि मुख्य होते हैं। भूगोल की तैयारी के   संबंध में एक विशेष बात है मानचित्र की जानकारी। मोटे तौर पर परीक्षार्थियों को मानचित्र पर विभिन्न महत्वपूर्ण,  स्थानों, पर्वतों, नदियों, झीलों की स्थिति के बारे में जानकारी होना चाहिए। मध्यप्रदेश की भौगोलिक जानकारी से  जु़डे प्रश्न भी बहुतायात में पूछे जाते हैं।
&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र के अंतर्गत भारतीय राजनीति की तैयारी में संविधान संशोधन के महत्वपूर्ण तथ्यों एवं  उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों का अध्ययन लाभप्रद होता है । प्रारंभिक परीक्षा में परम्परागत  तथा संविधान के विकास से संबंधित दोनों तरह के कई प्रश्न पूछे जाते हैं । राजव्यवस्था के  अंतर्गत मानवाधिकार,  राज्य के  नीति निदेशक तत्व, मूल कर्तव्य, कार्यपालिका, आर्थिक प्रक्रिया जैसे बजट (विभिन्न प्रकार के विधेयक  जैसे वित्त विधेयक धन विधेयक आदि), न्यायपालिका विशेषत: सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालय के  अधिकार  (उनके ऐतिहासिक विकास सहित), संघ व राज्यों के बीच संबंध, प्रशासनिक अधिकरण, चुनाव व चुनाव सुधार,  आपातकालीन प्रावधान, संविधान संशोधन, पंचायती राज व्यवस्था इत्यादि से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए  इन खंडों को विशेष रूप से तैयार करें। सामान्य अध्ययन का एक और महत्वपूर्ण खंड है अर्थव्यवस्था। इसके लिए  प्रतियोगी को भारतीय व विश्व अर्थव्यवस्था में हुई पहल व विकास का समीक्षात्मक  विश्लेषण करना चाहिए। इसके  अन्तर्गत अर्थव्यवस्था की प्रकृति, पूँजी निर्माण, राष्ट्रीय आय, आय वितरण, भारत में नियोजन, भारत का विदेश  व्यापार, भुगतान संतुलन, मुद्रास्फीति, भारत में बैंकिंग प्रणाली, राजकोषीय ढाँचा, संरचनात्मक सुधार, खाद्य सुरक्षा,  सार्वजनिक वितरण प्रणाली, औद्योगिक नीति, औद्योगिक  रुग्णता तैयारी के मुख्य बिंदु हो सकते हैं।  सामान्य  अध्ययन के नए पाठ्यक्रम में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी भी सम्मिलित की गई है विगत वर्ष इस खंड से बहुत  बड़ी संख्या में प्रश्न पूछे गए थे। अत: इस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित  विभिन्न शब्दों का अर्थ तथा कम्प्यूटर के विभिन्न भागों के कार्यों, हार्डवेयर एवं सॉऍटवेयर की जानकारी भी बेहद  जरूरी है। इस भाग की तैयारी हेतु आप बेसिक कम्प्यूटर की किताबों का सहारा भी ले सकते हैं। सामान्य अध्ययन  प्रश्नपत्र की तैयारी हेतु सबसे पहले एनसीईआरटी की वे पुस्तकें जो 11वीं और 12वीं कक्षाओं में पाठ्यक्रम में  निर्धारित हैं राज्य सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए पढ़ी जानी चाहिए। इनमें भारतीय इतिहास, भूगोल, राजनीतिक व्यवस्था, अर्थशास्त्र, आर्थिक नियोजन, संविधान और विज्ञान की पुस्तकें अत्यधिक  महत्वपूर्ण अध्ययन संदर्भ हैं।  सामान्य ज्ञान की ऐसी बुनियादी तैयारी के  साथ-साथ प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी हेतु उपलब्ध स्तरीय मासिक  पत्रिकाओं का अध्ययन आवश्यक होता है। चूँकि सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र में मध्यप्रदेश से संबंधित ढ़ेरों प्रश्न  पूछे जाते हैं। अत: मध्यप्रदेश के  सामान्य ज्ञान की भी विशेष तैयारी जरूरी है। सामान्य अध्ययन की तैयारी के  लिए जहाँ एक ओर भारत सरकार के  प्रकाशन- योजना, कुरुक्षेत्र, मध्यप्रदेश सरकार के प्रकाशन- पंचायिका,  मध्यप्रदेश संदेश, रोजगार और निर्माण, स्तरीय मासिक पत्रिकाएँ- मध्यप्रदेश सामान्य ज्ञान केंद्रीत प्रतियोगिता  निर्देशिका, सामान्य ज्ञान दर्पण, काम्पीटिशन सक्सेस रिव्यू आदि उपयोगी हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ विशिष्ट  पुस्तकें  भी लाभप्रद हैं । ये पुस्तकें हैं- इतिहास  हेतु- प्राचीन भारत का इतिहास झा एवं श्रीमाली, भारत का इतिहास-  रोमिला थापर, मध्यकालीन भारत- डॉ. आशीर्वादी लाल, आधुनिक भारत का इतिहास- बी.एल. ग्रोवर, भारत का  स्वतंत्रता संग्राम- डॉ. विपिनचंद्र। संविधान एवं राजव्यवस्था हेतु- भारत का संविधान- डी.डी.बसु। भूगोल हेतु- भारत  का भूगोल- गोपालसिंह, सी.बी. मामोरिया। अर्थव्यवस्था हेतु- भारतीय अर्थव्यवस्था-दत्त एवं सुंदरम्, भारतीय  अर्थव्यवस्था मिश्र एवं पुरी । इसके अलावा भारत- 2010 तथा मनोरमा ईयर बुक 2010 का अध्ययन भी काफी  लाभप्रद होगा।  इसके साथ ही प्रतियोगिता निर्देशिका के नोट्स भी तैयारी में बहुत सहायक सिद्ध होंगे। वे सभी  प्रतियोगी जो आगामी मध्यप्रदेश राज्य सेवा परीक्षा के माध्यम से राज्य सेवा के  प्रतिष्ठित पद पर चयनित होने  का सपना संजो रहे हैं उन्हें चाहिए कि वे परिश्रम और आत्मविश्वास के संकल्प के साथ राज्य सेवा प्रारंभिक  परीक्षा-2010 की तैयारी करें। यदि पूरे मनोयोग से तैयारी करेंगे तो सफलता अवश्य ही मिलेगी।&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;a href="http://www.flair-solution.com/docs/test-paper-MPPSC-PRE-2010.pdf" target="_blank"&gt;Download Model Paper for MPPSC Pre 2010&lt;a&gt;&lt;/p&gt;
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